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हम अपने पाठ्यक्रम में हैं अपने छात्रों को पढ़ाते हैं आर्य लोग बाहर से आये और जब खड़गे जैसे नेता संसद में उठाते हैं तब हमें याद आता है यह तो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और षड्यंत्र पूर्ण है । वास्तव में पाश्चात्य लोगों ने और विशेष रूप से अंग्रेजों ने इस देश को पराधीन बनाने के लिए है जो उपायों का सहारा लिया था उनमें से एक उपाय है यह मानना कि आर्य लोग भारत में बाहर से आये हैं । यह नितांत काल्पनिक बल्कि कपोल कल्पित एक सिद्धांत है और जिसको उन्होंने अपने यहां के विद्वानों के द्वारा प्रतिपादित करवा कर प्राचार्य को प्रसारित किया और हम भी उसको मानने लगे । वास्तव में यह देश के विभाजन और टुकड़े करने का एक षड्यंत्र है । उसी का एक उपाय है जिससे हमारे आर्य बाहर से भारत में आए यह मानते हैं । यह बात किस लिए गलत है कि यदि कोई भी व्यक्ति बाहर से आता है तो उसका इतिहास उसके साथ आता है आप कहते हैं कि पूरी जाती उठकर के यहां आइ और यहां उसने यहां के रहने वालों पर आक्रमण किया और उनको पराजित किया पहला प्रश्न यह है कि वह कहां से आई क्या वहां उनके अवशेष हैं उन का इतिहास हैं उनकी भाषा है उनकी संस्कृति है वह आए तो सारी की सारी एक दिन में आकर भारत को नहीं बसे । आकाश मार्ग से तो नहीं आए वह आए होंगे जीन मार्गो से होकर क्या उन मार्ग में उनके अवशेष उनकी संपत्ति उनके समाधान उनकी भाषाएं उनकी संस्कृति के अवशेष  मिलते हैं ? गलत हैं मिथ्या है यह कहना कि यहां आकर उन्होंने आक्रमण किया ।
पूरा वीडियो देखें सुने व् समझें और प्रश्न करें उन नकली इतिहासकारों से जिन्होंने षड्यंत्र वष हम भारतीयो को गुलाम बनाये रखने के लिए नकली इतिहास की रचना की ।
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