Secularism Story of Bharat

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एक कहानी ,,, एक हकीकत ,,, सेकुलरिज्म
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secularism – noun

  1. a doctrine that rejects religion and religious considerations
सेकुलरिज्म माने धर्म निरपेक्षता 
धर्म निरपेक्षता मतलब किसी भी धर्म को नही मानता

क्या आप हिन्दू धर्म को नहीं मानते ?? अगर मानते हो तो आप सेक्युलर कैसे हुए ??
क्या आप इस्लाम धर्म को नही मानते ?? अगर मानते हो तो आप सेक्युलर कैसे हुए ??
और अगर सेक्युलर हि बनना है तो विश्व का कोई भी ऐसा देश बताओ जो सेक्युलर हो ?? है कोई ??
और अगर कोई देश या कोई व्यक्ति सेक्युलर है नहीं की तो फिर क्यूँ रोना रोते हैं मीडिया वाले सेकुलरिज्म का ?? 
क्या किसी में समझ भी है सेकुलरिज्म की ??
सेकुलरिज्म देश मतलब common civil code for all 
सबके लिए एक हि कानून.  

बहुत समय पूर्व की बात है. एक सुन्दर स्थान पर एक परिवार बहुत शान्ति और धनधान्य से रहता था. उस परिवार के सभी सदस्य मेहनती और इमानदार थे. उन्होंने अपने मेहनत के बल पर खूब पैसा कमाया. उनकी सम्पन्नता की चर्चा दूर दूर तक फ़ैल गयी.

उसी स्थान से कुछ दूर डकैतों का एक गिरोह रहता था. उन तक यह बात पहुच गयी की फला गाँव में अमुक व्यक्ति रहता है जो की बेहद संपन्न है यदि उसको लूट लिया जाय तो काफी माल पा जायेंगे और
बाकी का जीवन आसानी से कट जाएगा. अतः उन डकैतों ने योजना बनायी और अचानक आक्रमण किया परिवार से सामर्थ्य भर प्रतिरोध किया पर डकैतों के सामर्थ्य के आगे परिवार ने यह सोच कर
घुटने टेक दिया की उचित मौक़ा आने की प्रतिक्षा करेंगे तब हम भी पलटवार करेंगे. वो डकैत स्थान की सुन्दरता धन धान्यता देख कर वही बसने की सोच लिए और उस परिवार के साथ उनके ही घर में उन्हें डरा धमका कर रहने भी लगे. लेकिन डकैत भी एकजुट थे. उस परिवार के तत्कालीन सदस्य धीरे धीरे काल के गाल में समा गए. और उनके बच्चे और डकैत के बच्चे अब साथ साथ रहने लगे. डकैत के बच्चे अब भी रोब से रहते थे और उस परिवार के बच्चे डरकर और दबकर पर बच्चो के मन में अभी भी यह ख्वाब जिंदा था की एक न एक दिन इन डकैतों को हम भगाकर इन दीमको से अपने घर को खाली करायेंगे.

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एक दो पीढी और बीती तो परिवार वालो के बच्चे सामर्थ्यशाली हुए तो उनमे से कुछ ने कहना शुरू किया की अब बहुत हो गया इन दीमको को घर से बाहर निकाला ही जाना चाहिए. इस पर कुछ और सदस्यों ने कहा की यदि इन्हें इस घर में रहना भी है तो इन्हें भी बराबरी से सारा काम करना होगा. इन्हें कोई विशेष सुविधा नहीं मिलेगी. इसी बीच एक विशेष घटना घटी परिवार के कुछ बच्चे उन डकैतों के बच्चो के साथ जा खड़े हुए और कहने लगे की ये भी मेरे भाई है. खबरदार जो किसी ने इन्हें घर से निकाला. जब परिवार के अन्य सदस्य जो इन डकैतों के बच्चो को निकलने के लिए आगे बढ़ने लगे तो वो सब दैकैतो के बच्चो के साथ मिलकर लड़ाई लड़ने को भी तैयार हो गए.
घर के कुछ सदस्यों को अपनी तरफ मिलता देख , डकैतों के बच्चो के ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा. धीरे धीरे उनका मन और बढ़ने लगा. एक दिन डकैतों के बच्चो ने कहा की हमे इस घर में अलग से हिस्सा चाहिए. जो सदस्य पहले से विरोध में थे वो लाठी लेकर खड़े हो गए की इन परजीवियों को तो कब का मार कर निकाल देना चाहिए था और आज यह घरको काट कर अलग करने की मांग कर रहे है?? लेकिन वो लाठी मारते उसके पहले ही परिवार के वो सदस्य जो की इन डकैतों के संतानों का पक्ष लेते है अपना सर आगे कर दिया और कहा की इनको मारने से पहले हमारी लाश बिछानी होगी. और इस तरह से घर का बटवारा हो गया. घर छोटा हो गया , घर में रहने की भी दिक्कत होने लगी खाने के लिए समस्या पैदा हो गयी. घर के लोग भूखो मरने लगे. तब तक कुछ डकैतों के बच्चो ने कहा की कुछ हमारे मित्र इस परिवार में ही रहते है अतः हमे उस नए परिवार के बदले पुराने परिवार में ही जगह दी जाय.
डकैतों के बच्चो से मिले इस प्यार से उनके समर्थको के ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा. बार बार लाठी उठाने वाले लाठी उठा उठा कर पस्त हो गए थे सो उन्होंने भी कोई खाश प्रतिकार न किया. अतः अब डकैतों के बच्चे फिर से परिवार वालो के साथ उसी रोब से रहने लगे.

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लेकिन अब पता चला है की फिर से उन डकैतों के बच्ची को जो की परिवार के साथ रह रहे थे दिक्कत शुरू हो गयी है उन्हें फिर से एक नया हिस्सा चाहिए और परिवार में रहने वाले उनके समर्थक परिवार का हिस्सा काट कर उनको देने के ;लिए बेचैन हैं.

लेकिन बड़ी अजीब बात है , कुछ लोग आज भी बचे है जिनकी आँखों में अपने परिवार को इन दीमको से मुक्त कराने का सपना जिंदा है.
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जिनकी आँखे आज भी दीमक मुक्त घर का सपना पाले हैं ऐसी दुर्लभ जाति को आज की भाषा में ‘सांप्रदायिक’ कहा जाता है. वो लोग जो बार बार डकैतों के बच्चो का पक्ष लेकर उनके स्वार्थ के लिए उनसे पहले अपना जान कुर्बान करने को तैयार रहते है ऐसी बहुतायत जाति को आजकल कई नामो से
जाना जाता है जैसे की “सेक्युलर” , “बुद्धिजीवी”, “कम्युनिस्ट” इत्यादि.. और इन डकैतों का नाम लेने की शायद जरुरत नहीं होनी चाहिए.

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