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दोस्तों,

हमने भारत सरकार को RTI डाली २ मुद्दों पर.

1 भारत में कितना FDI आजतक आया है ?

जवाब आया की भारत में आज तक कुल मिलकर ३२६५०९ मिलियन US डॉलर आया है.. निचे चित्र में आप ये देख सकते हैं..२००० से २०१४ अप्रैल तक..

इसी डाटा को रूपये में भी सरकार ने बताया की १० लाख ५४७२१ करोड़ रूपये आये ..

डॉलर का रेट इस दौरान काफी ऊपर निचे हुआ.. तो हर साल का एवरेज रेट भी लेंगे तो जाकर कुछ मोटी मोटी तस्वीर हाथ आएगी.

हम सबसे बुरी ASSUMPTION देखते हैं की मान लो २००० से हि डॉलर का रेट ६२ रूपये है..
तो भारत में टोटल रूपये कितने आये ?

३२६५०९ मिलियन US डॉलर को रूपये में बदलते हैं..
३२६५०९*१००००००*६२ = २०२४३५६ करोड़ भारतीय रूपये..
यानि २० लाख करोड़ रूपये… वो भी १४ सालों में…

क्या भारत के पास १० / २० लाख करोड़ रूपये नहीं हैं या नहीं थे ???

अब देखते हैं दूसरा RTI का सवाल
२ भारत में सालाना कितना DOMESTIC SAVINGS है ? यानि घरेलु बचत…

जवाब आया (निचे चित्र में देख सकते हैं)
२०१२-२०१३ (1 साल में) ३० लाख ४३ हज़ार करोड़ भारतीय रूपये.
१९९०-९१ में 1 लाख ३४ हज़ार करोड़ भारतीय रूपये.
इसी तरह जब हमने हर साल का टोटल जमा किया तो पाया २३२ लाख करोड़ रूपये भारत की घरेलु बचत है १९९० से २०१४ तक..
जिसमे से अगर २०००-२०१४ की हि बात करें तो २०० लाख करोड़ तो इस दौरान भारत के पास बचत के रूप में था..

यानि FDI से १० गुना ज्यादा पैसा तो भारत के पास पड़ा है..

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तो सरकारें क्यूँ विदेशी पूंजी की तरफ भागती हैं ??
क्यूँ वो भारत के पैसे का सदुपयोग नही करती ??
क्यूँ वो भारत के लिए रोज नए कर्जे खड़े करते हैं ??
क्यूँ ये सरकारें रुपया का अवमूल्यन हि करती रहती हैं ??

क्या ऐसा करने में इन्हें कोई फायदा है ?? क्या ये विदेशी कंपनियों के एजेंट हैं जो भारत में उनका पैसा लगवाकर लाखों करोड़ों की भारत की लूट करवाते हैं ??

क्या आपको ये लोग देशभक्त या भारत के हित के लिए कार्य करते लगते हैं ???

क्यूँ नहीं पूछते हम इन चोर लुटेरों से की क्या भारत को FDI यानि विदेशी पूंजी की सच में जरुरत है ????

इस RTI से सम्बंधित कोई भी सवाल आप मुझसे पुछ  सकते हैं..

वन्दे मातरम
नवनीत सिंघल

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