Hyderabad suicide Real Story

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    Rohit suicide ! Real story which no one will tell.

    ASA नाम का संगठन जिसका लीडर था रोहित

    इस संगठन ने याकूब मेनन की फांसी का विरोध किया था और पोस्टर लहराये थे की तुम कितने याकूब मारोगे,  हर घर में याकूब पैदा होगा । रोहित ने इस विरोध की पैरवी की थी । मुस्लिम उग्रवादियों की पैरवी करने वाला रोहित उसी के साथियों द्वारा खत्म किया गया है ऐसा अंदेशा है । उसके साथियों ने उसे खत्म किया हो या न किया हो लेकिन भारत के लोग किस व्यक्ति की मौत पर रो रहे हैं यह उन्हें जानना चाहिए ।

    कल so called सभी देशभक्त (नकली) अपनी राजनीती चमकाने मुस्लिम परस्ती के लिए सेकुलरिज्म के लिए हैदराबाद जाएंगे । याद रहे यह वही लोग हैं जो दादरी भी गए थे मुस्लिम की मौत पर लेकिन मालदा नही गए हिन्दुओ की मौत पर क्योंकि मुस्लिम समुदाय ने हत्या की थी हिन्दुओ की ।

    आज फिर बिकाऊ मीडिया कॉंग्रेस्स ; का छोटा बेटा केजरीवाल जो अपने बड़े भाई राहुल गांधी और गोद ली हुई माँ सोनिया के खिलाफ कुछ नही बोलता यह सब आपको हैदराबाद में मिलेंगे ।

    सावधान रहें कुत्तों से यह नकाब पहने ईमानदार बने खुमते रहते हैं । मीडिया, कुकर्मी कोंग्रेसी, आपिये, सेकुलर एवं वामपंथी जिस हिन्दू विरोधी तथाकथित हैदरावादी दलित लड़के के आत्महत्या करने पर रंडी रोना रो रहे है उसकी जरा बैकग्राउन्ड भी जानना जरूरी है ।

    रोहित वेमुला हैदराबाद यूनिवर्सिटी में पढ़ते-पढ़ते ओवेसी के समर्थकों के जाल में फंस गया। उसे दलित और निरीह होने का अहसास दिलाकर उसके मन में हिन्दू और हिंदुत्व से नफरत के बीज बो दिए गये। वो बीज इस तरह अंकुरित हुए कि वो abvp के पोस्टर इसलिए फाड़ता था क्यूंकि उसमें सेफ्रोन कलर था। अभी Zee News में एक वीडियो दिखाया गया जिसमें रोहित की बहस ABVP के कार्यकर्ताओं से हो रही है।
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    ABVP – तुमने हमारा पोस्टर क्यूँ फाड़ा?
    रोहित – मेरी मर्जी।
    ABVP- मर्जी से क्या मतलब?
    रोहित – मेरी मर्जी , बार-बार फाडूगा।
    ABVP- पोस्टर ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा?
    रोहित – मुझे हिन्दू , हिंदुत्व और सेफ्रोन कलर जहाँ दिखेगा फाड़ दूंगा, मुझे नफरत है इससे।
    ABVP – क्या तुम्हे घर में या कहीं सेफ्रोन साड़ी या कपड़ा दिखा तो फाड़ दोगे?
    रोहित – हाँ फाड़ दूंगा क्यूंकि मुझे सेफ्रोन से नफरत है।
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    तो ये है असलियत सो कॉल्ड दलित रोहित वेमुला की। जिनकी सबसे बड़ी खासियत ये थी कि वो ‪#‎याकूब_मेमन_की_फांसी_का_विरोध_कर_रहा_था‬। जिसने सिर्फ विरोध ही नहीं किया बल्कि बाकी दलित साथियों के साथ मिलकर होस्टल के अपने रूम को याकूब मेमोरियल हाल बना कर वहां उसको श्रद्धांजली दी। इस रोहित वेमुला को जरा भी शर्म नहीं आई, जरा भी आत्मा नहीं कचोटी कि इसी याकूब की वजह से मुंबई में 158 निर्दोष व्यक्ति मारे गये जिसमें सभी जाति के लोग थे।
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    इसके बाद रोहित वेमुला यहीं तक नहीं रुका बल्कि हिन्दुओं को परेशान करने की उनसे नफरत करने की पराकाष्ठा पार करते हुए कॉलेज केम्पस में ‪#‎बीफ_पार्टी_भी_आयोजित_की‬।

    मुस्लिमों के हाथ का खिलौना बना रोहित और आखिर में जब उसे होस्टल से बाहर निकालने की बात हुई तो उसने आत्महत्या कर ली। अब केजरीवाल जैसा गिद्ध जिसकी नजर ऐसे ही देशद्रोहियों को आगे बढ़ाने की होती है ने इसे आत्महत्या की जगह हत्या करार देकर ट्वीट कर दिया। ये जय भीम जय मीम का खेल बहुत जहरीला होता जा रहा है। हिन्दुओं में जो खुद को दलित मानकर मुसलमानों के इस जहरीले अभियान में उनका साथ देकर देश में जहर घोल रहे हैं वो ये भूल जाते हैं कि जातिवाद के मामले में इस्लाम सबसे आगे हैं। जहाँ शिया सुन्नी को मारता है। जहाँ ये अहमदिया मुसलमानों को सिर्फ ईद मुबारक बोलने पर तीन साल की सजा देते हैं। जहाँ अहमदिया को कुरान पढ़ने पर जिंदा जला देते हैं। जहाँ ये एक जाति के मुसलमान को दूसरी जाति के मुसलमान की मस्जिद में प्रवेश करने पर खून खराबा कर देते हैं।

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    वो मुसलमान दलित हिन्दुओं को बता रहे हैं कि हिन्दुओं में भेदभाव की नीति है।
    कोई और धर्म ये बात कहता तो समझ में भी आता।
    सूप बोले तो बोले, वो छलनी भी फटके जिसमें बहत्तर छेद।

    Rohith Vemula, a 26 year old Dalit Research Scholar from Hyderabad University committed suicide. He was rusticated and the whole media and a section of people who it seems enjoy the feeling of being victimized are screaming out loud – DALIT …DALIT DALIT….DALIT student hanged himself and as usual, this great media is once again into concealing the real truth.

    Rohith was against hanging Yakub Memon. He was an activist associated with ASA (Ambedkar students Association). The media is hiding the fact that ASA had organised a prayer meet inside the University Campus to protest against hanging Yakub Memom. The students held posters saying – ” Tum Kitne Yakub Maaroge, Har Ghar Se Yakub Niklenge” and when a member of ABVP, Susheel, raised an objection to this on his FB page, he was dragged by 30 ASA members outside his hostel room, beaten up brutally and was forced to delete his post and was made to write an apology. Susheel was rushed to the hospital later then.

    Susheel’s mother went to the University Campus to place a complaint and later went to the court seeking justice for her son. The University then had to take disciplinary action against Rohith and 4 more students and they were rusticated. However, the students were allowed to attend their classes in the campus, they could use the library and take part in everything related to their course. They were not allowed to use their hostel rooms.

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    Now the question is, if students act like goons in any University Campus, can the authorities not take disciplinary action? Rohith came from a poor Dalit family and was using all the reservation facilities. Rohit was a supporter of Yakub Memon, his hanging was a black day in the democracy of India and he his counterparts were ready to produce 1000 more Yakub Memon in return for hanging him. He was organizing Beef festivals inside the Campus, he was an Owaisi supporter …and when disciplinary action is taken against him, he commits suicide?

    Why is the media and many others flashing the Dalit card.

    Rohith is gone, but why did he not fight back like a true Ambedkaraite if he believed that injustice was done upon him?

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