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भारतवर्ष सदा से ज्ञान का आगार रहा है। पश्चिमी जगत में 17वि सदी तक वैज्ञानिकों की यह मान्यता था की पृथ्वी सूर्य की नही बल्कि सूर्य पृथ्वी की परिक्रमा करता है। इसी विपरीत मान्यता के कारण ही वैज्ञानिक गैलिलियो को मृत्युदंड स्वीकार करना पड़ा।
परन्तु भारतीय ऋषियों ने आदिकाल से ही इस सत्य का उद्घाटन आर्ष साहित्य में कर दिया था।
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