Free basics is fraud. Stand against it

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फ्री बेसिक्स के पिंजड़े में फ्री डाटा की मूंगफली।


बंदरो को पकड़ने के लिए शिकारी पिंजड़े में मूंगफलियां रख देते है तथा सलाखों के बीच गेप इतना ही रखा जाता है कि बन्दर का खाली हाथ तो पिंजड़े के भीतर जा सके किन्तु मुट्ठी बाहर न आ सके। बन्दर अपना हाथ सलाखों के अंदर डाल कर पिंजड़े में रखी मूंगफली मुट्ठी में पकड़ लेता है, और उसका हाथ पिंजड़े में फंस जाता है। यदि बन्दर मूंगफली का लालच छोड़ दे तो मुट्ठी खुल जायेगी और वह आजाद हो जाएगा। लेकिन हर बार बन्दर मूंगफली को पकडे रहना ही चुनता है, और शिकारी द्वारा पकड़ा जाता है !!  
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कई फेसबुक यूजर आजकल ‘SEND EMAIL’ का ऑप्शन क्लिक करके फेसबुक की महत्त्वाकांक्षी योजना ‘फ्री बेसिक्स’ को भारत में लागू करवाने में सहयोग कर रहे है। यूजर द्वारा ‘SEND EMAIL’ क्लिक करने से ट्राई (TRAI) के पास यह मेल जाता है कि ईमेल भेजने वाला फ्री-बेसिक्स का समर्थन करता है। साथ ही ईमेल भेजने वाले की मित्र सूची के सभी मित्रो को भी यह नोटिफिकेशन जाता है कि अमुक यूजर ने “भारत में नेट न्युट्रिलिटी को बनाये रखने के लिए फ्री बेसिक्स के समर्थन में मेसेज भेजा है, अत: आप भी भेजे”।
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चूंकि फ्री-बेसिक्स फेसबुक को बेहद मुनाफ़ा और भारत के नागरिको को भारी घाटा देने वाली योजना है, अत: मेल में अन्य विवरण और यूजर का नाम भरकर फॉर्मेट प्रस्तुत करने का काम फेसबुक खुद कर दे रहा है, और यूजर को मेल भेजने के लिए सिर्फ एक क्लिक करना होता है।
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मुझे नहीं पता कि ऐसा क्लिक करने वाले यूजर्स में से कितने व्यक्ति यह जानते है कि उन्होंने असल में भारत में नेट न्युट्रिलिटी को ख़त्म करने के लिए ट्राई को  ईमेल भेज दिया है, या कितनो ने ईमेल के कंटेंट को पढ़ा है या कितने फ्री-बेसिक्स की नीति से वाकिफ है। लेकिन कई गंभीर कार्यकर्ताओ द्वारा भी भेजे गए ईमेल के नोटिफिकेशन प्राप्त होना अप्रत्याशित है। 
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क्या है फ्री-बेसिक्स ?
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यदि चर्च आदिवासी इलाको में अपने केम्प लगाकर खाना और कम्बल वितरित करे तो क्या आप उसे ऐसा करने देंगे !! आप क्यों नहीं करने देंगे, जबकि साफ़ है कि पादरी गरीबो को फ्री में खाना खिला रहा है ? आप ऐसा नही करने देंगे,  क्योंकि आप जानते है कि यह फ्री नही है और पादरी धर्मांतरण के लिए मुफ्त में खाना और कम्बल परोस रहा है। सभी जानते है कि दुनिया में ‘फ्री’ कुछ नही होता। फ्री बेसिक्स भी फ्री नही है, बल्कि आगे जाकर बहुत महंगी पड़ने वाली है। 
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फेसबुक यह मिथ्या प्रचार कर रहा है कि फ्री-बेसिक्स भारत में नेट न्युट्रलिटी को बनाये रखने के लिए है, जबकि सच्चाई यह है कि फ्री-बेसिक्स नेट न्युट्रिलिटी को ख़त्म कर देगा। फ्री-बेसिक्स में बेसिक्स क्या है इसका फैसला फेसबुक करेगा, अत: जिस सामग्री या वेबसाइट को फेसबुक ‘बेसिक्स’ की श्रेणी में नहीं रखेगा, यूजर्स उन्हें देखने से वंचित हो जाएंगे। 
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फ्री-बेसिक्स के अन्तर्गत फेसबुक भारत के नागरिको को बेहद कम कीमत में या लगभग मुफ्त सेलफोन डिवाइस बांटने की स्कीम लांच कर सकेगा, या लगभग सभी को 2G, 3G का वायरलाइन कनेक्शन ‘फ्री’ दिया जाएगा। इस फोन से यूजर्स कॉल तो कर सकेंगे, किन्तु इस फोन या इस कनेक्शन पर ‘सिर्फ’ उन वेबसाइटों को ही देखा सकेगा जो फ्री-बेसिक्स से जुडी हुई हो, मतलब जिनका फेसबुक से एग्रीमेंट हो। यानी जो कम्पनिया फेसबुक, टेल्को या अन्य किसी टेलीकॉम कंपनी को पैसा दे रही है, उन्ही को उपभोक्ता इंटरनेट पर एक्सेस कर सकेंगे। इस तरह एक विदेशी कम्पनी यह तय करेगी कि क्या बेसिक है, और यह भी कि, इंटरनेट पर आप क्या देखेंगे।
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तो अगर फेसबुक जनता को फ्री इंटरनेट दे रहा है तो समस्या क्या है ?

समस्या यह है कि यदि फेसबुक फ्लिप कार्ट को फ्री बेसिक्स योजना से बाहर करता है किन्तु अमेजन को शामिल कर लेता है तो इस फ्री इंटरनेट पर उपभोक्ता सिर्फ अमेजन की वेबसाइट ही खोल सकेंगे। अत: ऑनलाइन बिजनेस पर अमेजन का एकाधिकार हो जाएगा और अन्य सभी कंपनियां घटते ग्राहकों की संख्या के कारण बंद हो जायेगी। एक बार एकाधिकार होने के बाद अमेजन ग्राहकों से मनमाने दाम वसूल सकेगी और ई-कॉमर्स में प्रतिस्पर्धा के कारण मिल रहे डिस्काउंट के दिन हवा हो जाएंगे। फेसबुक द्वारा दिए गए फ्री इंटरनेट के कारण यूजर्स किसी नई वेबसाइट को देखने के लिए अलग से रिचार्ज नही करवाएंगे।   इसीलिए फ्री-बेसिक्स को वे बड़ी बहुराष्ट्रीय कम्पनिया फाइनेंस कर रही है जो स्थानीय कम्पनियो को बाजार से बाहर करना चाहती है। हमेशा के लिए।
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इससे सब से ज्यादा विस्तार फेसबुक को मिलेगा, क्योंकि फेसबुक यूज़रबेस कंपनी है और भारत में उसका कोई प्रतिद्वंदी नहीं है। किन्तु फेसबुक को वित्तीय की जगह राजनैतिक फायदा अधिक होगा, जो कि भारी वित्तीय मुनाफा कमाने के मार्ग खोल देगा।
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जहां तक मौद्रिक लाभ कमाने की बात है, सबसे अधिक मुनाफा फ्लिपकार्ट और अमेजन कमाएगी। लेकिन जल्दी ही अमेरिकी कम्पनिया फ्लिपकार्ट को टेक ओवर कर लेगी अत: भारत के पूरे ई-रिटेल बाजार पर अमेरिकी कम्पनियो का एकाधिकार हो जाएगा।
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इस तिकड़म का नाम जुकेरबर्ग ने फ्री-बेसिक्स रख छोड़ा है, और वे दिन दहाड़े यह एलान चला रहे है कि फ्री-बेसिक्स नेट न्युट्रिलिटी को कायम रखेगा। बल्कि वे तो यह भी कह रहे है कि इससे भारत में नेट न्युट्रिलिटी आ जायेगी। और भारत में नेट न्युट्रिलिटी लागू करने की जुकेरबर्ग को इतनी चिंता है कि वे दिन रात भारत के नागरिको को समझा रहे है कि भारत में नेट न्युट्रिलिटी स्थापित करने के लिए ट्राई को ईमेल करो। यहां तक की उन्होंने ईमेल भेजने का सॉफ्टवेयर भी बना दिया है और सभी फेसबुक यूजर्स की वाल पर ट्राई को मेसेज भेजने की अपील भी भेज रहे है !!! इस लिहाज से तो, नेट न्युट्रिलिटी को बचाने के लिए इन्हे भारत रत्न मिल जाना चाहिए !
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कुछ मिथ्या प्रचार की चपेट में आकर और कुछ सोनिया-मोदी-केजरीवाल की अंधभक्ति के वशीभूत होकर यूजर्स ट्राई को ईमेल भी भेज रहे है कि फ्री-बेसिक्स को लागू किया जाए। ज्ञातव्य है कि सोनिया घांडी, मोदी साहेब और केजरीवाल जी फ्री-बेसिक्स का समर्थन कर रहे है, अत: इनके अंध भगत भी देश हित की उपेक्षा करते हुए सोशल मिडिया पर फ्री-बेसिक्स के समर्थन में अभियान चला रहे है।
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मुफ्त इंटरनेट बांटने के लिए विदेशी कंपनी को अनुमति देने के बाद शायद सोनिया-मोदी और केजरीवाल भारत को शिक्षित बनाने के लिए ‘एजुकेट इण्डिया’ नाम से एक नया अभियान प्रारम्भ करेंगे जिसमे मिशनरीज के पादरियों को बड़े पैमाने पर स्कूल खोलने और भारतीयों को मुफ्त शिक्षा देने के लिए आमंत्रित किया जाएगा !!
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समाधान ???
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हम बीएसएनएल चेयरमेन से मांग कर रहे है कि भारत के सभी 100 करोड़ नागरिको को बीएसएनएल की तरफ से एक मोबाईल फोन, महीने का एक जीबी डाटा, एक सिम, महीने का 50 रू बेलेंस और 100 एसएमएस “फ्री” दिया जाए।
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ये जायज मांग है क्योंकि —-
१) इंटरनेट अब हर व्यक्ति के लिए आवश्यकता बन चुका है, और डिजिटल इण्डिया तभी सफल होगा जब भारत के प्रत्येक नागरिक की पहुँच इंटरनेट तक होगी। ये पहुंच फेसबुक द्वारा नही बल्कि भारत सरकार द्वारा बनायी जानी चाहिए।
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२) 2000 रू प्रति मोबाइल की दर से 100 करोड़ मोबाइल के लिए सिर्फ 2 लाख करोड़ रूपये की आवश्यकता है, जबकि हाल ही में मोदी साहेब कॉर्पोरेट जगत का 2 लाख करोड़ का टैक्स माफ़ कर चुके है। उतने में तो सभी 100 करोड़ नागरिको को मोबाइल की सुविधा मिल जायेगी। 
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३) सभी नागरिको को एक सिम दी जायेगी जिसका नंबर उसकी मतदाता संख्या के आधार पर रजिस्टर्ड किया जाएगा।
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४) 100 एसएमएस होने से नागरिक अपने सांसदों को गैजेट में प्रकाशित करने के लिए आवश्यक कानूनो के आदेश अपने रजिस्टर्ड मोबाइल से एसएमएस द्वारा भेज सकेंगे।
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५) हर महीने 100 करोड़ जीबी डेटा की जरुरत होगी, जो कोई समस्या की बात नहीं है। हमारे ही टैक्स से इसरो ने उपग्रह बनाकर ऊपर भेज के रखे है। अत: इस डेटा पर प्रथम अधिकार भारत के नागरिको का है। ये डेटा ए राजा और सोनिया घांडी ने घूस खाकर औने पौने दामो में बेच दिया, और हम अब टेलीकॉम कम्पनियो को इस डेटा के लिए ऊँचे दाम चुका रहे है।  
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ये मांग भारत के करोडो नागरिको के हित में है, पर क्योंकि इससे टेलीकॉम कंपनियों को घाटा होगा, इसलिए बीएसएनएल चेयरमेन इस मांग को मान नही रहा, और मोदी साहेब भी इस मांग का विरोध कर रहे है। भारत के नागरिको के पास यदि बीएसएनएल चेयरमेन को नौकरी से निकालने का अधिकार हो तो इस मांग को लागू कराया जा सकता है।
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भारत में नेट न्युट्रिलिटी को बचाये रखने के लिए आप क्या कर सकते है ?
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(1) ट्राई को वो ईमेल न भेजे जिसे भेजने की अपील फेसबुक बार बार कर रहा है।
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(2) नेट न्युट्रिलिटी को बनाये रखने के लिए अपने सांसद को यह एसएमएस भेजे—https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/820005808117657
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(3) अपने सांसद को एसएमएस द्वारा आदेश भेजे की टीसीपी* क़ानून को गैजेट में प्रकाशित किया जाए।
टीसीपी के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/809753852476186
टीसीपी क़ानून के गैजेट में प्रकाशित होने से नागरिको की सहमति से राईट टू रिकॉल बीएसएनएल अध्यक्ष के क़ानून को गैजेट में प्रकाशित किया जा सकेगा। यदि बीएसएनएल अध्यक्ष को नौकरी से निकालने का अधिकार नागरिको को मिल जाता है, तो बीएसएनएल अध्यक्ष देश के सभी नागरिको को एक मोबाइल फोन और हर महीने 1 जीबी डाटा उपलब्ध करवाएगा, वरना हम नागरिक राईट टू रिकॉल क़ानून का प्रयोग करके उसे नौकरी से निकाल देंगे।
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*टीसीपी क़ानून के लिए अपना समर्थन आप http://www.bhilwarasms.in/ पर एसएमएस भेज कर दर्ज करवा सकते है।  
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**नागरिको से आग्रह है कि, सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंध भक्तो के भुलावे में आकर ट्राई को ईमेल न भेजे, बल्कि अपने सांसद को ऊपर दिए गए आदेश भेजे, ताकि देश में नेट न्युट्रिलिटी कायम रह सके।
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