FDI से भारत को लाभ या हानि ?

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    FDI NEWS 21JUNE 2016
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    दोस्तों

    आज का ज्वलंत मुद्दा फिर से बन गया है FDI

    आखिर होता क्या है ये FDI ?

    इससे भारत को क्या लाभ है और क्या हानि है ?

    भारत में FDI का क्या रहा है इतिहास ?

    आइये जानते हैं और समझते हैं ..

    FDI माने FOREIGN DIRECT INVESTMENT (विदेशी सीधा निवेश)

    यानी कोई भी विदेशी भारत में सीधे निवेश करना चाहे तो कर सकता है FDI की सरकारी पालिसी के अनुसार..

    मुख्य तौर पर यह निवेश है … समान्य भाषा में ..

    जैसे आप और हम अपनी बचत को अन्य जगह निवेश करते हैं

    किसलिए ?

    अरे भाई ताकि जो निवेश किया है उससे निवेश के साथ साथ कुछ अतिरिक्त धन और मिल जाए … यही है न ?

    तो जब आप निवेश करते हैं तो सामने वाले से आप बदले में ब्याज जैसी फायदे की उम्मीद करते हैं.. करते हो न ?

    तो जब कोई विदेशी आपके यहाँ निवेश करेगा 100 रूपये तो वो आपसे क्या उम्मीद करेगा ?

    की आप उसको 100 के बदले 110 रूपये लौटा दोगे 1 वर्ष बाद (10% की ब्याज दर से ) (सरलता से समझाने के लिए )

    यानी भारत में जो भी निवेश आएगा उससे ज्यादा वापिस जाएगा ही जायेगा.. सही है न ?

     

    इसी तरह से लोन होता है यानि कर्ज जो बैंक हमें देता है ..

    तो हमने विदेशियों से एक तरह से कर्ज लिया जिसका उपयोग हम अपने देश में करेंगे और उससे कमी करके विदेशी को उसके निवेश के मूल के साथ कुछ फायदा भी लौटा देंगे.. यही है न ?

     

    तो भारत को विदेशी निवेश की जरूरत क्यूँ पड़ी ? यही सवाल आ रहा होगा मन में ?

    क्यूंकि कोई भी कर्ज तो तभी लेता है जब पैसे कम पड रहे हों ? है न …

     

    यानी भारत में पैसे की कमी है इसलिए हमारे नेता विदेशियों से कर्ज / निवेश की मांग करते हैं..

    तो इस बात को जांच लेते हैं की ऐसा है क्या ?

     

    हमने भारत सरकार को RTI डाली 2 मुद्दों पर.

    1 भारत में कितना FDI आजतक आया है ?

     

    जवाब आया की भारत में आज तक कुल मिलकर 326509 मिलियन US डॉलर आया है.. निचे चित्र में आप ये देख सकते हैं.. इसाई वर्ष 2000 से 2014 अप्रैल तक..

    FDI INFLOW DATA from RTI
    FDI INFLOW DATA from RTI

     

    इसी डाटा को रूपये में भी सरकार ने बताया की 10 लाख 54721 करोड़ रूपये आये ..

    डॉलर का रेट इस दौरान काफी ऊपर निचे हुआ.. तो हर साल का एवरेज रेट भी लेंगे तो जाकर कुछ मोटी मोटी तस्वीर हाथ आएगी.

    हम सबसे बुरी ASSUMPTION देखते हैं की मान लो 2000 से हि डॉलर का रेट 62 रूपये है..
    तो भारत में टोटल रूपये कितने आये ?

    326509 मिलियन US डॉलर को रूपये में बदलते हैं..
    326509*1000000*62  = 2024356 करोड़ भारतीय रूपये..

    यानि 20  लाख करोड़ रूपये… वो भी 14 सालों में…

    क्या भारत के पास 10 /20 लाख करोड़ रूपये नहीं हैं या नहीं थे ???

     

    अब देखते हैं दूसरा RTI का सवाल

    २ भारत में सालाना कितना DOMESTIC SAVINGS है ? यानि घरेलु बचत…

     

    जवाब आया (निचे चित्र में देख सकते हैं)

    Domestic Savings Bharat Page-5
    Domestic Savings Bharat Page-5

    इसाई वर्ष 2012-2013 (1 साल में) 30 लाख 43 हज़ार करोड़ भारतीय रूपये.
    1990-91 में 1 लाख 34 हज़ार करोड़ भारतीय रूपये.
    इसी तरह जब हमने हर साल का टोटल जमा किया तो पाया 232 लाख करोड़ रूपये भारत की घरेलु बचत है 1990 से 2014 तक..
    जिसमे से अगर 2000-2014 की हि बात करें तो 200 लाख करोड़ तो इस दौरान भारत के पास बचत के रूप में था..

    यानि FDI से 10 गुना ज्यादा पैसा तो भारत के पास पड़ा है..

    अब सवाल ये की भारत के पास पैसा है लेकिन फिर भी भारत विदेशियों से पैसे मांग रहा .. आखिर क्यूँ ?

    तो सरकारें क्यूँ विदेशी पूंजी की तरफ भागती हैं ??
    क्यूँ वो भारत के पैसे का सदुपयोग नही करती ??
    क्यूँ वो भारत के लिए रोज नए कर्जे खड़े करते हैं ??
    क्यूँ ये सरकारें रुपया का अवमूल्यन हि करती रहती हैं ??

    क्या ऐसा करने में इन्हें कोई फायदा है ?? क्या ये विदेशी कंपनियों के एजेंट हैं जो भारत में उनका पैसा लगवाकर लाखों करोड़ों की भारत की लूट करवाते हैं ??

    Also Read:  मैकोले का पत्र

    क्या आपको ये लोग देशभक्त या भारत के हित के लिए कार्य करते लगते हैं ???

    क्यूँ नहीं पूछते हम इन चोर लुटेरों से की क्या भारत को FDI यानि विदेशी पूंजी की सच में जरुरत है ????

     

    सरकार किसी की आये चाहे केंद्र में चाहे राज्य में, सभी सरकारों के मुखिया विदेशी कर्ज और विदेशी निवेश के पीछे ही भागते हैं.

    21 जून के समाचार
    नई FDI नीति से वॉलमार्ट, अमेजन की होगी बल्ले-बल्ले
    bharatiya-kisan-sangh-expresses-displeasure-over-modi-governments-fdi-decision
    modi-government-approves-foreign-investment-fdi-up-to-100-in-defence-and-airliance-sectors

    हम यहाँ याद दिला दें की 2014 के लोक सभा चुनाव में भारत के युवा ने पहला चुनाव स्वयम खेला था और मोदी जी के कहने पर 5 साल की सत्ता उन्हें सौंपी थी.. 2 वर्ष बीते हैं और काफी कार्य हुए भी हैं लेकिन हमारे मुख्य मुद्दे यूँ के यूँ ही पड़े हैं.. अगर इन मुख्य मुद्दों पर 2019 के लोक सभा चुनाव से पहले कोई कार्य नहीं हुआ तो फिर यह देश और इसका युवा इस देश के नेताओं को, पार्टियों को, इसकी अंग्रेजी कानून व्यवस्था को, इसके हर उस व्यवस्था को जो गुलामी का एहसास दिलाती है, उन सभी को देश का युवा अपने ठोकर पर उठा लेगा.

    हमारी मुख्य मांगे 2014 के चुनाव से पहले की :-

    1. Arthkranti टैक्स व्यवस्था लागु हो
    2. अंग्रेजी कानून व्यवस्था, न्याय व्यवस्था यह सब समाप्त हो.
    3. जम्मू से 370 समाप्त हो और वो भारत का अभिन्न अंग बने
    4. गाय आधारित कृषि की जाए.
    5. गौ वध अपराध हो
    6. मांस बंद हो
    7. शराब बंद हो
    8. वैश्यावृति बंद हो
    9. शिक्षा व्यवस्था भारतीय सनातन पद्दति पर आधारित हो
    10. भारत का रुपया डॉलर के बराबर हो, पौंड के बराबर हो. (कम से कम बराबर हो)
    11. भारत बाहर से तेल खरीदना बंद करे और सौर उर्जा, बायो गैस आधारित व्यवस्था लागु की जाये.
    12. भारत का विदेशी कर्ज भारत की लूट के बदले में समाप्त हो.
    13. पुरे देश में चुनाव एक साथ हो.
    14. हर राज्य की एक राजकीय भाषा हो, और सभी राज्यों को जोड़ने के लिए भारत की सबसे ज्यादा बोली, समझे जाने वाली भाषा जो को हिंदी है वो राष्ट्र भाषा बने.
    15. अंग्रेजी या विदेशी भाषा सब्जेक्ट हो, माध्यम नहीं शिक्षा का
    16. भगवन राम का मन्दिर बने
    17. भारत का इतिहास दुबारा लिखा जाये (सिर्फ और सिर्फ वास्तविक इतिहास)
    18. जिनके लिए देश से ऊपर कुछ भी हो उन्हें देश से बाहर निकल दें और राष्ट्रद्रोह में फांसी का प्रावधान हो.
    19. बलात्कार या स्त्री के साथ किसी भी अत्याचार के लिए कड़ी से कड़ी सजा दी जाये और वो भी 30 दिन के अंदर
    20. देश में धर्मांतरण तुरंत बंद हो
    21. आरक्षण बंद हो सिर्फ आर्थिक आधार पर शिक्षा में दिया जाये बस या फिर सबको मुफ्त शिक्षा सर्कार की जिम्मेदारी हो अनिवार्य रूप से
    22. जमीन सरकार के नाम में हो और सरकार उस पूरी जमीन को उपयोग में लाने के लिए जनता से आवेदन लेकर सभी को अलग अलग कार्य के लिए जमीन दे.
    23. मांगे और भी हैं लेकिन इनमे से भी जो भी मुख्य मांगे हैं वो पूर्ण होनी ही चाहिए वर्ना भारत में जो अगली क्रांती होगी वो युवाओं के खून के बलिदान से होगी..

    अब और नहीं जियेंगे हम गुलामों की जिन्दगी..

    या तो आज़ादी (अंग्रेजी व्यवस्था और उनके कठपुतली नेताओ से) लेंगे या फिर देश के गद्दारों को आज़ादी देंगे..

     

    पत्र सूचना कार्यालय
    भारत सरकार
    प्रधानमंत्री कार्यालय

    20-जून-2016 11:53 IST

    प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति व्यवस्था में व्यापक बदलाव की घोषणा

    प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति व्यवस्था में बदलाव से रोजगार सृजन और बुनियादी सुविधाओं को प्रोत्साहन मिलेगा

    अधिकांश क्षेत्रों में प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश के लिए स्वत:स्वीकृति को अनुमति

    केंद्र सरकार ने देश में प्रमुख रूप से रोजगार और रोजगार सृजन को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश( एफडीआई) व्यवस्था को मौलिक रूप से उदार बना दिया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया। नवंबर 2015 में घोषित किए गए प्रमुख बदलावों के बाद यह दूसरा बड़ा सुधार है। एक छोटी सी प्रतिबंधित सूची के अतिरिक्त अब ज्यादातर क्षेत्र स्वतः स्वीकृति मार्ग के तहत आंएगे। इन परिर्वतनों के साथ ही प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में भारत विश्व की सबसे बड़ी उदार अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

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    पिछले दो वर्षों में सरकार द्वारा कई प्रमुख क्षेत्रों रक्षा, निर्माण विकास, बीमा, पेंशन क्षेत्र, ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर, चाय, कॉफी, रबर, इलायची, ताड़ के और जैतून के पेड़ो के वृक्षारोपण, एकल ब्रांड खुदरा व्यापार, निर्माण क्षेत्र, सीमित देयता भागीदारी, नागरिक उड्डयन, ऋण सूचना कंपनियों, उपग्रह स्थापना/ संचालन और सम्पत्ति पुनर्रचना कंपनियां आदि में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में बदलाव किए गए हैं। सरकार द्वारा किए गए उपायों से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में वर्ष 2015-16 में 55.46 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई जो वित्त वर्ष 2013-14 में 36.04 बिलियन अमेरिकी डॉलर थी। किसी एक वित्तीय वर्ष में यह अब तक का सर्वाधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश है। हालांकि  यह महसूस किया जा रहा था कि देश में अधिक विदेशी निवेश को आकर्षित करने की क्षमता है और इसे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश व्यवस्था को उदार और सरल बनाकर प्राप्त किया जा सकता है। आज कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा भारत को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हेतु प्रथम गंतव्य स्वीकार किया गया है।

     

    इसके अनुरूप केंद्र सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में कई संशोधन करने का निर्णय लिया है। नई नीति में कई क्षेत्रों में निवेश की सीमा में वृद्धि, ज्यादा से ज्यादा गतिविधियों को स्वचालित मार्ग के अंतर्गत लाने और विदेशी निवेश के लिए शर्ते आसान बनाने की शुरूआत की गई है। यह सुधार देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियमों को आसान बनाने और भारत को विदेशी निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाने का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

    इन परिवर्तनों का विवरण निम्नानुसार है-

     

    1.भारत में उत्पादित खाद्य सामग्री को प्रोत्साहन देने के लिए व्यापक बदलाव

     

    खाद्य निर्मित या भारत में उत्पादित उत्पादों के संबंध में व्यापार के क्षेत्र में सरकारी अनुमोदन के तहत ई-कॉमर्स सहित  100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को अनुमति देने का निर्णय लिया गया है

     

    1. 2. रक्षा क्षेत्र में 100 प्रतिशत तक विदेशी निवेश

    वर्तमान में एफडीआई व्यवस्था के अंतर्गत स्वचालित मार्ग से एक कंपनी को इक्विटी में 49 प्रतिशत भागीदारी की अनुमति है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 49 प्रतिशत से अधिक की भागीदारी की अनुमति सरकारी अनुमोदन के माध्यम से प्राप्त होगी और यह निर्णय प्रति मामले के अनुसार होगा। इसके साथ ही अत्याधुनिक प्रौद्यगिकी तक पहुंच की शर्त को हटा दिया गया है। इस संबंध में रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में  अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित  बदलाव किए गए हैं:

     

    1. सरकारी स्वचालित मार्ग से 49 प्रतिशत से अधिक विदेशी निवेश को खासकर उन मामलों में जहां देश की आधुनिक तकनीक तक पहुंच हो और अन्य कारणों पर भी अनुमति प्रदान की गई है। अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी तक पहुंच होने की शर्त को समाप्त कर दिया गया है।

     

    1. शस्त्र अधिनियम, 1959 के अनुसार रक्षा क्षेत्र के लिए तय की गई प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सीमा को छोटे हथियार और गोलाबारूद के निर्माण के लिए लागू किया गया है।

     

    3.प्रसारण कैरिज सेवाओं में प्रवेश मार्गों की समीक्षा

     

    प्रसारण कैरिज सेवाओं में विदेश नीति में भी संसोधन किया गया है नए क्षेत्रीय केन्द्र और प्रवेश द्वार इस प्रकार हैं।

     

    तालिका

     

    क्षेत्र/गतिविधि नयी सीमा और मार्ग
    5.2.7.1.1

    (1) टेलीपोर्ट्स जोड़ने वाले केन्द्रों(हब) की स्थापना /टेलीपोटर्स

    (2) डायरेक्ट टू होम सेवा (डीटीएच)

    (3) राष्ट्रीय या राज्य या जिला स्तर पर सक्रिय केबल नेटवर्क (मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों (एमएसओ) और नेटवर्क के आधुनिकीकरण की दिशा में डिजिटलीकरण और संबोधनीयता।

    (4) मोबाइल टीवी

    (5) स्काई ब्रॉडकास्टिंग सर्विस (एचआईटीएस)

     

    100%

     

    स्वत: अनुमति

    5.2.7.1.2 केबल नेटवर्क (अन्य एमएसओ और लोकल केबल संचालक (एलसीओ) आधुनिकीकरण के लिए नेटवर्क के  डिजिटलीकरण और संबोधनीयता को नहीं अपना रहे हैं
    एक कंपनी द्वारा क्षेत्रीय मंत्रालय से बिना लाईसेंस और अनुमति के 49 प्रतिशत विदेशी निवेश का प्रयोग, स्वामित्व ढ़ाचें में बदलाव या मौजूदा नए विदेशी निवेशक की हिस्सेदारी का हस्तांतरण निवेशक द्वारा में परिवर्तन के परिणामस्वरूप, एफआईपीबी की मंजूरी की आवश्यकता पडे़गी।

     

     

    4.औषधि

    औषधि क्षेत्र में मौजूदा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति के तहत ब्राउनफील्ड फार्मा में सरकारी अनुमति के अंतर्गत स्वचालित मार्ग से  100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और ग्रीनफील्ड फार्मा में स्वचालित मार्ग के तहत 100 प्रतिशत एफडीआई का प्रावधान है। इस क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ब्राउनफील्ड फार्मास्यूटिकल्स में स्वचालित मार्ग के तहत 74 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति और सरकारी अनुमोदन के तहत 74 प्रतिशत से अधिक के लिए एफडीआई जारी रहेगा।

     

     

    5.नागरिक उड्डयन क्षेत्र

    1. मौजूदा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति के तहत हवाई अड्डों की अनुमति पर स्वचालित मार्ग से ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में 100 प्रतिशत तथा ब्राउनफील्ड परियोजनाओं में स्वचालित मार्ग से 74 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है। ब्राउनफील्ड परियोजनाओं में  74 प्रतिशत से अधिक एफडीआई सरकारी अनुमोदन के माध्यम से दी जाएगी।

     

    ii.मौजूदा हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण और एक उच्च मानक स्थापित करने की दृष्टी से और मौजूदा हवाई अड्डों पर दबाव कम करने करने के लिए ब्राउनफील्ड हवाई परियोजनाओं में स्वचालित मार्ग से 100 प्रतिशत  एफडीआई को अनुमति देने का फैसला किया गया है।

     

    iii.वर्तमान एफडीआई नीति के अनुसार, अनुसूचित वायु परिवहन सेवा /घरेलू अनुसूचित यात्री  वायुसेवा और क्षेत्रीय वायु परिवहन सेवा में स्वचालित मार्ग से 49 प्रतिशत तक विदेशी निवेश को अनुमति प्राप्त है। अब इसे बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है। जिसमें 49 प्रतिशत एफडीआई स्वचालित मार्ग से और 49 प्रतिशत से अधिक एफडीआई सरकार अनुमति के माध्यम से दी जाएगी। अनिवासी भारतीयों के लिए 100 प्रतिशत एफडीआई स्वचालित मार्ग से देने की अनुमति जारी रहेगी। हालांकि  विदेशी एयरलाइन को मौजूदा नीति में निर्धारित शर्तों के आधार पर 49 प्रतिशत पूंजी का निवेश भारतीय कंपनियों अनुसूचित और ऑपरेटिंग गैर अनुसूचित हवाई परिवहन सेवाओं में करने की अनुमति जारी रहेगी।

     

    6.निजी सुरक्षा एजेंसियां

    सरकार अनुमोदन से मौजूदा नीति के तहत निजी सुरक्षा एजेंसियों में 49 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 49 प्रतिशत तक स्वचालित मार्ग से अनुमति प्राप्त है। सरकार की मंजूरी के आधार पर इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 49 प्रतिशत से अधिक और 74 प्रतिशत तक की अनुमति दी जाएगी।

     

    7.शाखा कार्यालय, संपर्क कार्यालय या परियोजना कार्यालय की स्थापना

     

    देश में शाखा कार्यालय, संपर्क कार्यालय या परियोजना कार्यालय या भारत में किसी भी अन्य जगह में व्यापार की स्थापना के लिए आवेदक के रक्षा, दूरसंचार, निजी सुरक्षा या सूचना एवं प्रसारण जैसे मुख्य व्यवसाय से जुडे होने पर रिजर्व बैंक या पृथक सुरक्षा अनुमति के अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी जहां आवेदक एफआईपीबी की अनुमति और संबंधित मंत्रालय द्वारा मंजूरी या लाइसेंस पहले ही प्रदान की जा चुकी है।

     

    8.पशुपालन

    प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति 2016 के अनुसार, पशुपालन (कुत्तों के प्रजनन सहित), मछली पालन, जलीय कृषि और मधुमक्खी पालन में एफडीआई नियंत्रित परिस्थितियों में स्वचालित मार्ग से 100 प्रतिशत की अनुमति दी जाती है। इन गतिविधियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए नियंत्रित परिस्थितियों की इस आवश्यकता को हटाने का फैसला किया गया है।

     

     

    9.एकल ब्रांड खुदरा व्यापार

    स्थानीय सोर्सिंग मानदंडों पर तीन साल के लिए छूट देने और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी उत्पादों का कार्य करने वाली एकल ब्रांड खुदरा व्यापार संस्थाओं को ओर पांच साल के लिए ढीली सोर्सिंग व्यवस्था प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।

     

    प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में आज किए गए संशोधनो से एफडीआई नीति को उदार और सरल बनाया जा सकेगा। जिससे देश में व्यापार करना आसान होगा और बडी मात्रा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश होगा।इसके परिणामस्वरूप देश में आय, रोजगार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

                                                   ***

     

    आरबी/एजे-3055

     

    इस RTI से सम्बंधित कोई भी सवाल आप मुझसे पुछ  सकते हैं..

    वन्दे मातरम
    नवनीत सिंघल

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