भारतीय कृषि व्यवस्था

भारतीय कृषि व्यवस्था
भारतीय कृषि व्यवस्था

कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की केन्द्रबिन्दु व भारतीय जीवन की धुरी है।

आर्थिक जीवन का आधार, रोजगार का प्रमुख स्रोत तथा विदेशी मुद्रा अर्जन का माध्यम होने के कारण कृषि को देश की आधारशिला कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। देश की कुल श्रमशक्ति का लगभग 52 प्रतिशत भाग कृषि एवं कृषि से सम्बन्धित क्षेत्रों से ही अपना जीविकोपार्जन कर रही हैं। अतः यह कहना समीचीन होगा कि कृषि के विकास, समृद्धि व उत्पादकता पर ही देश का विकास व सम्पन्नता निर्भर है। केवल परम्परागत फसलों को उगाकर ही किसान समृद्ध नहीं हो सकते, बदलती माँग व कीमतों के अनुरूप फसल प्रतिरूप में परिवर्तन भी आवश्यक है। प्राकृतिक विधि व जैविक खाद के उपयोग से उगाए गए खाद्य पदार्थों की माँग अमेरिका, यूरोप व जापान में तेजी से बढ़ रही है। इस बढ़ती माँग के अनुरूप उत्पादन करके किसानों को लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। शुष्क खेती, जल-संरक्षण, कुशल व दक्ष सिंचाई व्यवस्था, जैविक खेती व कृषि शोध पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। किसानों को छिड़काव सिंचाई विधि का प्रयोग बढ़ाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

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