80 करोड़ हिन्दूओं को हिजड़ा बना दिया मन्दिर के पंडितों ने

80 करोड़ हिन्दूओं को हिजड़ा बना दिया मन्दिर के पंडितों ने

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जम्मू: आपशंभु मन्दिर में मुस्लिम युवक ने की तोडफ़ोड़, पुलिस ने किया लाठीचार्ज...इंटरनैट बंद

पीटो ताली, भगवान प्रकट हुए हैं.

पीटो ताली, कितना सुंदर प्रकरण है भगवान के लीला का

पीटो ताली, क्या भजन बनाया है …

पिटते रहो तालियाँ..

क्यूंकि आपको हिजड़ा बनाने का काम एक उदेश्य के अनुसार बिलकुल सही दिशा में हो रहा है..

मन्दिर किसलिए ? भजन पूजा पाठ आरती कथा शांति मोक्ष बस या कुछ और बाकी है ?

भगवान राम किस मन्दिर में गए ?

भगवान कृष्ण किस मन्दिर में गए ?

उन जैसे तो बन नहीं सकते, उनकी पूजा पाठ करके क्या हासिल कर रहे हो ?

मन्दिर किसलिए बने थे ?

ताकि समाज के लोग वहां आकर मुख्य पंडित (आचार्य) से शिक्षा ग्रहण करें, विचार ग्रहण करे, चिन्तन करें अपने क्षेत्र की बुराई को समाप्त करने का, अपने समाज की बुराई को समाप्त करने का, अपने राष्ट्र के लिए, अपने अस्तित्व के लिए, सम्पूर्ण जीवों के लिए (सिर्फ मानव जाती के लिए नहीं, सिर्फ मेरा मेरे परिवार मेरे बच्चों के लिए नहीं) और अंत कार्य सबको शांति प्रदान करना अच्छे अच्छे कार्य जिन्होंने किये उनकी कथा सबको बताकर सुनाकर..

हममे से कितने ही लोग 1 वर्ष में कम से कम 50 बार हनुमान चालीसा पढ़ते होंगे, लेकिन उनमे से कितनो को उसका पूर्ण अर्थ मालूम है ? बताओ ? कितने लोग जानते हैं की इसी हनुमान चालीसा में पृथ्वी से सूर्य की दुरी बतलाई गयी है ?

मन्दिर के पंडित जी भी यह बात नहीं जानते होंगे यह बात मैं दावे से कह सकता हूँ.

मुझे किसी पंडित से कोई तकलीफ नहीं है लेकिन आज मुझे यह एहसास हुआ की आखिर हिन्दू जो आज कर रहा है उसका कारण क्या है ? मन्दिर से हमारे युवा क्यूँ नहीं जुड़ रहे ?

ऐसा क्या फर्क है की दुसरे धर्म का युवा अपने धर्म के बारे में और उससे भी ज्यादा अपने समाज के बारे में जागरूक है सिवाय हमारे हिन्दू के. ऐसा क्यूँ ? आखिर क्या फर्क है हममे और उनमे ?

बड़ा ही सरल है

उनके यहाँ हर सप्ताह में कम से कम 1 दिन सभी अपने धर्मस्थलों पर इक्कठा होते ही हैं, जहाँ उनको न सिर्फ पूजा पाठ करवाते हैं बल्कि सबसे जरूरी उनके बीच आज के ताजे समाचारों की पूर्ण जानकारी साझा की जाती है. उन्हें यह तक पता होता है की मलेशिया में उनके धर्म के लोगों के साथ क्या हुआ .. चाहे वह सच बताये या झूठ वह यहाँ पर बात का मुद्दा नहीं है.

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मूल बात यह है की जब उनको अपने राष्ट्र का अपने धर्म से जुड़े भाइयों का पता होता है तो वो सब जागरूक रहते हैं और सतर्क होते हैं. इसी जागरूकता के कारण वो आपस में जुड़े रहते हैं और जब चाहे जहाँ चाहे एक योजना के तहत कार्य को अंजाम देते हैं.

हमारे यहाँ तो सिर्फ और सिर्फ रटी रटाई भजन कथा का रट्टा दिन रात लगते रहते हैं. नतीजा सब मन्दिर जाते तो हैं लेकिन बस जाने के लिए.

अरे मन्दिरों का मुख्य कार्य यह है क्या ? यह होना चाहिए क्या ?

यह सब भी हो, तो भी कोई दिक्कत नहीं लेकिन मुख्य कार्य यह नही था न ही यह हो सकता है.

 

अब एक दिन सप्ताह में कम से कम सभी लोग जैसे मंगलवार को मन्दिर जाएँ निश्चित समय पर, घर परिवार से कम से कम 1 व्यक्ति जरुर जाए

वहां का मुख्य पंडित उन्हें अवगत कराए बिलकुल नए और ताजा समाचारों पर जो हम सबसे जुड़े हैं जैसे आज 15 जून का उदाहरण ही लो तो आज की मुख्य घटना यह बनती की जम्मू के मन्दिर में 1 मुस्लमान घुसा, और उसने 2 हिन्दुओं के सामने तोड़फोड़ की, और हिन्दू डरपोक रोकना तो दूर उनसे दर कर भाग गए. यह बात इन 80 करोड़ लोगों में से कितनो को पता होगी ? 8 लाख को भी नहीं पता होगी. 8 करोड़ तो छोड़ो. पता होगी तो हिन्दू सतर्क होगा की मुसलमान ऐसा भी करता है. आपके मन्दिर में ऐसा हो तो क्या हो, कौन क्या करेगा, किसकी क्या तयारी है ?

असम में क्या हुआ

कैराना में क्या हो रहा है ?

आप जरा सोचिये की आप कैराना में हो और मुस्लिम बहुल इलाका है और आप अपने घर बाहर छोड़ने को मजबूर हो तो क्या करोगे आप ? किस्से मदद मांगोगे ? किस्से उम्मीद करोगे ?

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सरकार से ?

धर्म गुरुयों से ?

पुलिस से ?

अगर आज आपने  उनकी मदद नहीं की तो कल को वो आपकी मदद क्यूँ करेंगे .

हम सबको क्या चीज जोडती है. हमारा धर्म . जो कहता है सब सुखी हो सब खुश रहे. लेकिन कहने से हो तो नहीं जायेगा, हम सबको ऐसा करना पड़ेगा और जो किसी दीन (गरीब बेसहरा) को दुखी करेगा उसको हमें सही करना होगा, क्या यह हमारा धर्म नहीं सिखाता हमें.

हम भगवान राम के वंशज हैं

हम भगवान कृष्ण के वंशज हैं

हम उन्हें इसलिए पूजते हैं क्यूंकि वो हमारे आदर्श हैं

सिर्फ इसलिए नहीं की उन्होंने अच्छे कार्य किये और हम ऐसा नहीं कर सकते.

हमें उन जैसा बनना है, जो भी हमसे सम्भव हो हम उस कार्य को करें और अपने आदर्श के नजदीक पहुंचे.

लेकिन नहीं हम तो बस भजन गाओ बिना अर्थ जाने, कथा करो रोते हुए, इमोशन से खेलो, दान ले लो, और पैसे डकार जाओ.

देश में कौनसा मन्दिर ऐसा है जिसका पंडित मोटा थुलथुला न हो रहा हो, जो कांग्रेस पार्टी से न जुड़ा हुआ हो. जिसको ज्ञान भी हो अपने धर्म का. जो देश सेवा के कार्य में लगा हुआ हो ?

गिनती के नाम ही याद आते हैं

साध्वी प्राची जी

योगी आदित्य नाथ जी

बाबा रामदेव जी

श्री श्री रविशंकर जी

 

ध्यान रहे साधू संत का यह कार्य नहीं की लोगों को उलझा कर अपनी जीविका में व्यस्त रहे. ऐसे पंडित धर्म के लिए अभिशाप हैं. साधू संत या सही मायने में ब्राह्मण वो है वो स्वयम भी सजग है और अपने क्षेत्र के निवासियों को भी सदा सजग रखे, उन्हें जोड़कर रखें, उन्हें एक सूत्र में बांधकर रखे.

 

पंडित कौन होना चाहिए जिसको ज्ञान हो,जो क्षत्रिय भी हो (यानि शारीरिक और वैचारिक रूप से बलशाली)

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आज के पंडित कैसे हैं (विचारिक रूप से अयाश, शराबी, नशेडी, और शारीरिक रूप से मोटे थुलथुले डरपोक)

जब ऐसे लोग हमारे मुख्य होंगे, ऐसे लोग पूजनीय होंगे तो वो हमें क्या शिक्षा क्या ज्ञान देंगे.

वो स्वयम की रक्षा नहीं कर सकते, हमारी क्या ख़ाक करेंगे ?

परशुराम जी
परशुराम जी

परशुराम जी जैसे पंडित चाहिए..

हर मन्दिर में अखाड़े हों,

वहां आत्म रक्षा के लिए प्रशिक्षण हो.

वहां देश से जुडी विचार करने योग्य बातें सबको बताकर लोगों को जागरूक किया जाये (उदहारण के लिए राजीव दीक्षित जी द्वारा बताई गयी बातें)

वहां पर गरीबों को भोजन दिया जाये, बेसहारा को सहारा दिया जाये, जाती के गंदे सोच से उठकर धर्म और एकता के लिए कार्य किये जायें तब हम देखेंगे की कौन विधर्मी की हिम्मत भी होती है हमारे मन्दिर में घुसने की  और कौन मुर्ख डरपोक भागता है इन से डरकर.

कमजोर हम थे नहीं, हमको कमजोर डरपोक बनाया किसने ? इस लुटेरी व्यवस्था ने जिसमे पंडित लूट रहें हैं और लोग लुट रहें हैं, धर्म की सिर्फ और सिर्फ प्रतिदिन हानि हो रही है.

आज से ही अपने मन्दिर की कमान संभालो. बहुत हुई रटी रटाई मुर्खता.

अब भजन कथा तो होगी लेकिन पहले विचार मंथन होगा, ज्ञान का केंद्र बनेंगे मन्दिर, रक्षा का केंद्र बनेंगे मन्दिर, हमारे आदर्श भगवानो की प्रेरणास्थल बनेंगे मन्दिर.

मैं भी शुरू करता हूँ अपने मंदिर से. आप भी कीजिये.. समझिए सबको और जागरूक कीजिये और शुरू हो जाइये. क्यूंकि आज नहीं तो कल कैराना और जम्मू आपके क्षेत्र में भी होगा. समय रहते सचेत हो जाओ वरना सेकुलरिज्म में अपनी बेटी बहु बहन की इज्जत लुटते हुए स्वयम देखोगे, आज नहीं तो कल यह होगा अगर आज से आप जगे नहीं तो.

हम किसी पर हमला नहीं करते न करने को कहते.

हम तो आपको आपकी आत्म रक्षा की तयारी को कहते हैं ताकि आप सुखी रहे स्वस्थ रहें.

जय भारत जय हिन्द.

जय सत्य सनातन धर्म की.

9 COMMENTS

  1. Navnitji आपने बात तो सही कही है पंडितोने क्या करना चाहीये इससे तो मै सहमत हु ।परंतु वर्तमान स्थितीमे जो घटणाये घटीत हो रहे है इसके लीये स्थानिय लोगही जीम्मेदार है क्योंकी उन्होने अपने बच्चोंको वो संस्कार नही दीये जो सनातन संस्कृतीमे है ये संस्कार ही मुल तत्व है।मै देखरहा हु संस्कार के अभाव मे और पाश्चात्य संस्कृतिका अंधानुकरण करनेसे बंदर पैदा होरहे है ।हींदुवोंकी ऐसी संस्कारहीन पीढी आगकी तरह बढरही है।जो अपनेही नाशके लीये जीममेदार होगी।और ये सब आजके सिरियल्स फिल्मस् और सोशलनेटवर्कींग साइटस् से होरहा है। पाठशालामे श्रीमद्भगवद्गीता का अध्ययन अनिवार्य करणा चाहीये और बच्चे उसका अनुकरन करे इसपर ध्यान देना चाहीये।तभी भवीष्य मे उसके परीणाम मीलेंगे।

    • जी सर्जेराव जी.. आपकी बात बिलकुल भी अनुचित नहीं है..
      संस्कार व्यक्ति को कहाँ से मिलेंगे, परिवार से और परिवार को कहाँ से ?
      उसके धर्म से, धर्म गुरु से, उस मन्दिर से जहाँ वो रोज जाता है.. चाहे आस्था से चाहे डरकर चाहे कोई भी करणवश, लेकिन जाता है जरुर.

      जब ऐसे मन्दिर स्थान पर नियमित रूप से लोग राजीव दीक्षित जी जैसे लोगों के विचार पर मंथन करने लगे तो क्या होगा सोचिये ?
      आएगी एक नयी सोच और समझ,
      जब यह होगा तो व्यक्ति स्वयम सत्य से जुड़ने लगेगा
      स्नान्तनी होने लगेगा
      देशप्रेमी होने लगेगा
      भ्रम को जानने समझने लगेगा
      और जब वह जागरूक होगा तो 10 को और जागरूक करेगा
      बस यही है शुरुआत

      बाकी आप कहें

  2. In turko ki ye sale suar ki olad aise nhi Mane ge in bhdvo ko ulta latkakr inki suntt nhi blki pura ka pura hi katna pdega lekin jb tk hindu ek nhi hoga tb tk kuch nahi hoga ye thakur pandit baniye jaat sb bhdve h jo apni apni saan unchi krna chahte h inko hindu dhram se koi lena dena nhi h koi jaat smaaj koi rajput smaaj koi pandit smaaj koi falana smaaj koi dhimka smaaj jb tk ye thekedar hindu smaaj nhi bnayege tb tk aise hi ktve inki marte rhe ge or ye marvate rhege jb tk hindu ek nhi hoga tb tk aise hi hindutav klantik hota rhega
    I’m only One Indian
    Jo bhi mere saath h dil se jai hind jai bhart
    Jb tk h jaan is jmin pr nhi pdne denge dusmno ke nishan
    M jrur ek hindu hu
    Lekin pura Hindustan hu
    Sabhi ko meri or se Ram Ram Ram Ram
    Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram
    Bhart mata ki jai
    Jai janni

  3. नवनीत भाई, बहुत सटीक विवरण एवं सत्य… पर हम सब (पुरुष/युवा) वर्ग इस बात पर मनन करता है.. पर कार्यवाही नही करता.. क्यों? क्योकि घर का मुख्य नारी शक्ति है.. जब तक इस देश की नारी नही जागेगी.. तब तक कुछ नही होगा.. जैसे, आप काम करते है (नौकरी, व्यवसाय या अन्य), पर विचार सुन कर आप देश हित में काम करना चाहते है, या अपने बच्चो को गुरुकुल, शाखा, लाठी चलाना, कबड्डी-कुश्ती-बॉक्सिंग के खेल में भेजना चाहते है.. तो आपका सबसे पहला विरोध घर से होगा चाहे वो पत्नी हो, माँ हो या बहन हो… वो अपने बच्चे को little डांस मास्टर बनाना चाहती है.. देशी तौर तरीके करना नही चाहती.. मॉडर्न का तमगा लगवाना चाहती है. जब तक की अपना खुद बुरा ना हो जाए (जैसे कैराना या लव जेहाद या छेड़छाड़ (कड़वा है पर सत्य है).. और कितना भी समझा लो नही समझ आता.. तो सबसे पहले हमें नारी शक्ति जाग्रति पर काम करना होगा.. उसका अगर साथ है तो यही इस राह की सबसे बड़ी एवं पहली जीत है.. अन्यथा आप और हम सिर्फ अपने क्रोध के साथ ही जीवित रह जाएगे

    • हर रस्ते को अपनाओ..
      नारी केंद्र है
      तो क्या पुरुष केंद्र नहीं सम्भालता..

      हम इस सोच से बाहर निकलें की सिर्फ हमारा बताया रास्ता ही एकमात्र रास्ता है..
      क्यूंकि एक मंजिल के अनेकों रास्ते होते हैं बस लोगों को सब रास्ते पता नहीं होते इसलिए वह यह भ्रम में जीते हैं की जो रास्ता उन्हें मिल गया बस वही एकमात्र रास्ता है..

      रास्ते बहुत हैं
      सभी की अपनी वैल्यू है.

      आप किस रास्ते से चलकर आगे बढ़ना चाहे आप चलें
      हम सहयोग करेंगे

      जिस मार्ग से हम चलना चाहते हैं हम उस पर चलेंगे
      और आपसे उसमे सहयोग की उम्मीद करेंगे

      जय हिन्द

  4. पंडित भी तो देखा-देखी कर रहे हैं नॉ।
    अब जैसे हमारे एरिया(सिरसा हरियाणा)में कभी हिंदु-मुस्लिम दंगों का हमने सुना नहीं।
    हॉ 1947 में जरूर हमारे गॉव के एक हिंदु ने कई मुसलमानों को मारा था-ऐसा हम सुनते हैं
    हमारे जैसे ऍरिया के लोगों को इस बाबत क्या करना चाहिए ?

    • आपके यहाँ जनसंख्या check करना.. जवाब मिल जाएगा आपको.. जहाँ जनसँख्या कम वहां कुछ नहीं , वहां भाईचारा, जहाँ ज्यादा वहां समस्या.. अपने क्षेत्र से बड़ा सोचो और देखो देश के अन्य राज्यों में क्या हो रहा है.
      और बड़ा देखो और सोचो विश्व में क्या हो रहा है..
      कुंए का मेंडक बन कर अपने कुंए में मत रहो.. और भी जहाँ हैं इस दुनिया में..

    • सब कुछ आप स्वयम पर आजमाते हो या दूसरों के अनुभव से भी प्रेरणा लेते हो ?

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