वैमानिक विमान शास्त्र हिन्दू धर्म की देन

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प्राचीन काल मे इस देश में ”विमान शास्त्र”

 
प्राचीन काल मे इस देश में ”विमान शास्त्र” , अलग अलग महर्षियो द्वारा लिखा गया है ! भारद्धाज जी प्रथम विमान – अविस्कारक थे !
मुग़ल काल और अंग्रेजो के समय हमारी ज्यादातर तकनिकी शोध या तो जला दी गयी या फिर लूट ली गयी ! १८०० के बाद प्रथम बार वेदो के मंत्रो को समझ कर उसकी दुबारा व्याख्या केवल ”महर्षि दयानंद जी” ही कर पाये थे ! यह बेहद तकनीकी जानकारी होती है सभी लोग सही व्याख्या नहीं कर पते है !
वेदो में ”मन्त्र” होते है और उनके उच्चारण से तकनीक व् अन्य शोध लिखी जाती थी , यह काम देश के हमारे महर्षि और ऋषि करते आये है ! १९२० के बाद बाद यह तकनिकी शोध प्रणाली बंद हो गयी , उसका कारण अंग्रेज और जर्मन थे ! हमारे नेहरू टाइप के लोगो ने इनका पूरा साथ दिया !
आज भी नेहरू की ”भारत एक खोज” विश्व मैं हमारी पहचान मानी जाती है !
यह विदेशी तकनिकी लूट कर ले गए और आधिकारिक रूप से हमको विश्व में ”सपेरों का देश” घोषित कर दिया !
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जर्मनी 1900 के आस पास ही सारे विभिन्न प्रकार के विमान कैसे बना पाया ,जबकि कोई तकनीकी शोध यूरोप के किसी भी देश के पास 1850 से पहले नही थी ! ”व्रिल डिस्क्स” (उडन तस्तरी ) टाइप के विकसित जहाज भी विश्व युद्ध में जर्मन सेना द्वारा इस्तिमाल किये गये थे
यहूदी तकनीकी रूप से हिटलर को चुनौती दे रहे थे !
”हिटलर” की ”यहूदियो” से केवल तकनीकी और ”राजनैतिक वर्चस्व” की लड़ाई थी ! इस राजनैतिक प्रतिस्पर्धा के चलते ही हिटलर ने भारत के वैदिक ”गुरुकुलो की मदद” से एकत्रित की गयी शोध को अपनी ”जर्मन प्रयोगशाला” में तेजी से ”तकनीकी रूप” देना शुरु कर दिया था !
विश्वयुद्ध का अंत यहूदियो (अमेरिका) ने किया, जबकि शुरुआत पनडुब्बियो और आधुनिक वैदिक जहाजो के दम पर हिटलर ने की थी !
प्राचीन काल मे इस देश में ''विमान शास्त्र'' , अलग अलग महर्षियो द्वारा लिखा गया है ! भारद्धाज जी प्रथम विमान - अविस्कारक थे !</p> <p>मुग़ल काल और अंग्रेजो के समय हमारी ज्यादातर तकनिकी शोध या तो जला दी गयी या फिर लूट ली गयी ! १८०० के बाद प्रथम बार वेदो के मंत्रो को समझ कर उसकी दुबारा व्याख्या केवल ”महर्षि दयानंद जी” ही कर पाये थे ! यह बेहद तकनीकी जानकारी होती है सभी लोग सही व्याख्या नहीं कर पते है !</p> <p>वेदो में ”मन्त्र” होते है और उनके उच्चारण से तकनीक व् अन्य शोध लिखी जाती थी , यह काम देश के हमारे महर्षि और ऋषि करते आये है ! १९२० के बाद बाद यह तकनिकी शोध प्रणाली बंद हो गयी , उसका कारण अंग्रेज और जर्मन थे ! हमारे नेहरू टाइप के लोगो ने इनका पूरा साथ दिया !</p> <p>आज भी नेहरू की ”भारत एक खोज” विश्व मैं हमारी पहचान मानी जाती है !<br /> यह विदेशी तकनिकी लूट कर ले गए और आधिकारिक रूप से हमको विश्व में ”सपेरों का देश” घोषित कर दिया !</p> <p>********************<br /> जर्मनी 1900 के आस पास ही सारे विभिन्न प्रकार के विमान कैसे बना पाया ,जबकि कोई तकनीकी शोध यूरोप के किसी भी देश के पास 1850 से पहले नही थी ! ”व्रिल डिस्क्स” (उडन तस्तरी ) टाइप के विकसित जहाज भी विश्व युद्ध में जर्मन सेना द्वारा इस्तिमाल किये गये थे</p> <p>यहूदी तकनीकी रूप से हिटलर को चुनौती दे रहे थे !<br /> ”हिटलर” की ”यहूदियो” से केवल तकनीकी और ”राजनैतिक वर्चस्व” की लड़ाई थी ! इस राजनैतिक प्रतिस्पर्धा के चलते ही हिटलर ने भारत के वैदिक ”गुरुकुलो की मदद” से एकत्रित की गयी शोध को अपनी ”जर्मन प्रयोगशाला” में तेजी से ”तकनीकी रूप” देना शुरु कर दिया था !</p> <p>विश्वयुद्ध का अंत यहूदियो (अमेरिका) ने किया, जबकि शुरुआत पनडुब्बियो और आधुनिक वैदिक जहाजो के दम पर हिटलर ने की थी !” width=”480″ height=”340″ /></p></div> </div> </div> </div> <div> <div class=
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