गाय से 2 लाख करोड़ रूपये का पेट्रोल

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    gobar-ministry
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    नमस्कार दोस्तों

    अगर आपने अभी तक हमारा पहला आर्टिकल “गाय से 2 लाख करोड़ रूपये की रसोई गैस” नहीं पढ़ा है तो उसे अवश्य पढ़ें.

    उसी श्रृंखला की कड़ी में यह दूसरा पोस्ट है जिसमे गाय पेट्रोल डीजल का विकल्प

    उत्तर प्रदेश में गोबर गैस अनुसन्धान स्टेशन ने स्थापित किया है की एक गाय 1 वर्ष में पेट्रोल की 225 लीटर के बराबर मीथेन गैस का उत्पादन करती है.

    भारत ने 2014-2015 में 189 million tonne का इम्पोर्ट किया (क्रूड आयल जिससे रसोई गैस, पेट्रोल, डीजल इत्यादि बनते हैं)

    भारत की प्रति वर्ष की पेट्रोल की खपत है 17 million tonne

    जो की भारत की मात्र 7.5 करोड़ गाय से ही पूरी हो जाएगी.. यानि 7.5 करोड़ गाय 225 लीटर पेट्रोल प्रति गाय से, कुल हुआ 17 मिलियन tonne पेट्रोल के बराबर. जिसकी खरीद की कीमत आप मानिये कम से कम 2 लाख करोड़ भारतीय रूपये..

    यानि की कुल मिलकर 4 लाख करोड़ रूपये की बचत तो गोबर से निकलने वाली गैस से ही बन गया (रसोई गैस 2 लाख करोड़ , पेट्रोल भी 2 लाख करोड़)

    अभी भारत क्या गलतियां कर रहा है :-

    1 पेट्रोल डीजल के लिए विदेशो पर निर्भर है.

    2 नतीजा हमारा गिरता रुपया, गिरती अर्थव्यवस्था, बढ़ते बोझ और टैक्स जनता पर.

    3 गाय की अनदेखी.

    4 पेट्रोल मंत्रालय खोला हुआ है जबकि जरूरत है गाय मंत्रालय की.. गोबर और गोबर गैस पर रिसर्च करने की

     

    2005 की यह समाचार आपको दे रहा हूँ.. जो अब 2016 आ चूका है

    गोरखपुर स्थित गोविंद गौशाला के संस्थापक न्यासी प्रह्लाद ब्रह्मचारी का काम गोबर गैस से कार्बन डाइ आक्साइड और मीथेन गैसों को अलग करके पेट्रोल का एक विकल्प, बोतलबंद मीथेन, तैयार कर देगा और इस विकल्प की कीमत पेट्रोल की आधी है। सच में यदि ये सफल रहा तो ऐसा बहुत ही अच्छा होगा हमारे देश के लिये। नीचें पढ़ें विस्तार से:

     

    पेट्रोल से आधी कीमत पर तैयार ईंधन से दौड़ेंगी कारें

    लखनऊ (भाषा): हो सकता है आने वाले समय में पेट्रोल से आधी कीमत पर तैयार ईंधन से कारें दौड़ने लगें और देश में दूध की नदियां बहने लगें! इस सपने को सच बनाने का प्रयास कर रहे हैं, गोरखपुर स्थित गोविंद गौशाला के संस्थापक न्यासी प्रहलाद ब्रह्मचारी। अपने सहयोगियों की मदद और अदम्य लगन से उन्होंने अपनी गौशाला में गोबर गैस से कार्बन डाई ऑक्साइड और मीथेन को अलग करके मीथेन की बाटलिंग प्रणाली विकसित की है।

    मीथेन की बाटलिंग का यह प्रयोग अगर सफल रहा, तो इससे देश में एक आर्थिक क्रांति आ सकती है। गाय-भैंसें कामधेनु बनकर देहातों को स्वर्ग बना सकती हैं और कारें पेट्रोल से आधी कीमत पर प्रदूषण मुक्त ईंधन के सहारे दौड़ सकती हैं। गोबर गैस में 65 फीसदी मीथेन, 34 फीसदी कार्बन डाई ऑक्साइड और एक फीसदी हाइड्रोजन सल्फाइड होता है। ब्रह्मचारी के मुताबिक, हालांकि बाटलिंग रासायनिक तरीके से भी संभव है, मगर उन्होंने इसके लिए ‘क्रायोजनिक सुपर कूलिंग प्रणाली’ अपनाई। ऐसा करने में मीथेन तो अलग हुआ ही, कार्बन डाई ऑक्साइड जमकर सूखी बर्फ बन गई, जिसका रेफ्रीजिरेशन में व्यावसायिक और बहुआयामी उपयोग होता है। उन्होंने बताया कि एक किलो मीथेन से पुरानी मारुति वैन भी 25 किलोमीटर तक चल जाती है, जबकि थ्री व्हीलर 40-45 किलोमीटर तक चल सकता है।

    वैसे, ब्रह्मचारी कोई इंजीनियर नहीं, सिर्फ कॉमर्स ग्रेजुएट हैं। उनका सपना था कि वह अपनी गौशाला को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाएं और इसी वजह से उन्होंने गोबर गैस की बाटलिंग की ठानी। वह दो साल तक इंटरनेट और केमिस्ट्री की किताबें छानते रहे। इस सिलसिले में वह आईआईटी दिल्ली भी गए। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई। अब वह अपनी गौशाला में बने 45 क्यूबेक मीटर क्षमता के गोबर गैस संयंत्र से प्रतिदिन 4 किलोग्राम क्षमता के चार सिलिंडर भर रहे हैं। बाटलिंग की पूरी प्रक्रिया अपनाने में औसत 5 रुपये प्रति किलोग्राम खर्च उन्हें आ रहा है। उनके गौशाला में इंपोर्ट किया हुआ कंप्रेसर युक्त प्लांट 400 वर्ग फुट से कम के ही क्षेत्रफल में बना हुआ है। उन्होंने बताया कि कम लागत पर मीथेन बाटलिंग का काम व्यावसायिक स्तर पर किया जा सकता है।

     

    क्या कारण है की देश की कोई भी राजनितिक दल इस तरफ नहीं सोचता ?

    क्यूंकि वो इस लूट तंत्र में शामिल हैं हिस्सेदार हैं, बिके हुए हैं उन विदेशियों के पास जो हमारे देश के दुश्मन हैं, मानवता के दुश्मन हैं.. 

     

     

    source

    http://pib.nic.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=102799

    http://ppac.org.in/WriteReadData/Reports/201411110329450069740AllIndiaStudyonSectoralDemandofDiesel.pdf

     

    Also Read:  राजीव दीक्षित जी MP3 Book pdf CD सब कुछ 1 जगह

    6 COMMENTS

    1. इस देश को राजनेताओ ने अपने स्वार्थ में बेच दिया।
      मैकाले ने बौद्धिक रूप से कंगाल बनाया है।
      सामाजिक संस्था संकीर्ण स्वार्थ में लिप्त
      आध्यात्मिक संगठन मत भिन्नता से ग्रस्त अगुवाई करने में फ़ैल हो गए
      राजनीती देश समाज परिवार और ब्यक्ति को तोड़कर अलग कर दिया
      संत आज दुर्लभ हो गए।बचे खुचे समाज से कट कर अलग अलग हो गए
      कथा बाचक और चोंगाधारि अपना अपना संसथान बनाके सुख सुबिधा
      बना लोगो को परम पुरुसार्थ से दूर करके माया के जाल में फसा चुके है
      गौ हत्या पर साधू समाज के आंदोलन पर गोली चलवा कर हतोत्साहित
      करचुके नेता करपात्री जी के शाप से शापित हो गोली से मर गए
      पर उनके दूसरे शाप से धापित देश की धरती पर जबतक गाय की खून
      की बून्द गिरेगी अपना अस्तित्व नहीं बचा पायेगी।
      राजनेता कहलानेवाले चरित्र हीं घन लोलुप और बौथिक रूप से कंगाल
      हो गए है। देश की चिंता किसी को नहीं अपने घर की चिंता है।
      5 नेता भी सभी दलो में ऐसे नहीं जो केवल देश की सोचे?? नहीं है
      ऐसे में देश कैसे अस्तित्व बचाएगा बड़ा यक्ष प्रश्न??

    2. Bhaio turand dan maha kalyan , gobar ko sadane ke liye 20 maheene ki jarurak aur plant ke bahut sari jagah ki jarurat nahi hai, Gay ne gobar kiya , machine me dala nichoda, kharptwar, agrowast milaya , hath me bio pellet Vedik eendhan , car, truck , generator , machine sab chalo . hame bhi hath ajmane do.

    3. गौमाता आधारित देश की अर्थव्यवथा होगी तो देश सोनी की चिया बनजाएगा.

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