हिन्दू मंदिरों में पूजा के अधिकार पर प्रतिबन्ध??

हिन्दू मंदिरों में पूजा के अधिकार पर प्रतिबन्ध??

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बंधुओं बचपन में जिस क़स्बे में पलाबढा वहां पास में एक मस्जिद है सुबह सुबह ” अल्लाह हो अकबर ”  की गूंज सुनाई देती थी I कभी कभी किस के इंतकाल की खबर भी लाउडस्पीकर के माध्यम से सुनता था Iकुछ भी समझ में नहीं आता था मगर ये मानते हुए की किसी धर्म विशेष की आस्था का विषय है मन ही मन नमन कर लेता था उस परमपिता को Iवैसे भी सहिष्णु हिन्दू धर्म में हर धर्मस्थल पर शीश नवाना कोई नयी बात नहीं हैI

एक और बचपन की घटना साझा करना चाहूँगाएक बार पास के गांव में खेतों के बीचो बिच कुछ सफ़ेद रंग की चबूतरे जैसे आकृतियाँ बनी हुई थी कुछ लोग दूसरी और अपने काम में व्यस्त थे,गलती से मै एक चबूतरे पर चढ़ गया मेरे साथ के एक मित्र ने तुरंत मुझे टोका की ” अबे किस पर चढ़ा है ये कब्र किसी की ” इस प्रकार कब्र से मेरा पहला परिचय हुआ I जैसा की हिन्दू धर्म का स्वाभाविक गुण है मैं तुरंत वहां से नीचे उतर कर अपनी गलती सुधारते हुए कब्र पर दोनों हाथ जोड़ते हुए सर झुकाने लगा,तभी खेत से एक चचाजान का मिट्टी से सने हाथो के साथ आना हुआ और उन्होंने हमे झिडकते हुए कुछ १-२ अपशब्द कह कर भगा दिया I
हमारे बालमन में ये बात चल रही थी आखिर हमे झिडकी और गालियाँ उस कब्र पर चढ़ने की पड़ी या एक बच्चे के पश्च्याताप स्वरुप सर झुकाकर कब्र की पूजा करने की I  ये घटना मेरे स्मृति पटल पर स्थायी रूप से चिन्हित हो गयी हो गयी और बाद में कभी वहां से गुजरा तो किसी अन्य चचाजान के खौफ से  मन ही मन नमन करके वहां  से निकल पड़ता I समय व्यतीत होने के साथ साथ उन अपशब्दों कावैश्विक कारण भी पता चल गया जिससे आप और हम सभी परिचित हैं(जिक्र करना उचित नहीं है यहाँ) I
अभी कुछ दिन पहले एक घटना हुए मेरे एक मित्र ने शुक्रवार की सुबह  को फोन करके कहा हैदराबाद चलना है तुमको आज ही..मैंने पूछा क्यों भई ” जबाब मिला घंटी बजाने”
मैंने अपनी व्यक्तिगत बाध्यताएं और प्रतिबद्धताओं का हवाला देते हुए उन्हें मना किया और पूछ लिया भाई घंटी यही बजा लो, हैदराबाद ही क्यों??, 
बंधू ने इतना कहते हुए फोन काट दिया की आ के खुशखबरी दूंगा ..
आने के उनके विवरण को सुनकर एक विषाद-युक्त ख़ुशी का अनुभव हुआ I  घटना कुछ यूँ थी की  हैदराबाद की चारमिनार मस्जिद के पास हिन्दुओं की श्रधा का केंद्र ऐतिहासिक केंद्र भाग्यलक्ष्मी मंदिर है..
वहां के मुश्लिम बंधुओं ने ये तर्क दिया की घंटी इश्लाम के खिलाफ है और मुस्लिम के कानो में उसकी आवाज पड़ना भी हराम है..इसलिए उन्होंने ये बात अपने स्थानीय विधायक अकबुरुद्दीन( नाम से ही इनकी महानता का पता चलता है  ) को बताई और उन्होंने अपनी महानता का सबूत  देते हुए   घंटी बजाने पर प्रतिबन्ध लगाने की वकालत की..
इसके साथ साथ सभी हिन्दू त्योहारों पर रोक लगाने की वकालत कर दी..उनकी ये मांग माननीय जवाहर लाल गाजी नेहरु उर्फ़ जवारुद्दीन के ईसाई वंशजो(??) रौल उर्फ़ (बबलू युवराज जिसे हम राहुल के छद्म नाम से जानते हैं ) और उनकी माँ एवं भारतीय मीडिया की एकमात्र इन्डियन बहू श्रीमती अन्तानियो अल्बीना माइनों उर्फ़(सोनिया गाँधी छद्म नाम) के पास पहुची I 
कांग्रेसी सरकार के पास इस मांग के आते ही हिन्दुओं को अपने देश में अपने जूतों तले कुचलने का एक और मौका मिला और इसे बिलकुल ही न गवाते हुए उन्होंने आज तक के हिंदुस्थानी  इतिहास का सबसे बड़ा हिंदुविरोधी( या तथाकथित सेक़ुलर) फैसला लेते हुए उस मंदिर में घंटी  बजाने पर रोक लगा दी और दो महिला कांस्टेबल भी तैनात कर दिए जो घंटी के आस पास किसी को फटकने नहीं देंगी..तश्वीरें इस बात की प्रमाण है I
हालाँकि ,ये रही विषाद की बात, मगर ख़ुशी उसी शाम एक वीडियो को देखकर मिली जब हजारो के संख्या में हिन्दुओं ने पुरे देश के कोने कोने से पहुच कर इटली की वेट्रेस के तालिबानी गठजोड़ के फरमान को घंटा दिखाते हुए मंदिर घंटी पुरे प्रशासन के सामने बजायी Iहिन्दुविरोधियों और सेक़ुलर श्वानो को ये बात समझ में आ गयी होगी की अब हिन्दू प्रतिरोध की भाषा समझ गया है और जिसे जो भाषा समझ में आती है उस तरह से प्रतिक्रिया दी जाएगी Iऔर कहा भी गया है 
अतिशय रगड़ करे जो कोई 
अनल प्रकट चन्दन से होई…. 

जरा सोचें इन तस्वीरों को देखेने और इस इटली की भूतपूर्व वेट्रेस के तालिबानी फैसले के बाद एक सामान्य हिन्दू की प्रतिक्रिया क्या होनी चाहिए…
१ या तो आप  सहिष्णुता का लबादा ओढ़ कर नपुन्सको की तरह बैठ जाएँ और हिन्दुस्थान में हिन्दू होने का अपराध करने की सजा भुगते 
२ आप प्रतिरोध करें…
मेरे मन में दूसरा विचार आया क्यूकी पहले विचार पर चलने का परिणाम आज हमारे सामने है.मगर ये ध्यान रखें की प्रतिरोध में सब जायज होता है ..प्रतिरोध में गोधरा भी होता है और विवादित बाबरी ढांचा गिरता है प्रतिरोध में कर्नल पुरोहित और प्रज्ञा ठाकुर पैदा होते हैं और यही प्रतिरोध है जिसने भगत,सुभाष,सावरकर,
बिस्मिल,चन्द्रशेखर आजाद पैदा किये
तो  क्या अब यही एक रास्ता बचा है Iकश्मीर एक मात्र मुश्लिम बहुल राज्य है और वहां हिन्दुओं को तो पहले ही भगाया जा चूका है अब हिंदुस्थानी सेना और हिन्दुस्थान से ही अलग होने का प्रयास हो रहा हैI तो क्या पहले कश्मीर और अब मुश्लिम बहुल हैदराबाद …..अगर ये क्रम चलता रहा तो कल अलीगढ,बरेली,लक्षद्वीप,नागपाडा से लेकर हिदुस्थान के हर हिस्से में इश्लामिक द्वीपों का निर्माण हो जायेगा और आप को दाढ़ी रखनी  पड़े और आप की बहन को बुरका पहनना पड़े I अगर ऐसा नहीं तो आप की ४ साल की बच्ची का बलात्कार हो और आप का घर जला दिया जाये(सन्दर्भ: १९८९ के बाद  घाटी  एवं कश्मीर की स्थितियां) I
मेरे कई मुश्लिम मित्र है और बड़ी बड़ी बाते भी करते हैं वो मगर इन कटु सत्यों से कैसे मुह चुरा सकते हैं I अगर किसी ने इन प्रश्नों का जबाब दिया भी तो उत्तर के रूप में प्रश्न आता है गोधरा कांड का Iशायद  वो भूल जाते हैं की गोधरा कांड की शुरुवात भी कुछ मुश्लिम बंधुओं ने की थी फिर प्रतिक्रिया और प्रतिरोध में सब जायज होता हैI
मैं कोई विष वमन नहीं करना चाहता किसी धर्म विशेष पर मगर कुछ सेक़ुलर श्वान (जो की हिन्दू धर्म का कैंसर हैं)अब भी आँख मूंद कर वैचारिक हस्तमैथुन में व्यस्त है I
आप कब तक भागेंगे आँख मूंदने से शत्रु पक्ष की गोली अपना रुख नहीं बदलती अगर जीवित रहना है आप को आँखे मिलाकर प्रतिकार करना होगा चाहें वो शत्रु हो या स्वयं महाकाल I
अन्यथा तैयार 
रहिये मंदिरों में पूजा बंद करने के लिए शायद  इससे भी आगे एक हिंदुस्थानी हिन्दू काफ़िर की हिन्दुस्थान में कुत्ते की मौत के लिए Iमैं किसी धर्म का विरोधी नहीं हूँ इसलिए कभी अजान से मेरी नींद में खलल नहीं पड़ा न ही ताजिये के जलूस से मेरा रास्ता रुकाI
 जाते जाते कश्मीर में कैसे मनाया हमारे भाइयों ने गणतंत्र दिवस उसकी एक झलकी देखें I 


चुनाव हो रहे हैं कई राज्यों वोट देना आप का अधिकार है मैं सिर्फ हिन्दुस्थान के दुसरे जलियावाला बाग़ कांड की कुछ झलकियों के साथ छोड़ जाता हूँ जिसकी साजिश इटली की वेट्रेस और अमरीकी दलाल ने रची थी I  जलियावाला बाग़ तो फिर भी जागते हुए लोगो के साथ किया गया था मगर यहाँ सोते हुए लोगो पर लाठी गोली चली I 
वन्दे मातरम..
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