सोशल मिडिया और अंधभक्ति

सोशल मिडिया और अंधभक्ति

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आज एक मेसेज मिला। बड़ा ही अजीब था।
लिखा था की सोशल मीडिया का इस्तेमाल सिर्फ दुसरो की बुराई करने में या कॉपी पेस्ट करने में होता है। जमीन पर सचचाई में कुछ नही।

मजेदार बात ये है ये msg भी दुसरो की बुराई ही कर रहा था। जब इस और लिखने वाले का ध्यान आकर्षित किया तो उन्होंने उसे मजाक में न लेकर उल्टा लंझन लगा दिए। उन्ह समझाने की कोशिश की लेकिन कौन आजकल किसी की सुनता है, बोलने में ज्यादा विश्वास होता है। इसलिए ये पोस्ट।

साथ ही एक विचार आया और कुछ बातें भी समझ आई की आखिर हो क्या रहा है।

बात को गंभीरता से पढ़ें टी सच भी है की कितने ही लोगों का तो पेशा ही येही है लेकिन सिर्फ शब्द गलत है।

सोशल मीडिया के फायदे क्या है ये मोदी सरकार और राजीव भाई के देशभक्त लोग भली भाँती जानते हैं।

उसके नुक्सान बाकी देशद्रोही लोग भी अच्छी तरह से जानते हैं।

लेकिन अब हो क्या रहा है की जब से इस ताक़त का अंदाज़ा देशद्रोहियों को हुआ है तो उन्होंने इसका उस्तेमाल भी शुरू कर दिया। उन्होंने अपने पेड स्टाफ को बिठाना शुरू किया हैजिसका काम सिर्फ और सिर्फ देशभक्तों को भड़काना, तोडना, मोदी सरकार के खिलाफ ब्यानबाज़ी करवाना ( बिना तथ्य की बातें इन्टरनेट पर डालना). जो समझदार लोग हैं वो कॉपी पेस्ट सोच समझकर करते हैं लेकिन जो अंधभक्त हैं , जिन्हें बस कोई खबर लेकर आग लगाने से मतलब है वो उसका अंधाधुंध कॉपी पेस्ट करते हैं और गलत खबर भी आग की तरह फ़ैल जाती है जैसे ( मोदी जी ने जिस झंडे के साथ शपथ ली, उसको अंधभक्त मूर्खों ने यूनियन जैक का झंडा कहा, न जांच न पड़ताल सीधा फैसला, जैसा पेड मीडिया करती है) उन लोगों की मुर्खता से सोशल मीडिया बदनाम होना शुरू हुआ। और कई लोग तो उस गलत msg को अभी भी सही समझ कर बैठे हैं।

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मेरा निवेदन है राजीव भाई के समर्थकों से की राजीव भाई हर बात का सबूत देते थे या सही सही आंकड़े और विश्लेषण देते थे, लेकिन उनके कुछ चेले जोश में ये बात नही समझते और बिना किसी को जांचे परखे आरोप शुरू जैसे केजरीवाल ।

न खाता न बही जो कजरी कहे वो सही।

तो भाइयों अपनी विश्वसनीयता तो आप खोना चाहो खोदो, लेकिन जिस राजीव भाई के नाम को लेकर आप कुछ उल्टा बोल जाते हो वो राजीव भाई के नाम को और उनसे जुड़े लोगों के काम को पीछे कर देता है। तो अक्ल से काम करो। जो चीज समझ में आये वो करो। जो नही आये उसे जाने दो। हर बात पर आपका मत किसने माँगा है ।

कितने ही लोग मोदी विरोधी सर उठाने लगे हैं, उनसे पुछो की भाई मोदी नही तो किसे कांग्रेस राहुल या आआप कजरी । तो जवाब नही सूझता। मोदी विरोधी अंधभक्त इतना भी नही जानते की लोक सभा और राज्य सभा में क्या अंतर होता है।
लोक सभा में मोदी सरकार को बहुमत है तो राज्यसभा में सिर्फ 42 सीट है 245 में से। संविधान को बदलने के लिए दोनों सदनों में बिल का पास होना जरुरी है। इसलिए कितने ही बिल लटके हुए हैं ।

अरे भाई पहली बात तो और कोई विकल्प है क्या या था क्या ???

और क्या मोदी ने कुछ भी अच्छा नही किया ???

जो फैसले अभी नही आये वो नही आयेंगे ये कैसे तय कर लिया आपने ???

या जो फैसले आये वो गलत है ये कैसे कह सकते हो ?? आओ करो इन मुद्दों पर बात समूहों में। इन मुद्दों पर बात कोई करता नही, समझ कुछ develop होती नही, बस कॉपी पेस्ट शुरू है।

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तो सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल करो, येही एकमात्र साधन है जहाँ हम सब एक दुसरे तक सारी बाते पहुंचा सकते हैं।

सोशल मीडिया का इस्तेमाल सिर्फ गलत चीजो के लिए होता है इसमें सिर्फ शब्द बहुत ही गलत msg देता है। भाषा और शब्द सोच समझ कर लिखें। कहीं अर्थ का अनर्थ न बन जाये।

वन्दे मातरम।
जय हिन्द

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