रसाहार चिकित्सा

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रोगानुसार रसाहार

ध्यान दें –

हमेशा ताज़े फलों का रस ही उपयोग में लें |डिब्बाबंद रसों को उपयोग में न लें। इसे प्रिजर्व करने के लिए बेन्जोइक एसिड मिलाया जाता है जोकि सवास्थ्य के लिए हानिकारक है |’फ्रेशफ्रूट’ के लेबल में मिलती किसी भी बोतल या डिब्बे में ताजे फल अथवा उनका रस कभी नहीं होता।उसमें चीनी, सैक्रीन और कृत्रिम रंग ही प्रयुक्त होते हैं जो दाँतों और आँतड़ियों को हानि पहुँचाते हैं |पैक्ड जूस बनाने की विधियों के अनुसार फलों को गर्म पानी में धोकर पकाया जाता है तत्पश्चात  छिलका निकालकर इसमें चाशनी डाली जाती है | यह रस लम्बे समय तक ख़राब न हो इसके लिए इनमे विभिन्न रसायन जैसे -कैल्शियम नाइट्रेट, एलम और मैग्नेशियम क्लोराइड मिलाये जाते हैं।

निम्न रक्तचापः मीठे फलों का रस लें, अंगूर और मोसम्मी का रस अथवा दूध भी लाभदायक है।उच्च रक्तचापः गाजर, अंगूर, मोसम्मी और ज्वारों का रस । मानसिक तथा शारीरिक आराम आवश्यक है। अनिद्राः अंगूर और सेव का रस। पीपरामूल शहद के साथ ।सिरदर्दः ककड़ी, चुकन्दर, गाजर, गोभी और नारियल के रस का मिश्रण।संधिवातः लहसुन, अदरक, गाजर, पालक, ककड़ी, गोभी, हरा धनिया, नारियल का पानी तथा सेव और गेहूँ के ज्वारे।पायरियाः गेहूँ के ज्वारे, गाजर, नारियल, ककड़ी, पालक और सुआ की भाजी का रस। कच्चा अधिक खायें।एसीडिटीः गाजर, पालक, ककड़ी, तुलसी का रस, फलों का रस अधिक लें। अंगूर मोसम्मी तथा दूध भी लाभदायक है।अल्सरः अंगूर, गाजर, गोभी का रस। केवल दुग्धाहार पर रहना आवश्यक है।कोलाइटिसः गाजर, पालक और पाइनेपल का रस। 70 प्रतिशत गाजर के रस के साथ अन्य रस समप्राण। चुकन्दर, नारियल, ककड़ी, गोभी के रस का मिश्रण भी उपयोगी है।बवासीरः मूली का रस, अदरक का रस घी डालकर।डायबिटीजः गोभी, गाजर, नारियल, करेला और पालक का रस।कैंसरः गेहूँ के ज्वारे, गाजर और अंगूर का रस।पीलियाः अंगूर, सेव, रसभरी, मोसम्मी। अंगूर की अनुपलब्धि पर लाल मुनक्के तथा किसमिस का पानी। गन्ने को चूसकर उसका रस पियें। रक्तवृद्धि के लिएः मोसम्मी, अंगूर, पालक, टमाटर, चुकन्दर, सेव, रसभरी का रस रात को। रात को भिगोया हुआ खजूर का पानी सुबह में। इलायची के साथ केले भी उपयोगी हैं।पथरीः पत्तों वाली भाजी न लें। ककड़ी का रस श्रेष्ठ है। सेव अथवा गाजर या कद्दू का रस भी सहायक है। जौ एवं सहजने का सूप भी लाभदायक है।वजन बढ़ाने के लिएः पालक, गाजर, चुकन्दर, नारियल और गोभी के रस का मिश्रण, दूध, दही, सूखा मेवा, अंगूर और सेवों का रस।वजन घटाने के लिएः पाइनेपल, गोभी, तरबूज का रस, नींबू का रस। खूबसूरती हेतु :  सुबह-दोपहर नारियल का पानी या बबूल का रस लें। नारियल के पानी से चेहरा साफ करें।ब्रोन्काइटिसः पपीता, गाजर, अदरक, तुलसी, पाइनेपल का रस, मूँग का सूप। स्टार्चवाली खुराक वर्जितसर्दी-कफः मूली, अदरक, लहसुन, तुलसी, गाजर का रस, मूँग अथवा भाजी का सूप।दमाः लहसुन, अदरक, तुलसी, चुकन्दर, गोभी, गाजर,  भाजी का सूप अथवा मूँग का सूप |फ्लूः अदरक, तुलसी, गाजर का रस।भूख बढ़ाने हेतु : प्रातःकाल खाली पेट नींबू का पानी पियें। खाने से पहले अदरक का कचूमर सैंधव नमक के साथ लें।रक्तशुद्धिः नींबू, गाजर, गोभी, चुकन्दर, पालक, सेव, तुलसी, नीम और बेल के पत्तों का रस।मुहाँसों के दागः गाजर, तरबूज, प्याज, तुलसी और पालक का रस।फोड़े-फुन्सियाँ- गाजर, पालक, ककड़ी, गोभी और नारियल का रस।दाँत निकलते बच्चे के लिएः पाइनेपल का रस थोड़ा नींबू डालकर रोज चार औंस(100-125 ग्राम)।आँखों के तेज के लिएः गाजर का रस तथा हरे धनिया का रस श्रेष्ठ है।स्त्रियों को मासिक धर्म कष्टः अंगूर, पाइनेपल तथा रसभरी का रस।

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