भूमि अधिग्रहण बिल मेरी प्रतिष्ठा का सवाल नहीं : मोदी

भूमि अधिग्रहण बिल मेरी प्रतिष्ठा का सवाल नहीं : मोदी

273
0
SHARE
नयी दिल्ली, 29 मई 2015
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कर दिया है कि भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक उनके लिए प्रतिष्ठा या जीवन-मरण का विषय नहीं है। यह उनकी पार्टी या सरकार का एजेंडा भी नहीं था। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का मसौदा मुख्यमंत्रियों की सलाह पर तैयार किया गया है और उनकी सरकार इस पर अभी भी हर सुझाव का स्वागत करने को तैयार है। ट्रिब्यून समूह के प्रधान संपादक राज चेंगप्पा से 45 मिनट के विशेष साक्षात्कार में प्रधानमंत्री ने अपने एक साल के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनवाईं और विपक्ष द्वारा उठाये जा रहे मुद्दों का करारा जवाब दिया।
उन्होंने दैनिक ट्रिब्यून के माध्यम से सैनिकों और पूर्व सैनिकों को वन-रैंक वन-पेंशन लागू करने का भी आश्वासन दिया और कहा कि इस बारे में बात चल रही है। उन्होंने कहा कि किसी को भी वन रैंक-वन पेंशन लागू होने के बारे में कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। वन रैंक-वन पेंशन की कई परिभाषाएं हैं तथा क्या मेरे लिये यह उचित होगा कि सैनिकों के हितों को ध्यान में रखे बिना मैं इस पर कोई निर्णय ले लूं। हम एक ऐसा फैसला लेना चाहते हैं जो सभी को खुश कर सके।
प्रधानमंत्री ने काले धन और भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख स्पष्ट किया। उन्होंने ऐलान किया कि भ्रष्टाचारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जायेगा। उन्होंने कहा कि जो लोग पूर्व में सत्ता में रहे, उनमें से किसी को भी काले धन के बारे में मुझ से सवाल करने का अधिकार नहीं है। उन्हीं के कार्यकाल में काले धन का कारोबार हुआ है। मेरी सरकार ने पहली केबिनेट मीटिंग में पहला निर्णय काले धन को रोकने के लिए लिया। एसआईटी ने अपना काम करना शुरू कर दिया है। उन्होंने साफ किया कि वे किसी भी काले धन वाले को छोड़ने वाले नहीं हैं। उन्होंने ट्रिब्यून से भी इस मामले में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार को लेकर ‘जीरो टाॅलरेंस’ होना चाहिए। सिर्फ मेरा ईमानदार होना काफी नहीं है। ‘जीरो टाॅलरेंस’ यह बात मेरी वाणी, व्यवहार, रीति-नीति सब में दिखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार में एक एलईडी बल्ब 380 रुपये में खरीदा जाता था, हम 80 रुपये में खरीद रहे हैं। ऐसे ही सीमेंट की बोरी पहले सरकार 360 रुपये में खरीदी जाती थी, आज करीब 150 में खरीदी जा रही है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष उनकी सरकार के खिलाफ कोई मुद्दा नहीं जुटा पाया, इसलिए हताशा की स्थिति में सूट-बूट की सरकार जैसे शब्द प्रयोग हो रहे हैं। यह विपक्ष के दिवालियेपन को दर्शाता है। इस एक साल में किसी को सरकार की आलोचना के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं मिला, यह हमारी सबसे बड़ी सफलता है। वे केवल हमारी यह आलोचना कर सकते हैं कि पीएमओ ज्यादा ताकतवर हो गया है। दूसरा आरोप यह है कि मोदी अहंकारी है। तीसरा, यह कि मैं क्या कपड़े पहनता हूं।
विदेश यात्राओं पर उन्होंने चुनौती दी कि उन्होंने किसी भी पूर्व प्रधानमंत्री से ज्यादा यात्राएं नहीं की, लेकिन कामकाज उनसे कई गुणा ज्यादा कर दिया है। अपने विदेश दौरों पर मोदी ने कहा कि पहले के प्रधानमंत्रियों ने विदेशों के उतने ही दौरे किए हैं, जितने मैंने किये। मीडिया को इस संबंध में मेरे साथ ईमानदारी दिखानी चाहिए। यह भी देखना चाहिए कि पहले के पीएम जब जाते थे तो कितनी गतिविधियों से जुड़ते थे, कितने नेताओं से मिलते थे और मोदी ने क्या किया।
अपनी विदेश नीति को स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा “मैं इस बारे में बिल्कुल स्पष्ट हूं कि हम कोई संतुलन बनाने वाली ताकत नहीं हैं। भारत अब एक वैश्विक खिलाड़ी है तथा चीन और अमेरिका से हम समान धरातल पर संबंध रखेंगे। पड़ोसियों के संबंध में हमारी विदेश नीति का जहां तक संबंध है तो इसका आधार मानवता होगा। नेपाल, यमन, श्रीलंका और मालदीव संकट के समय संबंधों में हमारी यहीं नीति आधार बनी।
उन्होंने कहा कि केंद्र की शासन व्यवस्था सुचारु रूप से चलाने के लिए दिल्ली में राज्यों से अफसर आते हैं, 2-4 साल रहते हैं, तो केंद्र के लिए ऐसी टीम बनानी होगी, जो 30-35 साल यहीं बिताए। केंद्र के लिए अफसरों की एक समर्पित टीम को उन्होंने निरंतरता के लिए जरूरी बताया और कहा कि आखिरकार टीम ही तो काम करती है। दूसरे वर्ष का एजेंडा उन्होंने सिर्फ और सिर्फ विकास बताया।
अच्छे दिनों की परिभाषा
जब कोई बीमार होता है तो हम कहते हैं- चिंता मत करो, अच्छे हो जाओगे। यह बात हम उस ‘बुरे’ के संदर्भ में कहते हैं। अच्‍छे दिन की कल्‍पना उन बुराइयों से मुक्ति का पर्व है। मैं मानता हूं, इसे हमने सफलतापूर्वक किया है।
-नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
Also Read:  Thorium Disappearing’: UPA’s new Coalgate?

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY