भारत के राष्ट्र गान जन गन मन अधिनायक का सत्य

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    सवाल क्या जन गण मन भारत की गुलामी का प्रतिक है ??? आइये जाँचे …..
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    जनगणमन अधिनायक जय हे, भारत भाग्य विधाता

     

    पंजाब सिंध गुजरात मराठा द्राविड उत्कल बंग

     

    विंध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छल जलधितरंग
    तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे
    गाहे तव जय गाथा
    जनगणमंगलदायक जय हे, भारत भाग्यविधाता
    जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे ।।१।।
    अहरह तव आव्हान प्रचारित सुनि, तव उदार वाणी
    हिंदु बौद्ध सिख जैन पारसिक मुसलमान खिस्तानी
    पूरब पश्चिम आसे, तव सिंहासन पासे
    प्रेमहार हय गाथा
    जनगणऐक्यविधायक जय हे, भारत भाग्यविधाता
    जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे ।।२।।
    पतनअभ्युदयबंधुर पंथा युगयुग धावित यात्री
    तुम चिर सारथी, तव रथचक्रे मुखरित पथ दिन रात्री
    दारुण विप्लव माजे, तव शंखध्वनि बाजे
    संकट दुःखयात्रा
    जनगण पथ परिचायक जय हे, भारत भाग्यविधाता
    जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे ।।३।।
    घोरतिमिरघननिबिड निशीथे पीडित मूर्छित देशे
    जागृत छिल तव अविचल मंगल नत नयने अनिमेषे
    दु:स्वप्ने आतंके, रक्षा करिले अंके
    स्नेहमयी तुमी माता
    जनगण दु:ख त्रायक जय हे, भारत भाग्यविधाता
    जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे ।।४।।
    रात्र प्रभातिल उदिल रविच्छवि पुर्व उदयगिरि भाले
    गाहे विहंगम पुण्य समीरण नवजीवन रस ढाले
    तव करुणारुण रागे, निद्रित भारत जागे
    तव चरणे नत माथा
    जय हे, जय हे, जय हे,
    जय जय जय जय हे, भारत भाग्यविधाता ।।५।।

    1. जनगणमन अधिनायक जय हे, भारत भाग्य विधाता

    यहाँ पर अधिनायक (राजा पुल्लिंग) किसको कहा गया है ?? भारत माता को ? लेकिन भारत माता तो स्त्रीलिंग है, यहाँ सभी लोग भारत को बाप नहीं भारत माँ के नाम से जानते हैं
    भारत भाग्य विधाता का क्या अर्थ है (भारत भाग्य विधाता है ? या भारत का भाग्य विधाता है ? विधाता भी भारत नही हो सकता क्यूंकि विधाता शब्द भी पुल्लिंग है जो किसी पुरुष की तरफ केन्द्रित है

    2. तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे गाहे तव जय गाथा

    (भारत उस वक़्त अंग्रेजो की गुलामी में था वो भी तक़रीबन १५० साल से, उससे पहले भी वो मुसलमानों की गुलामी में जकड़ा रहा, तो ये भारत की जय गाथा की बात हो सकती है क्या ? कौनसी जय गाथा ? उन दिनों तो सिर्फ अंग्रेज हि थे जिन्होंने दुनिया को गुलाम बनाया हुआ था)…. तो ये किसकी जय गाथा हो रही थी ??

    3. पूरब पश्चिम आसे, तव सिंहासन पासे प्रेमहार हय गाथा

    (पूरब पश्चिम क्या यहाँ पर सिर्फ भारत की बात हो रही है या फिर उस अंग्रेजी राजा की जिसने पूरब से पश्चिम तक अपना साम्राज्य बना लिया था, सिंहासन पर भारत माँ तो कब से नहीं थी , तो ये किसके सिंहासन की बात हो रही थी ??)…. भारत माँ के सिंहासन की बात तो बिलकुल नहीं थी…

    4. घोरतिमिरघननिबिड निशीथे पीडित मूर्छित देशे जागृत छिल तव अविचल मंगल नत नयने अनिमेषे दु:स्वप्ने आतंके, रक्षा करिले अंके स्नेहमयी तुमी माता जनगण दु:ख त्रायक जय हे, भारत भाग्यविधाता

    (मुर्छित देश अगर भारत है तो उसकी जय गाथा कैसे और क्यूँ ?? माता शब्द से भ्रमित न हों क्यूंकि उस दिन उस राजा के साथ उसकी रानी भी आई थी, जिसको इन अंग्रेजी मानसिकता से पीड़ित गुलामो ने अपनी माँ तक कह डाला)…

    5. “तव करुणारुण रागे, निद्रित भारत जागे”

    क्या इस पंक्ति से साफ़ नही दीखता की यहाँ पर तव यानि तुम्हारी का अर्थ भारत बिलकुल नहीं है क्यूंकि यहाँ भारत अलग लिखा है और तव (तुम्हारी) अलग लिखा है. इस पंक्ति का अर्थ है “सोता हुआ भारत जगता तुम्हारी करुणा के राग से”

    6. ये गीत कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में पहली बार क्यूँ गाया गया ?

    अगर कांग्रेसी या उनके चमचों की बात मान भी लें की ये गीत भारत के लिये हि था तो क्यूँ ये गीत तभी गाया गया जब एक दमनकारी राजा और रानी भारत में आये ? क्या इस गीत से कांग्रेसी या टैगोर विद्रोह दिखा रहे थे ? इसमें विद्रोह वाली बात की जगह तो सारी बातें सिर्फ praise (प्रशंसा) में हि कही हुई है..

    7. देश के क्रांतिकारियों ने कभी इस गीत को क्यूँ नहीं गाया …

    अगर जन गन मन हि उस क्रांति का आगाज था तो क्यूँ नहीं देश के क्रांतिवीरों ने इसका कभी गुणगान किया या नाम भी लिया. जय हिन्द, वन्दे मातरम् के सिवा आपने कभी के मुंह से सुना की जन गन मन गा रहा हो या जय हिन्द की जगह जय हे जय हे गा रहा हो ??
    याद रहे ये गीत गाया किस सभा में गया था, और उस सभा में उस दिन और क्या हुआ था ? आपको बता दें की ये उस समय के काले अंग्रेज यानि कांग्रेस पार्टी जिसके खून में अंग्रेजी मिलावट शुरू से थी (बस रंग काला था, सोच वही थी) के कलकत्ता के अधिवेशन में हुई थी. उसी दिन राजा और रानी के सम्मान में प्रस्ताव भी पारित किया गया था, जो की सिर्फ एक चाटुकार सेवक गुलाम हि कर सकता है.

    tagore-gandhi

    8. The English newspapers carried the following report about the event:

    “The Bengali poet Babu Rabindranath Tagore sang a song composed by him specially to welcome the Emperor.“ (Statesman, Dec. 28, 1911)

    “The proceedings began with the singing by Babu Rabindranath Tagore of a song specially composed by him in honour of the Emperor.“ (Englishman, Dec. 28, 1911)


    “When the proceedings of the Indian National Congress began on Wednesday 27th December 1911, a Bengali song in welcome of the Emperor was sung. A resolution welcoming the Emperor and Empress was also adopted unanimously.“ (Indian, Dec. 29, 1911).


    9. News Report About the Event as reported in the Indian newspapers

    “The proceedings of the Congress party session started with a prayer in Bengali to praise God (song of benediction). This was followed by a resolution expressing loyalty to King George V. Then another song was sung welcoming King George V.“ (Amrita Bazar Patrika , Dec.28,1911)


    “The annual session of Congress began by singing a song composed by the great Bengali poet Babu Ravindranath Tagore. Then a resolution expressing loyalty to King George V was passed. A song paying a heartfelt homage to King George V was then sung by a group of boys and girls.“ (The Bengalee, Dec. 28, 1911).

    What do you expect from Indian Newspapers specially in period of Gulami ?Rabindranath Tagore prepared and sang a song to praise King of Britain ?? was this news you are looking for ?? What would have been the impact of this news on Freedom Movement of India. It would have burned Kolkatta, Tagore and his family and ignited the new spirit among revolutionaries. Don’t u think so ??

    Also Read:  जन गन मन का इतिहास

    This Amrit Bazaar Patrika is ABP news group. How good news traders they are and how much patriotism they have, we all know.

    10. Report of the annual session of the Indian National Congress

    “On the first day of 28th annual session of the Congress, proceedings started after singing Vande Mataram. On the second day the work began after singing a patriotic song by Babu Ravindranath Tagore. Messages from well wishers were then read and a resolution was passed expressing loyalty to King George V. Afterwards the song composed for welcoming King George V and Queen Mary was sung.“

    Again what do you expect from record and archives of slave mind people ?? If british were to leave India then they need to give it in hands of those who are their slaves in all senses so how can they let congress loose people’s confidence by allowing them to write the 100% truth.


    11. Nobel Prize to Tagore in 1913

    This song is included in Rabindranath’s book “Geetanjali”. He received the Nobel Prize for Literature in 1913 for this book.
    2011 में टैगोर के सम्मान में उसी राजा के वंशजो द्वारा उस चाटुकार टैगोर को सम्मान दिया जाना
    8 July 2011 Last updated at 14:16
    London statute for Nobel winner Rabindranath Tagore
    Tagore won the Nobel Prize for Literature in 1913
    A bust of Nobel Prize-winning Indian poet Rabindranath Tagore has been unveiled in London by Prince Charles. Tagore was the first Asian to win the award, in 1913, which was for his collection of poems titled Gitanjali. Unveiling the £50,000 bronze statue in Gordon Square, central London, to mark the poet’s 150th birth year, Prince Charles said the inscriptions will “shine out as a beacon of tolerance”. Tagore Centre UK said it hoped to raise £15,000 towards the cost of the statue.
    12. Rabindranath was conferred Knighthood on 3 Jun 1915,
    on the date of birth of 5th George in recognition of the name he has established in India and Europe and of his genius as a poet.
    Rabindranath Tagore discarded this Title of Knighthood for the inhuman act of British Government in Jallianwalabag in 1919.आँखें खोलो भारतियों, जिसने गीत बनाया वो पहले अंग्रेजो का चाटुकार था, लेकिन jalianwala बाग काण्ड के बाद उसकी निद्रा टूटी और उसने इस सच को स्वीकार किया लेकिन तब भी अपने जीते जी वो खुलकर ये नहीं बोल पाया, कितना लज्जित रहा होगा वो उम्र भर ये सोचकर..बाद में उसने नोबेल प्राइज भी ठुकराया था..

    13. टैगोर का असली नाम क्या था ??

    Being Brahmins, their ancestors were referred to as ‘Thakurmashai’ or ‘Holy Sir’. During the British rule, this name stuck and they began to be recognised as Thakur and eventually the family name got anglicised to Tagore. The family surname of the Tagores is Banerjee (Bandopadhyay).
    Mukherjee (Bengali: মুখার্জি Mukharji), Mookerjee or Mukerji or Mukherji is a Kulin Brahmin Bengali surname, common among residents of the Indian state of West Bengal. The traditional Bengali version is মুখোপাধ্যায় Mukhopaddhae, which is sometimes written Mukhopadhyay, which is alternately spelled as Mookerjee or Mukerji.

    अंग्रेजो के इतने बड़े चाटुकार थे ये लोग की इन्होने अपने नाम भी बंधौपाध्याय से बदलकर बनर्जी और उससे भी बदलकर ठाकुर/ टैगोर हि रख लिया..
    इसी प्रकार के लोग थे मुखोपाध्याय जो बाद में मुख़र्जी बन गए जिसमे से एक तो आज देश के सबसे ऊँचे पद पर जा बैठा है.
    चटोपाध्याय chatterjee बन गए..
    गंगोपाध्याय ganguly बन गए…
    ये सभी अंग्रेजी मानसिकता में पले बढ़े लोग थे. भारत में सबसे पहले गुलामी की शुरुआत बंगाल से हि हुई थी. उसी का ये नतीजा था की यहाँ के लोगों की सोच भारत में सबसे पहले बदली गयी.

    14. Other questions ??

    Gandhi’s disapproval and all other members except Jawahar lal Nehru. Why does national anthem gets approved only after Gandhi’s death?

    what about the letter of Tagore popping up after his death?

    There are numerous evidences, parliamentary meeting briefings etc which record that there was overwhelming support for Vande Mataram song to be adopted as national anthem.

    It is unfortunate that Nehru was the only politician playing dirty politics – be it appeasing Muslims or serving his masters – the Brits – among emotional Indians.Mr Prasad must have been his chosen Lieutenant who carried over the task of declaring that Jana Gana Mana is national anthem. If Muslims did not like Vande Mataram because it is singing praise of Durga Mata (Bharat Mata seen as Durga mata) then, why did they accept Jana Gana Mana song as national anthem which is praising भारत माता (as per कांग्रेसी)?

    May be Nehru was using multiple cards and just pushing Brits order to use a song they consider to praise a Brit ..

    Also why article 348 of our constitution is so, if our mother tongue is HINDI, & our indian GOVT. has no power to change it ?
    why our entry in commonwealth realm is as dominion instead of independent REPUBLIC.
    go and check out our INDIAN INDIAN INDEPENDENCE ACT 1947 (GO & DWNLoaD PDF OF IT). division of India was not decision , it was part of ACT (PREPLANNED) and had to done in any condition, that was not independence but was just transfer of power from whites to Blacks जो दिखने में भारतीय थे लेकिन उनकी सोच समझ और सारी श्रध्दा अपने मालिको के प्रति हि थी.
    [“provision for the setting up in India of two independent Dominions” few lines from that act] why they called us dominion instead of independent republic???

    Why English queen dont need any passport & visa to visit her so called DOMINIONS. she can go to any dominion without any passport & visa????

    अब पूरी कहानी पढो

    संस्कृति -The story Behind JAN GAN MAN-Our National Anthem

    दोस्तों आपको अगर राष्ट्रगान के असली सच के बारे में पता नहीं है तो कृपया रविंद्रनाथ टैगोर जी की चिठ्ठी के साथ पूरी सच्चाई जरुर पढ़ें और अपना व्यक्तव्य भी जरुर दें…….

    सन 1911 तक भारत की राजधानी बंगाल हुआ करता था। सन 1905 में जब बंगाल विभाजन को लेकर अंग्रेजो के खिलाफ बंग-भंग आन्दोलन के विरोध में बंगाल के लोग उठ खड़े हुए तो अंग्रेजो ने अपने आपको बचाने के लिए कलकत्ता से हटाकर राजधानी को दिल्ली ले गए और 1911 में दिल्ली को राजधानी घोषित कर दिया। पूरे भारत में उस समय लोग विद्रोह से भरे हुए थे तो …अंग्रेजो ने अपने इंग्लॅण्ड के राजा को भारत आमंत्रित किया ताकि लोग शांत हो जाये। इंग्लैंड का राजा जोर्ज पंचम 1911 में भारत में आया। रविंद्रनाथ टैगोर पर दबाव बनाया गया कि तुम्हे एक गीत जोर्ज पंचम के स्वागत में लिखना ही होगा। उस समय टैगोर का परिवार अंग्रेजों के काफी नजदीक हुआ करता था, उनके परिवार के बहुत से लोग ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए काम किया करते थे, उनके बड़े भाई अवनींद्र नाथ टैगोर बहुत दिनों तक ईस्ट इंडिया कंपनी के कलकत्ता डिविजन के निदेशक (Director) रहे। उनके परिवार का बहुत पैसा ईस्ट इंडिया कंपनी में लगा हुआ था। और खुद रविन्द्र नाथ टैगोर की बहुत सहानुभूति थी अंग्रेजों के लिए।रविंद्रनाथ टैगोर ने मन से या बेमन से जो गीत लिखा उसके बोल है “जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता”। इस गीत के सारे के सारे शब्दों में अंग्रेजी राजा जोर्ज पंचम का गुणगान है, जिसका अर्थ समझने पर पता लगेगा कि ये तो हकीक़त में ही अंग्रेजो की खुशामद में लिखा गया था। इस राष्ट्रगान का अर्थ कुछ इस तरह से होता है “भारत के नागरिक, भारत की जनता अपने मन से आपको भारत का भाग्य विधाता समझती है और मानती है। हे अधिनायक (Superhero) तुम्ही भारत के भाग्य विधाता हो। तुम्हारी जय हो ! जय हो ! जय हो ! तुम्हारे भारत आने से सभी प्रान्त पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा मतलब महारास्त्र, द्रविड़ मतलब दक्षिण भारत, उत्कल मतलब उड़ीसा, बंगाल आदि और जितनी भी नदिया जैसे यमुना और गंगा ये सभी हर्षित है, खुश है, प्रसन्न है , तुम्हारा नाम लेकर ही हम जागते है और तुम्हारे नाम का आशीर्वाद चाहते है। तुम्हारी ही हम गाथा गाते है। हे भारत के भाग्य विधाता (सुपर हीरो ) तुम्हारी जय हो जय हो जय हो। ” में ये गीत गाया गया।

    जब वो इंग्लैंड चला गया तो उसने उस जन गण मन का अंग्रेजी में अनुवाद करवाया। जब अंग्रेजी अनुवाद उसने सुना तो वह बोला कि इतना सम्मान और इतनी खुशामद तो मेरी आज तक इंग्लॅण्ड में भी किसी ने नहीं की। वह बहुत खुश हुआ। उसने आदेश दिया कि जिसने भी ये गीत उसके (जोर्ज पंचम के) लिए लिखा है उसे इंग्लैंड बुलाया जाये। रविन्द्र नाथ टैगोर इंग्लैंड गए।जोर्ज पंचम उस समय नोबल पुरस्कार समिति का member भी था। उसने रविन्द्र नाथ टैगोर को नोबल पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया। तो रविन्द्र नाथ टैगोर ने इस नोबल पुरस्कार को लेने से मना कर दिया। क्यों कि गाँधी जी ने बहुत बुरी तरह से रविन्द्रनाथ टेगोर को उनके इस गीत के लिए खूब डांटा था। टैगोर ने कहा की आप मुझे नोबल पुरस्कार देना ही चाहते हैं तो मैंने एक गीतांजलि नामक रचना लिखी है उस पर मुझे दे दो लेकिन इस गीत के नाम पर मत दो और यही प्रचारित किया जाये क़ि मुझे जो नोबेल पुरस्कार दिया गया है वो गीतांजलि नामक रचना के ऊपर दिया गया है। जोर्ज पंचम मान गया और रविन्द्र नाथ टैगोर को सन 1913 में गीतांजलि नामक रचना के ऊपर नोबल पुरस्कार दिया गया।

    In November 1913, Nobel Prize was given.
    In 1915, the British Crown granted Tagore a knighthood.
    He renounced it after the 1919 Jallianwala Bagh massacre.

    रविन्द्र नाथ टैगोर की ये सहानुभूति ख़त्म हुई 1919 में जब जलिया वाला कांड हुआ और गाँधी जी ने लगभग गाली की भाषा में उनको पत्र लिखा और कहा क़ि अभी भी तुम्हारी आँखों से अंग्रेजियत का पर्दा नहीं उतरेगा तो कब उतरेगा, तुम अंग्रेजों के इतने चाटुकार कैसे हो गए, तुम इनके इतने समर्थक कैसे हो गए ? फिर गाँधी जी स्वयं रविन्द्र नाथ टैगोर से मिलने गए और बहुत जोर से डाटा कि अभी तक तुम अंग्रेजो की अंध भक्ति में डूबे हुए हो ? तब जाकर रविंद्रनाथ टैगोर की नीद खुली। इस काण्ड का टैगोर ने विरोध किया और नोबल पुरस्कार अंग्रेजी हुकूमत को लौटा दिया।

    सन 1919 से पहले जितना कुछ भी रविन्द्र नाथ टैगोर ने लिखा वो अंग्रेजी सरकार के पक्ष में था और 1919 के बाद उनके लेख कुछ कुछ अंग्रेजो के खिलाफ होने लगे थे।रविन्द्र नाथ टेगोर के बहनोई, सुरेन्द्र नाथ बनर्जी लन्दन में रहते थे और ICS ऑफिसर थे। अपने बहनोई को उन्होंने एक पत्र लिखा था (ये 1919 के बाद की घटना है) । इसमें उन्होंने लिखा है कि ये गीत ‘जन गण मन’ अंग्रेजो के द्वारा मुझ पर दबाव डलवाकर लिखवाया गया है। इसके शब्दों का अर्थ अच्छा नहीं है। इस गीत को नहीं गाया जाये तो अच्छा है।लेकिन अंत में उन्होंने लिख दिया कि इस चिठ्ठी को किसी को नहीं दिखाए क्योंकि मैं इसे सिर्फ आप तक सीमित रखना चाहता हूँ लेकिन जब कभी मेरी म्रत्यु हो जाये तो सबको बता दे।
    7 अगस्त 1941 को रबिन्द्र नाथ टैगोर की मृत्यु के बाद इस पत्र को सुरेन्द्र नाथ बनर्जी ने ये पत्र सार्वजनिक किया, और सारे देश को ये कहा क़ि ये जन गन मन गीत न गाया जाये।1907 तक कांग्रेस पार्टी थोड़ी उभर चुकी थी। लेकिन वह दो खेमो में बट गई। जिसमे एक खेमे के समर्थक बाल गंगाधर तिलक थे और दुसरे खेमे में मोती लाल नेहरु थे। मतभेद था सरकार बनाने को लेकर। मोती लाल नेहरु चाहते थे कि स्वतंत्र भारत की सरकार अंग्रेजो के साथ कोई संयोजक सरकार (Coalition Government) बने। जबकि गंगाधर तिलक कहते थे कि अंग्रेजो के साथ मिलकर सरकार बनाना तो भारत के लोगों को धोखा देना है। इस मतभेद के कारण लोकमान्य तिलक कांग्रेस से निकल गए और उन्होंने गरम दल बनाया। कोंग्रेस के दो हिस्से हो गए। एक नरम दल और एक गरम दल। गरम दल के नेता थे लोकमान्य तिलक जैसे क्रन्तिकारी। वे हर जगह वन्दे मातरम गाया करते थे और नरम दल के नेता थे मोती लाल नेहरु। लेकिन नरम दल वाले ज्यादातर अंग्रेजो के साथ रहते थे।

    नरम दल वाले अंग्रेजों के समर्थक थे और अंग्रेजों को ये गीत पसंद नहीं था तो अंग्रेजों के कहने पर नरम दल वालों ने उस समय एक हवा उड़ा दी कि मुसलमानों को वन्दे मातरम नहीं गाना चाहिए क्यों कि इसमें बुतपरस्ती (मूर्ति पूजा) है। और आप जानते है कि मुसलमान मूर्ति पूजा के कट्टर विरोधी है। उस समय मुस्लिम लीग भी बन गई थी जिसके प्रमुख मोहम्मद अली जिन्ना थे। उन्होंने भी इसका विरोध करना शुरू कर दिया क्योंकि जिन्ना भी देखने भर को (उस समय तक) भारतीय थे मन,कर्म और वचन से अंग्रेज ही थे उन्होंने भी अंग्रेजों के इशारे पर ये कहना शुरू किया और मुसलमानों को वन्दे मातरम गाने से मना कर दिया।जब भारत सन 1947 में स्वतंत्र हो गया तो जवाहर लाल नेहरु ने इसमें राजनीति कर डाली। संविधान सभा की बहस चली। संविधान सभा के 319 में से 318 सांसद ऐसे थे जिन्होंने बंकिम बाबु द्वारा लिखित वन्देमातरम को राष्ट्र गान स्वीकार करने पर सहमति जताई। बस एक सांसद ने इस प्रस्ताव को नहीं माना। और उस एक सांसद का नाम था पंडित जवाहर लाल नेहरु। उनका तर्क था कि वन्दे मातरम गीत से मुसलमानों के दिल को चोट पहुचती है इसलिए इसे नहीं गाना चाहिए (दरअसल इस गीत से मुसलमानों को नहीं अंग्रेजों के दिल को चोट पहुंचती थी)। अब इस झगडे का फैसला कौन करे, तो वे पहुचे गाँधी जी के पास। गाँधी जी ने कहा कि जन गन मन के पक्ष में तो मैं भी नहीं हूँ और तुम (नेहरु ) वन्देमातरम के पक्ष में नहीं हो तो कोई तीसरा गीत तैयार किया जाये। तो महात्मा गाँधी ने तीसरा विकल्प झंडा गान के रूप में दिया

    “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊँचा रहे हमारा”। लेकिन नेहरु जी उस पर भी तैयार नहीं हुए। नेहरु जी का तर्क था कि झंडा गान ओर्केस्ट्रा पर नहीं बज सकता और जन गन मन ओर्केस्ट्रा पर बज सकता है।
    उस समय बात नहीं बनी तो नेहरु जी ने इस मुद्दे को गाँधी जी की मृत्यु तक टाले रखा और उनकी मृत्यु के बाद नेहरु जी ने जन गण मन को राष्ट्र गान घोषित कर दिया और जबरदस्ती भारतीयों पर इसे थोप दिया गया जबकि इसके जो बोल है उनका अर्थ कुछ और ही कहानी प्रस्तुत करते है, और दूसरा पक्ष नाराज न हो इसलिए वन्दे मातरम को राष्ट्रगीत बना दिया गया लेकिन कभी गया नहीं गया। नेहरु जी कोई ऐसा काम नहीं करना चाहते थे जिससे कि अंग्रेजों के दिल को चोट पहुंचे, मुसलमानों के वो इतने हिमायती कैसे हो सकते थे जिस आदमी ने पाकिस्तान बनवा दिया जब कि इस देश के मुसलमान पाकिस्तान नहीं चाहते थे,

    जन गण मन को इस लिए तरजीह दी गयी क्योंकि वो अंग्रेजों की भक्ति में गाया गया गीत था और वन्देमातरम इसलिए पीछे रह गया क्योंकि इस गीत से अंगेजों को दर्द होता था।

    http://expressindia.indianexpress.com/news/fullstory.php?newsid=17890 बीबीसी ने एक सर्वे किया था। उसने पूरे संसार में जितने भी भारत के लोग रहते थे, उनसे पुछा कि आपको दोनों में से कौन सा गीत ज्यादा पसंद है तो 99 % लोगों ने कहा वन्देमातरम। बीबीसी के इस सर्वे से एक बात और साफ़ हुई कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय गीतों में दुसरे नंबर पर वन्देमातरम है। कई देश है जिनके लोगों को इसके बोल समझ में नहीं आते है लेकिन वो कहते है कि इसमें जो लय है उससे एक जज्बा पैदा होता है।

    रविन्द्र नाथ टैगोर द्वारा लिखित उनका हस्ताक्षरित …. इंग्लिश में अनुवादित

     तो ये इतिहास है वन्दे मातरम का और जन गण मन का। अब ये आप को तय करना है कि आपको क्या गाना है ?
    ॥ राष्ट्रगीत ‘ वंदे मातरम् ‘ के स्थान पर टागोर रचित जन गण मन क्यू बना ? ॥

    ******* केंद्र सरकार प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित Indian Broadcasting पुस्तक अनुसार ———-

    स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात राज्य संविधान का निर्माण नहीं हुआ था , उस समय जवाहर ने एक All India आकाशवाणी पर अंगत / निजी पत्र लिखा कि जब जब आवश्यकता हो तो राष्ट्रगीत ‘जन गण मन ‘ ही रेडियो पर प्रसारित करे । आकाशवाणी ने पाखंडी जवाहर कि सूचना का पालन करते हुए जन गण मन प्रसारित किया ।

    उल्लेखनीय है कि राष्ट्रगीत विषयक कोई निर्णय नहीं हुआ था –मान्यता भी नहीं मिली थी । मात्र स्वमुखी जवाहर के आदेश से बजाया जा रहा था ।

    जन गण मन को स्वरबद्ध करने के लिए BBC ने तीन विदेशी संगीतकारो को यह कान दिया , तीन प्रकार कि धुन बनी , जवाहर को एक धुन रुचिकर लगी एवं स्वीकृति भी दी ।

    ……………. Herbed Mirrill नामक एक ब्रिटिश संगीतकार कि यह धुन है , ब्रिटिश संगीतकार को जवाहर ने अन्य साथियों को विश्वास मे लिए बिना आभार पत्र एवं 500 पाउंड का पुरस्कार दिया । जो कि वंदे मातरम् के समर्थक समग्र प्रजा , सांसद , क्रांतिवीर आदि भी थे एवं यह गीत कि धुन लोकहृदय पर छाई हुई थी तथापि अङ्ग्रेज़ी संस्कृति से प्रभावित जवाहर ने बलपूर्वक जन गण मन हम पर ठोंक दिया ।

    सर्वप्रथम जवाहर के ;’प्रियमित्र ‘ जिनहा को दुर्गा एवं मंदिर पर आपत्ति थी किन्तु वह तो पाकिस्तान चला गया था , जवाहर कि हिन्दू विरुद्ध मानसिकता उसके मृत्यु पर्यंत चलती रही ।

    [][][] आज हमे अर्थहीन , विदेशी धुन आधारित राष्ट्रगीत बलपूर्वक गाना पड़ता है । जवाहर के आने से देश कि दुर्दशा का प्रारम्भ हुआ उत्तरोत्तर उसके वंशजो ने भी दुर्दशा चालू राखी 2014 मे अंत हुआ ।

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