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भारत में इतने त्यौहार क्यों होते हैं ?

कभी सोचा ?

आज इस प्रश्न का उत्तर मिला मुझे ।

मान लीजिए की आपके घर परिवार में कोई झगड़ा हो गया और उसके बाद घर में कोई त्यौहार आया तो क्या होता है त्यौहार पर । लोग किसी न किसी तरीके से बातचीत शुरू कर ही देते हैं । मनमुटाव निकल जाते हैं । फिर से मीटर चालू । अब मानव की प्रकति ही ऐसी है की झगड़ा हो ही जाता है किसी न किसी बात पर । लेकिन यह त्यौहार जो लगभग हर दूसरे तीसरे महीने आते हैं न यह सब हम सबको करीब लाने का माध्यम है ।

भारत की परिवार की नीव है ये त्योहार।

सोचिये की कोई त्यौहार नही 1 वर्ष तक तो क्या होगा ?

क्या आप किसी भी बहाने से समय निकालकर कहीं परिवार में रिश्तेदारी में जा पाओगे ? नही न

लेकिन अगर त्यौहार है

कुछ मान्यता बना दी गयी है

तो आप उसे निभाने के लिए मजबूरी में या प्रसन्नता से उस कार्य को करते ही हो और परिवार में सबके मध्य पहुंचकर शांति व् प्रेम का अनुभव करते हो । बस यही है मूल । इसी अनुभव को करवाने के लिए यह त्योहार बनाये गए । थोड़े थोड़े दिनों के अंतर पर ताकि लोग मिलते जुलते रहें और आपस में प्रेम बना रहे ।

यही है भारत के त्योहारों की वैज्ञानिकता ।

भारत के परिवार को बचाने का व्यवस्था ।

जब आप घर में चौकी जागरण भंडारा इत्यादि करते हो तब भी यही सब उदेशय होता है ।

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