भारतीय संस्कृति में एकादशी के उपवास की वैज्ञानिकता

भारतीय संस्कृति में एकादशी के उपवास की वैज्ञानिकता

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भारतीय संस्कृति में एकादशी के उपवास की वैज्ञानिकता

आप यह जानकर आश्चर्यचकित अवश्य होंगे की भारतीय संस्कृति इतनी विकसित थी और है की उपवास का दिन भी वह चुना जब चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण से पृथ्वी तक का पानी ऊपर उछलता है (ज्वार भाटा) तब मनुष्य के शरीर के रस भी उसी वजह से ऊपर उठते हैं। ऐसे में अगर शरीर को विश्राम दिया जाये जैसा हम प्रति सप्ताह अपने शरीर को 1 छुट्टी से देते हैं तो शरीर अंदर से स्वच्छ भी होता है और रोगमुक्त रहता है । नतीजा आयु में कटौती नही होती ।

एकादशी से पूर्णिमा तक या अमावस्या तक हिन्दू सनातन धर्म में उपवास के अनेको उदाहरण आपको मिल जाएंगे ।

प्रति सप्ताह भी एक दिवस उपवास से शरीर रोगमुक्त रहता है ।

ज्यादा भोजन ही ज्यादा रोगों का मूल कारण है । कम खाएं अच्छा खाएं और सही तरीके से खाएं ।

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