भारतीय वैज्ञानिको की हत्या पर RTI

भारतीय वैज्ञानिको की हत्या पर RTI

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RTI TO DEPARTMENT OF ATOMIC ENGERY, GOVT OF INDIA….    
                                                                        विदेशी ताकतों के द्वारा भारतीय परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या।
पिछलें 5 सालों में 11 बङे वैज्ञानिकों की हत्या सामान्य है  या फिर ये भारत के खिलाफ एक बङा षड्यंत्र है????
पिछले 5 सालों में 10 से ज्यादा
न्यूक्लियर साइंटिस्ट और इंजीनियर्स की अप्राकृतिक रूप से मौत (या मर्डर) हो चुकी है ।
इनमे से ज्यादातर वैज्ञानिक टॉप एलीट प्रोजेक्ट्स के सीनियर ऑफिसर्स थे ।

MY RTI TO DEPARTMENT OF ATOMIC ENGERY, GOVT OF INDIA….
During the last 5 years 11 Indian Nuclear Scientists have committed Suicide or in few cases died/murdered in accident…
(At present I have the record of only 11 Scientists.This figure may be more than 11)
Most of them have committed Suicide by Hanging…
What a Coincidence???? Suicide by Hanging????
Is it just a Suicide or a Conspiracy to Kill Indian Nuclear Scientists so that India can India can not go ahead with its Nuclear Programmes…
The western Bloc particularly USA have always forced India to Stop its Nuclear Programmes…
USA has always forced India to sign discriminatory Treaties like CTBT to Stop its Nuclear Programmes…
लेकिन भारत अमेरिका के सामने नहीं झुका।
जब जब भारत ने अपने परमाणु परिक्षण किये, तब तब अमेरिका ने भारत पर काफी प्रतिबंध लगाए।
अमेरिका भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश बनने से तो रोक नहीं पाया।
लेकिन ये विदेशी ताकतें अब भारत को परमाणु शक्ति के क्षेत्र में और ज्यादा आगे बढने नहीं देना चाहती।
इसीलिए एक एक करके भारतीय वैज्ञानिकों की हत्या विदेशी ताकतों के द्वारा करवाई जा रही है और इसे आत्महत्या का नाम दिया जा रहा है।
क्योंकी विदेशी ताकतों को पता चल गया है कि वे भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाकर तो भारत के परमाणु कार्यकर्मों को तो रोक नहीं सकते।
वैज्ञानिक ही किसी देश के विकास की रीढ की हड्डी होते है।
अगर इस देश में वैज्ञानिक ही सुरक्षित नहीं है तो देश के भविष्य का क्या होगा।
भारत सरकार भी अब तक इस मामले में खामोश है।

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Mysterious deaths of India’s
Nuclear Scientists…
केवल 5 सालों में 11 बड़े वैज्ञानिकों की हत्या सामान्य है या फिर ये भारत के खिलाफ एक बड़ा षड़यंत्र है?
इस सवाल का जवाब तभी दिया जा सकता है जब इन मामलों को सरकार
और लोकल एजेंसीज गंभीरता से ले,और इसे ‘देश की सुरक्षा’ से जुड़े मामलों की परिधि में रख कर तफ्तीश करे।

केवल भारत में ही नहीं ईरान जो फिलहाल कई अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों को झेल रहा है, के कई न्यूक्लीयर वैज्ञानिकों की भी ऐसी हत्याएं की जा रही है ?
ख़ुफ़िया रिपोर्टों के मुताबिक़ ऑपरेशन Smiling Buddha के बाद से पश्चिमी खुफिया एजेंसियों ने भारत के न्यूक्लियर प्रोग्राम में काफी रूचि दिखाई है।

अक्टूबर 2013 को विशाखापट्टनम नेवल यार्ड के समीप के रेलवे ट्रैक में कुछ लोगों को दो लाशें दिखाई दी । शिनाख्त में पता चला की ये बॉडी के.के.जोशी(33 वर्ष) और अभीष शिवम(34 वर्ष) की है,जो पहली स्वदेशी परमाणु सबमरीन INS-अरिहंत के प्रोजेक्ट्स में चीफ इंजीनियरके रूप में कार्यरत थे ।

प्रारंभिक जांच में पुलिस ने पाया की इनकी मौत हाई इंटेंसिटी पॉइसन(Poison) के कारण हुई थी, और इसे रेलवे दुर्घटना से जोड़ने के उद्देश्य से रेल की पटरियों में फेंक दिया गया था,
डेढ साल बाद भी ये मर्डर मिस्त्री अनसुलझी है ।                                                                                                                                                          RTI Activist Rahul Sehrawat(9068712361)

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