भाई राजीव दीक्षित जी के सन्दर्भ में 16 Sep की बैठक की...

भाई राजीव दीक्षित जी के सन्दर्भ में 16 Sep की बैठक की कार्यवाही

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आप सभी को सादर प्रणाम,
विषय:- भाई राजीव दीक्षित जी के संदर्भ में 16 Sep 2012 की बैठक की कार्यवाही
1.       इस बैठक की शुरूआत गायत्री मंत्र से ईश्वर को याद करते हुए की गई.
2.       सभी का परिचय हुआ, ज्यादातर लोग वेबसाइट डेवेलोपमेंट, चार्टर एकाउंटेंट, शिक्षा उद्योग से जुड़े थे. आप सभी का इस बैठक में आने पर आभार.
3.       फिर नवनीत भाई ने बैठक का उद्देश्य बताया और निम्न बातें कही :-
a.     नवनीत भाई ने किस तरह से राजीव भाई के व्याख्यानों को सुना, उसके बाद कुछ दोस्तों को सुनाया और एक समूह बनाया. कुछ बैठकों का दौर चला और ये निष्कर्ष निकला की हमे किसी नए समूह को जन्म न देकर, किसी पहले से मौजूद समूह (जिसकी पहचान हो), उससे जुड़े और काम करे. इस संदर्भ में उन्होंने इंडिया अगेन्सट करप्शन , भारत स्वाभिमान को कुछ ईमेल भेजे, खुद इंडिया अगेन्सट करप्शन के दफ्तर भी गए (मुफ्त २ साल तक सेवा करने का आग्रह किया) लेकिन कुछ हासिल न हुआ. २५ जुलाई के अन्ना जी के अनशन से पहले अपने समूह में फैसला लिया की इन सब धरने प्रदर्शन से देश के लुटेरों को फर्क नहीं पड़ने वाला, इसीलिए देश के लिए चुनाव लड़कर संसद में जाना होगा. ४ दिन पश्चात यही बात अन्ना जी ने जब मंच से बोली तब बहुत खुशी हुई और लगा की हम लोग सही राह पर हैं. इसके बाद फेसबुक पर समूह बनाया, पेज भी बनाया और राजीव दीक्षित जी की तस्वीर लगाने वालो को दोस्ती की रिक्वेस्ट (अर्जी) भेजना शुरू किया (राजीव भाई की फोटो प्रोफाइल में होना या नाम में होने से लोगों से जुड़ने का काम आसान हो जाता है). सभी ने मंज़ूर किया और ६०० से ज्यादा दोस्त बन गए. अब हमे फिर से लगा की ये जो समूह है, ये सब राजीव भाई के पहले से फैन हैं, इसीलिए इन सबके साथ अगर बैठक की जाए तो कुछ न कुछ ज़रुर हासिल होगा और हमको अपनी आवाज़ सब लोगों तक पहुँचाने में मदद मिलेगी. इसी वजह से आप सभी जन इस बैठक में आए.
b.      आशीष भाई ने वीरेंदर भाई जी को भी न्यौता दिया और वो प्रदीप दीक्षित (श्री राजीव दीक्षित जी के भाई) को साथ लेकर इस बैठक में पहुंचे.
c.       नवनीत भाई ने बताया की अगर हम सब चाहे तो इस देश की सत्ता को बहुत जल्द बदल सकते है, देश में ७ लाख के करीब गांव हैं, अगर हर गांव में १० लोग राजीव भाई (२००० लोगों का भी गांव हुआ तो १४० करोड लोग), के व्याख्यानों को सुनवाना शुरू करे, बैठके करे, देश की जनता को जागरूक करे, तो ये काम चंद महीनों में किया जा सकता है. लेकिन पहला सवाल है ऐसे ७० लाख लोगों का होना जो इस काम को आगे करे. (इस पर बाद में प्रदीप भाई ने कहा था की देश में २ करोड़ लोग राजीव भाई को जानते हैं , उनको मानते हैं और उनके लिए काम करना चाहते है, जरुरत है तो उन सबकी पहचान करने की, इसका जवाब इसी मेल के आखिर में मैं दूँगा ). सब लोग अपने अपने क्षेत्र के अच्छे  बुरे लोगों को जानते हैं, वो लोग जब जागरूक होंगे तब वे इस पोलिटिक्स में अपने  के अच्छे लोगों को उतारेंगे और चुनाव जितवाने में अहम भूमिका निभाएंगे. (दिल्ली चुनाव से हम इस काम की शुरूआत कर सकते हैं (नवंबर २०१३ में)). जरुरत है तो विश्वास की, जनता को अपनी ताकत पहचाननी ही होगी. जिस तरह हनुमान जी अपनी शक्तियाँ भूले बैठे थे उसी तरह हम सब जनता अपनी शक्ति को भूले बैठे हैं. जागो और देखो की जब हम सब खड़े होंगे तो क्या नहीं कर सकते. रोज रोज खुट खुट कर मरना बंद करो.
d.      अभी के लिए हर आदमी जो काम कर सकता है वो है :-
                                                               i.      cd ऑडियो/ वीडियो बाँटना (सेवा भाव से , या सिर्फ कीमत पर जैसा आपको सही लगे). उद्देश्य हर घर में ये व्याख्यान पहुंचे. जागरूकता बड़े.
                                                             ii.      पुस्तकें पढ़ें (हिंद स्वराज महात्मा गाँधी जी की, स्वराज केजरीवाल जी की, स्वामी विवेकानंद जी की).
                                                            iii.      बैठके करे, विचार विमर्श करे व्याख्यानों पर, और अपना सबका ज्ञान बढ़ाए और जागरूक बने.
                                                           iv.      स्वदेशी का सामान ख़रीदे जिससे भारत का पैसा भारत में ही रहे, भारत के उद्योगों को बढ़ावा मिले, रोज़गार के अवसर पैदा हो, गुणवत्ता बड़े और सारा देश आगे बढे. जब अमेरिका बी अमेरिकन, बाय अमेरिकन कानून बनाता है (अमेरिकी बनो, अमेरिकी खरीदो) तो उसका भी ये ही मकसद है.
                                                             v.      स्वदेसी के स्टोर खोले, शून्य तकनीकी वाले काम शुरू करे, ताकि देश के लोगों को हम स्वदेसी का सामान मुहैया करा सके. ऑनलाइन स्टोर खोले.
                                                           vi.      मुफ्त ऑडियो/ वीडियो बनाने के लिए लोगों से चंदा ले.
                                                          vii.      ब्लॉग पर जाए (www.bharathindustan.blogspot.in) इस ब्लॉग पर  प्रतिदिन जाएँ, इससे हमें गूगल विज्ञापनों से कमाई होगी जिसको हम ऑडियो वीडियो बनाने में इस्तेमाल करेंगे. (२ फायदे, विदेशी मुद्रा भारत में आएगी, मुफ्त ऑडियो बनायेंगे उस पैसे से और ग़रीबों में बाटेंगे).
                                                        viii.      कितने ही छोटे छोटे समूह बने हुए हैं, उन सभी को जोड़ने का काम करना क्योंकि सबका मकसद वो ही है जो हमारे राजीव भाई जी का था, देश में संपूर्ण स्वराज लाना. हम सबको वो गोंद (फेविकोल) बनना है, जो इन सभी समूहों को जोड़े. हिंदू, मुसलमान, सिख, इसाई सभी को जोडे, ये ऑडियो व्याख्यान सुना कर. (प्रदीप जी ने बताया की भारत स्वाभिमान राजीव भाई के समय से है,  स्वदेशी भारत पीथम ट्रस्ट बनाया गया ताकि जो काम भारत स्वाभिमान में लंबित हो रहे हैं, उन सभी कामों को सुचारु रूप से किया जा सके.) 
                                                           ix.      व्यवस्था का संपूर्ण परिवर्तन करना है. बीमारी की जड़ को उखड फेंकना है ताकि वो किसी फसल का नुक्सान न कर सके.
                                                             x.      मीडिया और पुलिस से मिलकर उनको समझना और समझाना. अभी हमें आपस में लड़वाया जा रहा है.
                                                           xi.      एकता से हम सब मजबूत होंगे, अलग रहकर हम फिर से ग़ुलाम बन जायेंगे. इस बात को समझो और भाई चारा बढ़ाए.
4.       विनय जी जिन्होंने १० वर्ष से अधिक राजीव दीक्षित भाई के साथ काम किया है, भारत का भ्रमण किया है, उन्होंने बताया की कैसे राजीव भाई सारे देश मैं घुमे और ५ लोगों को तैयार करके पूरे गांव को जागरूक करने का कार्य किया. उन्होंने बताया की हम सबको सभी संगठनों से जुड़ कर देश के लिए काम करना है, कम्पीटीशन नहीं करना. सबके अपने अपने मुद्दे हैं, सभी की इज़्ज़त करनी है. राजीव भाई ने तो सभी विषयों पर व्याख्यान दे दिया. वैट और FDI  के लिए जागरूक करने के लिए व्यापारियों को बताना और सरकार पर दबाव बनाना.
5.       एक वरिष्ठ ओहदे पर मौजूद संजीव गुप्ता जी ने सब में जोश भरा और तीन चीज़ों का सबसे तुरंत पालन करने का आग्रह किया :-
a.       हिंदी में हस्ताक्षर करना. बैंकों में हस्ताक्षर तुरंत प्रभाव से बदल देना.
b.      हिंदी भाषा में ATM मशीन का उपयोग करना.
c.       मुछें रखना.
इन सभी बातों के पीछे उनका तर्क था की अगर हम हिंदी का इस्तेमाल नहीं करेंगे तो ये लुप्त हो जायेगी, हटा ली जायेगी. जैसे जिस चीज़ की मांग ही न हो, उसको बाजार से हटा लिया जाता है उसी प्रकार से. मूछों के पीछे था उनका स्वाभिमान. भाषा भेष और भोजन का महत्व बताया, यहाँ आने वाले सभी लोग क्रन्तिकारी है और क्रांति का तेल का काम करेंगें राजीव भाई के व्याख्यान. अपने मजाकिया और बुलंद अंदाज़ में उन्होंने सबको कई बातें बता कर प्रेरित किया और कहा की ये बैठक ३० लोगों की नहीं ६०० लोगों की है. समझदार वो हैं जो यहाँ आयें है अपने लिए अपने देश के लिए. आप सब जाग चुके है, औरों को जगाए और इस आन्दोलन को वो ताकत दे जिससे हमे स्वराज पाने में अधिक देर न लगे. उनकी प्रेरणा का स्तोत्र वीरेंदर भाई जी है, उन्होंने CD बांटने के तरीके भी बताए. (कार में कापियाँ रखें और लोगों को बांटे, दीवाली पर गिफ्ट में मिठाई के साथ दे, और लोगों से आग्रह करे की वे उसको सुने, समय समय पर उनको पूछे सुनी या नहीं). उन्होंने ऑडियो बाँटने की सराहना भी की और साथ ही कहा की ये सब एक ही छत के नीचे हो तो इसकी जो विश्वास पात्रता है वो बनी रहती है. अच्छे काम सबके साथ मिलकर करो, बुरे काम नहीं. (शराब पीते हुए सबको बुलाते हो, दूध पीते हुए अकेले अकेले). एक बड़ा ही अच्छा मैसेज उन्होंने पढ़ कर सुनाया.

आज़ादी के बाद हम सब काम उलटे किये जा रहे हैं और हम कहते हैं की हम सभ्य होते जा रहे हैं.

राम सीता का स्वयंवर देख कर बड़े हुए हम लोग, अपने बच्चों को रखी सावंत का स्वयंवर दिखा रहे है, और हम कहते हैं की हम सभ्य होते जा रहे हैं.
शुभ लाभ था जीवन पद्धति जिनकी, वो सिर्फ लाभ के लिए किसी भी हद तक गिरते जा रहे हैं, और हम कहते हैं की हम सभ्य होते जा रहे हैं.
खाने में मख्खी पड़ जाने पर त्याग देते थे उस भोजन को, आज मांसाहार को शान से थाली में सज़ाएँ जा रहे हैं और हम कहते हैं की हम सभ्य होते जा रहे हैं.
पत्नी और बेटी को घर की इज़्ज़त मानने वाले लोग, अपने घर की इज़्ज़त को खुद ही बे पर्दा करते जा रहे हैं, और हम कहते हैं की हम सभ्य होते जा रहे हैं.
रात होते ही खौलता था दूध जिन घरों में, उन घरों में जाम से जाम टकराए जा रहे हैं, और हम कहते हैं की हम सभ्य होते जा रहे हैं.
थे वो देश के दुश्मन, चाहे लॉर्ड कर्जन या डलहौज़ी, उनके नामो के आगे के लॉर्ड हम अपने भगवानो के नाम के आगे लगाए जा रहे हैं, और हम कहते हैं की हम सभ्य होते जा रहे हैं.
माँ बाप थे सम्पत्ति जिसकी, उस देश का है ये हाल, सम्पत्ति के लिए माँ बाप को छोड़ते जा रहे हैं, और हम कहते हैं की हम सभ्य होते जा रहे हैं.
स्वयं की पहचान करो.
6.       वीरेंदर जी ने राजीव भाई, प्रदीप भाई और संजीव भाई को अपनी प्रेरणा का स्तोत्र बताया और सबको वर्धा सेवाग्राम आने के लिए प्रेरित और आमंत्रित भी किया.
7.       फिर सभी के प्यारे राजीव जी के भाई प्रदीप दीक्षित ने लोगों से बातें की और अपना दिल खोलकर सबके सामने रखा:-
a.       उन्होंने कहा की हम सब एक ही राह के सिपाही हैं. आशीष भाई के मन में जो करूणा है दर्द है वो ही मूल है.
b.      राजीव भाई के द्वारा जो आग इस देश में जली है उसको जलाए रखना है. अब हम सबकी ज्यादा ज़िम्मेदारी है क्योंकि अब राजीव भाई हमारे बीच नहीं है.
c.       राजीव भाई की मृत्यु के सवाल पर उन्होंने कहा की विवादास्पद बातों को न करके अगर हम उनके विचारों को घर घर पहुँचा दे और उनके उद्देश्य को हासिल करे तो अच्छा होगा.
d.      उन्होंने कहा की उनके व्याख्यान हर घर में पहुँचाए कम से कम लगत पर और किसी भी तरह से, किसी पर कोई बंधन नहीं है. ये कामर्सिअल नहीं है, इसको सेवा के रूप में अपनाए. आपसे जितना बने आप इसको करे लेकिन सिर्फ सेवा भाव से करे. १०००-२००० या ५००० जितना आप कर सके और इसको घर घर में पहुँचाए. अच्छे काम में पूछने की जरुरत नहीं है, बुरे काम में है. जो देश हित की लड़ाई में शामिल है उन सभी को ये व्याख्यान पहुँचाए.
e.      सत्ता अपने आपको बदलने नहीं देगी, वो किसी भी हद तक जा सकते हैं. हमको इसके लिए तैयार रहना होगा. आपने पिछले दिनों देखा की सत्ता ने क्या क्या किया.
f.        राजीव भाई कहते थे, की हम सब १८५७ की क्रांति के लोगों की आत्मा हैं. हम सब यहाँ बैठे हैं ये सब शायद भगवान की मर्ज़ी है. हम सबकी वेवलेंथ मिलती है. हम सबकी एक ही विचारधारा है.
g.       हम अपना घर भरने के लिए नहीं लड़ रहे, हम इसलिए लड़ रहे है क्योंकि हमारे देश की दुर्गति हो रही है. हम ऐसी बढ़ी हुई GDP का क्या करें जिससे देश में भाईचारा न बढे,  ८० टका लोगों को रोज़गार न मिले या ६५ टका लोगों गरीबी रेखा के नीचे रहे. गाँधी जी ने आज की अर्थव्यवस्था को शैतानी अर्थव्यवस्था बताया है, मनुष्य में दया, प्रेम, भाईचारा कम हो रहा है. हिंदुस्तान पाकिस्तान की लड़ाई ४० साल से चल रही हैं. दुनिया भर में ६० जगह अभी भी युद्ध चल ही रहा है, वार इकोनामी चल ही रही है. हम सबको सुख और शांति चाहिए, इसलिए हम सबको स्वदेशी चाहिए. स्वदेशी से भाईचारा स्थापित होगा. हम लोग अपने पड़ोसी मुल्कों से दोस्ती नहीं कर पा रहे हैं, आखिर हम जाना कहाँ चाह रहे हैं. ऐसा ही चलता रहा तो दुनिया नष्ट है. विएतनाम का युद्ध बंद हुआ जब ३-४ लड़कियाँ दुनिया से अपने आपको बचाने की गुहार कर रही थी, और उस फोटो को अखबार में छापा. मतलब करुणा से ही युद्ध बंद हुआ. किसी और तरह से नहीं. अफग़ानिस्तान को ही देख लीजिए, कंधे पर बन्दुक है लेकिन खाने को रोटी और पहनने को कपड़े नहीं हैं.
h.      कोई भी सरकार ये गारंटी लेने को तैयार नहीं है की अगले २० सालों में हम सबको रोज़गार देंगे. किसके लिए चल रही हैं सरकारें, MNC के लिए ? सड़कें बनाई मोटरगाड़ी के लिए, वो अलग बात है की ये हमारे काम भी आ रही है. हम ये नहीं मानते की कोई एक पार्टी आज के लिए दोषी है. सभी राजनीतिक दल मिले हुए हैं. क्योंकि पंच वर्षीया योजनाए  इन सबकी सहमति से ही बनती आई हैं.
i.         हमे ये करना है तो करना है. लालच में नहीं आना. सत्ता आपको तोड़ने की कोशिश करेगी. एक नयी राजनितिक चेतना का उदय होना चाहिए, लेकिन वो पक्के होने चाहिए , दृढनिश्चयी. हमारी लड़ाई हमारे लिए हैं. किसी को दिखाने के लिए नहीं. ये हमारी अंतरात्मा की आवाज़ है जो आज हम सब यहाँ है.

j.        भावनाओं पर काबू रखना है. कड़क बनना है. पैसा तो बाद में आयेगा, पहले तो भावनाये आपको भावुक कर देंगी. भगत सिंह जी २२-२५ साल की उम्र में फांसी पर चड गए, अपनी माँ को डपटा और कहा की मैं फांसी चड जाऊंगा लेकिन माफ़ी नहीं मांगूगा क्योंकि मैंने कुछ गलत नहीं कहा. ऐसा मजबूत प्रण था उनका. ऐसा बनाये अपने आपको.

k.       जिसको भी समय नहीं मिलता, वो समझे की घर बार सब कुछ है लेकिन ये सब भी है. ये भी उतना ही जरुरी है जितना आपका घर. जिस दिन आप थोडा सा भी त्याग कर लोगे तब आप लोहे जैसे मजबूत हो जाओगे.  राम जी ने भी राजपाट का त्याग किया और मजबूती से वचन का पालन किया. ईमानदारी से आगे बढ़ें.
l.         २०१४ में अगर कुछ करना है तो करना है. ईमानदारी से ही करना है. हिंदुस्तान तब हारता है जब वो गिरता है. इस बार हमें वो गलती नहीं दोहरानी. अपने चरित्र को अपने विचार को पक्का करो.
m.    राजीव भाई जो कर नहीं पाए, उसमे से एक बात ये है, की हम ५०० बच्चों का चुनाव करेंगे और उनको तैयार करेंगे. उनसे उनके पैसे की कमिटमेंट ले लेंगे संगठन की तरफ से. बेचलर लोग ही इस काम को ज्यादा अच्छे से कर पायेंगे. उनको ५ साल तक रगड़ें. हमारे पास इंटेलेक्ट की कमी नहीं है, हमें उन्हें ढूँढना है और आगे लाना है.
n.      नया देश, नयी भाषा, नया नेतृत्व चाहिए. काफी मेहनत है.
o.      पहला पायदान व्याख्यानों को बाटना ही है. इस रामबाण का इस्तेमाल करे. टारगेट बनाकर बांटों. चैन की तरह बांटों. आपने १०० बांटी, उसमे से १०% लोग फिर से १००-१०० बांटे.
p.      इसको मैपिंग करे, मैनेजमेंट के साथी मदद करे.
q.      सभी से संपर्क करे. सभी लोगों का लाइव स्टॉक तैयार करे. समान विचारधारा वाले लोगों को इकठ्ठा करना है. कम से कम २ करोड लोग राजीव भाई से सीधे जुड़े हैं. आप सिर्फ व्याख्यान बांटे, और इन लोगों को इकठ्ठा कर दो, फिर देखो सब कुछ होगा. सब सुनेंगे आपकी.
r.        राकेश शर्मा जी ने कहा शिक्षा पर वो सिस्टम बदलने का काम कर रहे हैं, स्वास्थ्य पर, राजनीती पर, मानीटरिंग जरुरी है जो भी काम हम कर रहे हैं उसको मानिटर करना जरुरी है.
s.       संजीव जी ने GDP के मुद्दे पर बात कही. CA की उन्होंने काफी तारीफ की और कहा की ये लोग इतनी मेहनत करते हैं की इनको देखकर दया और प्रेम आता है.  
t.        नेस्ले ने बेबी फ़ूड में कांच मिक्स किया था सिर्फ उसको क्रिस्पी बनाने के लिए, अंकल चिप्स, या lays के अंदर E३६१ का मसाला है. ये सूअर की चर्बी से बना है. गूगल करे. जितने भी E नंबर के फ़ूड प्रोडक्ट हैं इनको देखो, पढ़ो और पता करो की क्या वेजेटेरियन हैं क्या नान वेज. चाकलेट, नमक, देखो पहले. KFC के पीछे लोग पागल हैं, जबकि सब जानते हैं की डीप फरीज वाली चीजों से ही कैंसर हो रहा है. ये लोगों ताजा कुछ नहीं काटते, २-३ महीने पुराना सामान काटकर खिलाते हैं.
u.      भाईचारा बढ़ाने का तरीका और भी है, आप सब अपना काम धंधा बताओ और हम सब एक दूसरे से काम लेंगे और सबका धंधा बढ़ेगा. जैसे मैं आपको मिठाई में १५% का डिस्काउंट दिलवा दूँगा, CA लोग से हम अपना काम करवा लेंगे, वेबसाइट वाले, पुस्तक प्रकाशन वाले, आपस में ही काम देने से भाईचारा और प्रेम भी बढ़ेगा. संजीव भाई १००० आदमी दिल्ली से वर्धा लेकर जायेंगे ३० नवंबर को.

कृपया आप सभी इस बैठक में हुई सारी बातचीत पर अपनी राय हमें भेजे. मैं अपनी तरफ से जो समझता हूँ उस विचार को आप सभी को ईमेल से भेज रहा हूँ. कृपया ब्लॉग पर दिया हुआ सुर्वे भरे और अपना नाम और डिटेल हमें मुहैया कराये. जय हिंद जय भारत.

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|| वंदे मातरम ||
नवनीत सिंघल (दिल्ली)
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आपने स्वयं और अपने परिवारके लिए सब कुछ किया, देश के लिए भी कुछ करिये, क्या यह देश सिर्फउन्ही लोगो का है जो सीमाओं पर मर जाते हैं??? सोचिये…… घर बैठे भी आप देश के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं , जानने के लिए क्लिक करे

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