बैंक की कमाई समझ गए तो बैंक खाता बंद कर दोगे

बैंक की कमाई समझ गए तो बैंक खाता बंद कर दोगे

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वर्ष 1500 चल रहा है..

आपके पास सोने के सिक्के हैं , चांदी के सिक्के हैं..

 

वर्ष 1600 चल रहा है

आपने सिक्के 100 सोने चांदी के सुनार के पास जमा कराए उसने आपको रसीद दी जिसपर लिखा था मैं धारक को 100 सोने / चांदी के सिक्के लौटने का वचन देता हूँ..

उसने वह रसीद अपने लेनदार को दे दी और बोला की जाकर सुनार से यह 100 सोने / चांदी के सिक्के ले लेना..

उस व्यक्ति ने अपने लेनदार को यह रसीद दे दी, इस तरह रसीद खुमती गयी.. और सुनार के पास सिक्के बेकार पड़े रहे..

एक समस्या लोगों ने बताई की आप ये रसीद टुकडो में दो. (100 सिक्के की 1 रसीद न देकर 5 सिक्के की 20 रसीद दे दो ताकि लेनदारों के कम पैसे भी इस रसीद से चुकाए जा सकें. )

सुनार ने ऐसा ही किया..

अब कुछ समय बीतने पर सुनार ने पाया की अगर 100 सिक्के जमा होते हैं तो मात्र 10 सिक्के ही लेने कोई आता है, बाकी 90 कोई लेने नहीं आता क्यूंकि वो बाज़ार में ही घूमते रहते हैं..

तब सुनार ने दिमाग लगाया की क्यूँ न कुछ ज्यादा धन कमाया जाए ..

उसने उस 100 सिक्के में से 10 सिक्के अपने पास सुरक्षित रख लिए ताकि कोई लेने आये तो उसे दे सके.. बाकी 90 सिक्के उसने उधार पर दे दिए.. नतीजा बाज़ार में जो 100 सिक्के के बदले सिर्फ 100 की रसीद खुम रही थी, अब वो 100 की रसीद और 90 सिक्के घुमने लगे..

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अब ये 90 सिक्के भी किसी सुनार के पास वापस आ गए, उसने भी यही किया.. 9 सिक्के रखकर 81 सिक्के बाज़ार में दे दिए उधार के लिए..

ऐसे करते करते 81, से 73, 73 से 66, होता गया

और 100 सिक्के के बदले में 1000 सिक्के की रसीद पुरे बाज़ार में घुमने लगी..

यहाँ तक समझ आया की नहीं ??

पहले जमाने में सिक्के मतलब स्वयम सोना और स्वयम चांदी हुआ करता था..

लेकिन अब सोने के बदले में कागज का टुकड़ा मिलता है जिसके पीछे सिर्फ 10% सोना ही है..

यानी पहले के जमाने में रसीद के बदले सोना मिल जाता (जब तक 100 की रसीद और 100 का सोना था)

लेकिन अब नहीं मिलेगा.. क्यूंकि है ही नहीं..

इसी को सरकार ने नाम दिया महंगाई … यह है बैंक के द्वारा लूट का सिस्टम सरकार के साथ मिलकर..

सुनार आज के बैंक है..

बैंक कैसे कमाता है ??

सोचा कभी ?

आपने पैसे जमा करवाए, आपको ब्याज मिलेगा 4-8%

आपके पैसे बैंक ने उधार में दे दिए, ब्याज बैंक को मिलेगा 12-18%

यहाँ तक तो सब ठीक है.. कोई महंगाई कभी नहीं बढ़ेगी.. जो वस्तु जितने की है उतने की ही रहेगी सदा हमेशा..

 

लेकिन अगर बाज़ार में बैंक ने लोन दिया आपके जमा से 10 गुना ज्यादा तो ???

महंगाई पैदा कर दी गयी.. inflation बना दिया गया..

आप फर्ज कीजिये की आप सभी लोग बैंक के पास जाकर अपना पैसा निकाल लें तो क्या होगा ? बैंक दिवालिया घोषित हो जायेगा … क्यूँ ? क्यूंकि बैंक के पास आपके पैसे है ही नहीं.. बैंक ने तो उससे ज्यादा पैसे बाज़ार में दे दिए..

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आपके 100 रूपये के बदले बैंक के पास मात्र 10 रूपये ही रखे हुए हैं..

इसको समझो

आपने वर्ष 2000 में बैंक में 100 रूपये जमा किये, और 2010 में बैंक से वो 100 रूपये ले आये तो क्या उस 100 रूपये से आप जो वर्ष 2000 में खरीद सकते थे, क्या आज 2010 में खरीद सकते हैं ? नहीं न ? क्यूँ ? क्यूंकि आपके रूपये की कीमत गिरा दी गयी है.. यानी आज असल में बैंक ने आपके 50 रूपये ही आपको लौटाए हैं.. (लौटाए तो 100 रूपये ही हैं लेकिन उनकी कीमत 50 ही रह गयी) ..

बैंक ने क्यूँ किया ऐसा, ज्यादा कमाने के लिए..

सरकार ने क्यूँ किया ऐसा ? वो हिस्सेदार है इसमें…

 

2008 में अमरीका में क्या हुआ

लेहमन बैंक क्यूँ फ़ैल हुआ क्यूंकि बैंक नर जिन्हें कर्ज दिया था, वो लोग कर्ज नही लौटा सके, नतीजा बैंक के पास जमा आपके पैसे खत्म, बैंक दिवालिया और आप सडक पर..

Aig भी fail हुआ लेकिन उसको अमरीकी सरकार ने पैसे दिए ताकि वो लोगों की नजर में फेल न हो.. अमरीकी सरकार कहाँ से पैसे लायी ? उसने डॉलर छाप लिए..

लेकिन कोई भी देश नोट तभी छाप सकता है न जब उसके पास उतना सोना हो … ??

हाँ पहले तो यही था लेकिन अब ऐसा नहीं होता.. अब महंगाई बनाकर आपके पैसे धीरे धीरे समाप्त हो जायेंगे रखे रखे.. वो सब बैंक का मुनाफा होगा..

Fractional Reserve Banking Creates Money

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