बीमारी एक व्यापार

बीमारी एक व्यापार

241
0
SHARE

“मुझे लगता है, दवाईयां हि सबसे अच्छा व्यापार हैं क्योंकि भले हि आप किसी को स्वस्थ करें या न करें, आपको आपके पैसे तो मील हि जायेंगे “


जब भी किसी की मृत्यु होती है तो अक्सर लोग एक हि सवाल पूछते हैं “क्या रोग हुआ था उनको ? कौन सी बीमारी थी ?”

इस आधुनिक युग का ये कडवा सच है की
प्राकृतिक मृत्यु दुर्लभ होती जा रही है..
इस आधुनिक युग में व्यक्ति या तो किसी रोग से मरता है या फिर किसी दुर्घटना में.

क्या डॉक्टर भी कॉर्पोरेट के आगे बिकते हैं ?? आइये देखते हैं 

उदाहरण के लिए :-

भारत में indian मेडिकल एसोसिएशन जिसके 2 लाख से अधिक डॉक्टर सदस्य हैं.
About IMA

2008 में Indian Medical Association ने pepsi कंपनी से डील की 
(PepsiCo enters into non-commercial deal with IMA    

Tropicana juice is healthy, say doctors Published On: May 7, 2008
http://www.ndtv.com/video/player/news/tropicana-juice-is-healthy-say-doctors/28535

Terming it a partnership for health, the associations secretary-general, S N Misra, said although the company had not paid money for the endorsement, PepsiCo may sponsor the associations conferences and meetings for three years, the agreement period. Media reports said the company paid the association Rs 50,00,000 for the deal.

क्या आप डॉक्टर की इस राय से सहमत हो सकते हैं की पैक्ड जूस या डिब्बा बंद भोजन (processed food) आपकी सेहत के लिए अच्छा है ?? अगर हमारे और आपके डॉक्टर को इतनी समझ नहीं तो उसका कारण सिर्फ एक हि हो सकता है … भ्रष्टाचार..

” पारंपरिक डॉक्टर बीमारी के बारे में बात करते हैं
और प्राकृतिक डॉक्टर सेहत के बारे में ”                 महात्मा गाँधी 


क्या आप जानते हैं की जो दवा डॉक्टर आपको लिखते हैं उस दवा के कम्पनी द्वारा डॉक्टर को कमीशन मिलता है, विदेश यात्रा की टिकट, गिफ्ट, फ्रिज़, टीवी, मोबाइल व् कैश इत्यादि ?? विश्वास नहीं होता तो और पढ़िए..

GlaxoSmithKline: GUILTY in Largest Health Fraud Settlement in US History.

July 16, 2012  The British pharmaceutical company GlaxoSmithKline has plead guilty and will pay $3 billion to resolve criminal and civil liability charges related to illegal drug marketing and withholding information about health hazards associated with its diabetes drug Avandia.

GlaxoSmithKline paid U.S. medics to prescribe potentially dangerous medicines to adults and children.

It handed out cash as well as everything from Madonna concert tickets to pheasant-hunting trips. Authorities branded GSK as ‘cheaters who thought they could make an easy profit at the expense of public safety, taxpayers, and millions of Americans’.

क्या केवल जुर्माना भर देने से लाखों करोड़ो लोगों की मौत व् बीमारी की जिम्मेदार ये कम्पनी आज़ाद हो सकती है ? क्या ऐसा एक आध बार हि हुआ है ??

ये केवल एक उदाहरण नही है जब दवा कंपनियों ने डॉक्टरों के साथ मिलकर अपने लाभ कमाने के लिए लोगों की जान से खेलकर, ऐसा दुष्कर्म किया हो. ऐसे अनेक उदाहरण हैं जिनको आज हम आपके सामने लाने की एक कोशिश करेंगे. हम सिर्फ आपको समस्या नही बतायेंगे बल्कि आपको इलाज भी बतायेंगे.. 
आइये शुरू करते हैं…

डायबिटीज़ (शुगर, मधुमेह) की बीमारी :-

In 1997, the American Diabetes Association (ADA) and the federal government lowered the per se standard for diagnosing diabetes from a fasting blood glucose level of 140 mg/dL to 126 mg/dL

Lowering the diagnostic threshold shifts the definition of diabetes into the central bulge of the bell curve where the glucose level of most Americans falls. Among U.S. adults 40 to 74 years of age who have not been diagnosed with diabetes, 1.9 million have fasting plasma glucose levels of 126 to 140 mg per dL (7.0 to 7.8 mmol per L), which is almost as many as the 2.2 million who have levels over 140 mg per dL (7.8 mmol per L). Under the new guidelines, at least 1 million Americans (and possibly more) with fasting plasma glucose levels of 126 to 140 mg per dL (7.0 to 7.8 mmol per L), who previously would have been told that they had normal (or impaired) glucose tolerance, will now be informed that they harbor a disease.

वर्ष 1997 तक मधुमेह की बीमारी उनको मानी जाती थी जिनकी फास्टिंग ब्लड शुगर 140 MG/DL से ऊपर थी. लेकिन उसी वर्ष WHO ने एक कमेटी गठित की जिसके बाद इस लेवल को 140 से घटाकर 126 कर दिया गया. 

नतीजा ??? 

जो लोग कल तक मरीज़ नहीं थे वो रातों रात मरीज़ बन गये. अगले दिन से उनको भी डायबिटीज़ की बीमारी घोषित हो चुकी थी और डॉक्टर्स के यहाँ लंबी लाइन मरीज़ों की, व् दवा कंपनियों की बिक्री में अभूतपूर्व वृद्धि. अमेरिका की हि बात करें तो 10 लाख अमरीकी रातों रात नये डायबिटिक मरीज़ बन चुके थे. 

Doctors Steven Woolf and Stephen Rothemich from Virginia Commonwealth University report in the journal American Family Physician that among American adults this redefinition increased the number of diabetics by nearly 50 percent

Members of the Expert Committee on the Diagnosis and Classification of Diabetes Mellitus:
James R. Gavin III, MD, PhD (Chair),
K.G.M.M. Alberti, MD,
Mayer B. Davidson, MD,
Ralph A. DeFronzo, MD,
Allan Drash, MD,
Steven G. Gabbe, MD,
Saul Genuth, MD,
Maureen I. Harris, PhD, MPH,
Richard Kahn, PhD,
Harry Keen, MD, FRCP,
William C. Knowler, MD,
DrPH, Harold Lebovitz, MD,
Noel K. Maclaren, MD,
Jerry P. Palmer, MD,
Philip Raskin, MD,
Robert A. Rizza, MD, and
Michael P. Stern, MD.

इन 17 लोगों की committee ने ये रिपोर्ट बनाई थी. इनमें से 16 लोग diabetes की दवा बनाने वाली कंपनियों के एजेंट, सलाहकार, और वक्ता थे. कई लोग वैज्ञानिक भी थे जिन्होंने ये सब दवाएँ भी बनाई थी, उनको इन सभी दवा बनाने वाली कंपनियों से बहुत अच्छा पारिश्रमिक (वेतन) भी दिया जाता था. जिन कंपनियों के लिए ये लोग काम करते थे वो हैं:-
Aventis Pharma,
Bristol Mayers Schwab,
eli lilly,
Glaxo Smithkline,
Novartis,
Merck and
Pfizer.

ये तो रही diabetes की बात, अब कुछ और लोगों को दवा बेचने के लिए एक और नयी टर्म launch की गयी “Pre Diabitic” जिनका फास्टिंग ब्लड शुगर 126 MG/DL से थोड़ा कम था, तो उनको दूसरी दवाएँ बेचकर व्यापार बनाया गया.

नतीजा ?? 

करोड़ों लोग लगातार diabetes या pre diabetes की दवा प्रतिदिन खाते हैं… फायदा डॉक्टर्स का, उन कंपनियों का जो इन्हें बनती हैं.

ऐसा हि कुछ हुआ हाइपरटेंशन के साथ भी

HYPERTENSION (HIGH Blood Pressure) की दवा कैसे बेचीं गयी  


1997 में हि WHO ने एक पैनल बिठाया. 11 लोगों की कमेटी के मुखिया थे डॉ Alberto Zanchetti. इन्होने भी ज्यादा से ज्यादा लोगों को मरीज बनाने के लिए HIGH BP के लेवल को बदला.  पहले ये सीमा थी 160/100 mmHg इस सीमा को 140/90 mmhg कर दिया गया.. 

नतीजा ???

रातों रात 35 प्रतिशत लोग जो कल तक स्वस्थ थे वो आज high BP से ग्रसित थे, जिसके लिए उन्हें आजीवन प्रतिदिन गोलियां खानी थी.. जिससे किसका फायदा हुआ ये कहने की आवश्यकता नहीं.. जिन 11  लोगों की committee ने ये रिपोर्ट बनाई थी वो दवा बनाने वाली कंपनियों के एजेंट, सलाहकार, और वक्ता थे. कई लोग वैज्ञानिक भी थे जिन्होंने ये सब दवाएँ भी बनाई थी, उनको इन सभी दवा बनाने वाली कंपनियों से बहुत अच्छा पारिश्रमिक (वेतन) भी दिया जाता था. जिन कंपनियों के लिए ये लोग काम करते थे. These are taken from reports of Journal of American Medical Association.

अब बारी थी 140/90 के नजदीक वाले लोगों की. जिसके लिए pre hypertension की range 120/80 mmhg कर डी गयी. नतीजा विश्व की आधी से ज्यादा जनता बीमार खोषित कर दी गयी. 
News from Seattle Times.
http://www.seattletimes.com/health/new-blood-pressure-guidelines-pay-off-8212-for-drug-companies/ (New blood-pressure guidelines pay off — for drug companies
Originally published June 26, 2005 at 12:00 am Updated March 16, 2010 at 4:53 pm)

यही कहानी है Cholestrol की. 1998 तक cholestrol 240 hg/dl से ऊपर होने पर high cholestrol माना जाता था लेकिन who ने इसको 200 hg/dl कर दिया. नतीजा ???विश्व के 56% लोग रातों रात बीमार घोषित हो गए. 

अभी जारी है… कृपया प्रतिदिन पढ़ें इसको और लिखा जायेगा… 

Also Read:  जिस देश का प्रधानमंत्री महलों में रहता है उस देश की जनता झोपड़ी में रहती है - चाणक्य

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY