बाल मजदूरी या गुलाम मानसिकता

बाल मजदूरी या गुलाम मानसिकता

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अपने AC कमरों में बैठकर हम सब जब किसी 14 साल से कम उम्र के बच्चे को भारत में काम करते देखते हैं तो कहते हैं ओह यह बेचारा बाल मजदूर.

लेकिन यही लोग जब विदेशी दौरे पर अमरीका जैसे देश में MCDONALD KFC जैसे स्टोर्स या दुकानों पर 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को काम करते देखते हैं तो कहते हैं देखो कितना समझदार है, INDEPENDENT है. आत्मनिर्भर …

 

इतना बड़ा अंतर एक ही व्यक्ति की सोच में कैसे आ जाता है ? आखिर उसने क्या फर्क किया दोनों में ?

शायद उसके शरीर के कपडे.

अगर कपडे पुराने फटे घिसे हुए हैं और वो आत्म निर्भर होने के लिए कार्य करे तो बाल मजदूर कहलायेगा

और

अगर कपडे चकाचक हो (फटे हुए फैशन में हैं), तो वो स्वावलंबी और अच्छा बच्चा कहलायेगा..

 

है न सुंदर परिभाषा..

 

हम बिलकुल भी यह नहीं कह रहे की बच्चों से काम करवाना चाहिए.. बल्कि हम यह कह रहे हैं की जो बच्चे पहले अपना काम करके स्वयम की और परिवार की रोजी रोटी चलाते थे उनसे आपने रोजगार का हक़ तो छीन लिया लेकिन उन्हें दिया क्या ?

स्कूल ?,

भोजन ?,

उल्टा उसको भिकारी बना कर रख दिया..

अब उसका यौन शोषण होने लगा क्यूंकि खुलकर वो नौकरी कर नहीं सकता, खाने को रोटी आपने दी नहीं, भूखा वो और भूखा उसका परिवार किसके भरोसे छोड़ दे वो ?? नतीजा बचपन से ही बच्चे गलत धंधो में लगने शुरू..

अच्छा खासा स्वावलम्बी नेक बालक आपने गुनाह की दुनिया में धकेल दिया वो भी किसके कहने पर ?

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दोगले अमरीका के… आपने अमरीका की सुनते हुए निति तो बना दी लेकिन यह नहीं जाना की स्वयम अमरीका में 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे जब काम करते हैं तो उन्हें बाल मजदुर नहीं कहते.. यह है दोगलापन अमरिका का.

क्यूँ ? पढ़िए

In 1990, India faced a big balance of payment crisis.
We  didn’t have enough money to pay for imported petrol and domestic  supplies have never been sufficient to meet actual consumption.
Crude oil is bought in dollars ….. in the entire world.
So  if a country doesn’t have enough dollars, then it needs to do something  to get dollars to pay for petrol. The options a country has
(1)  Increase exports : this is difficult as US will try to block your  country’s products by citing reasons such as child labour, low quality  goods, anti-dumping laws … etc
See it is common sense every country wants to protect it’s interests
(2) Devalue your currency to make your products cheaper
(3) Take loan and pay interests forever as long as your country exists
(4)  Loan is given only under the condition that anti-national BILLs  compliant with anti-country agreements like WTO GATT are passed in your  parliament
YES WTO GATT was forced on India ……

राजीव दीक्षित जी की कलम से…

 

बाल मजदूरी की समस्या से आप अच्छी तरह वाकिफ होंगे। कोई भी ऐसा बच्चा जिसकी उम्र 14 वर्ष से कम हो और वह जीविका के लिए काम करे कहलाता है। गरीबी, लाचारी और माता-पिता की प्रताड़ना के चलते ये बच्चे बाल मजदूरी के इस दलदल में धंसते चले जाते हैं।

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Child Labour

बाल मजदूर की इस स्थिति में सुधार के लिए सरकार ने 1986 में चाइल्ड लेबर एक्ट बनाया जिसके तहत बाल मजदूरी को एक अपराध माना गया तथा रोजगार पाने की न्यूनतम आयु 14 वर्ष कर दी। इसी के साथ सरकार नेशनल चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट के रूप में बाल मजदूरी को जड़ से खत्म करने के लिए कदम बढ़ा चुकी है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य बच्चों को इस संकट से बचाना है। जनवरी 2005 में नेशनल चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट स्कीम को 21 विभिन्न भारतीय प्रदेशों के 250 जिलों तक बढ़ाया गया।

आज सरकार ने आठवीं तक की शिक्षा को अनिवार्य और निशुल्क कर दिया है, लेकिन लोगों की गरीबी और बेबसी के आगे यह योजना भी निष्फल साबित होती दिखाई दे रही है। बच्चों के माता-पिता सिर्फ इस वजह से उन्हें स्कूल नहीं भेजते क्योंकि उनके स्कूल जाने से परिवार की आमदनी कम हो जाएगी।

Child Labour

माना जा रहा है कि आज 60 मिलियन बच्चे बाल मजदूरी के शिकार हैं, अगर ये आंकड़े सच हैं तब सरकार को अपनी आंखें खोलनी होगी। आंकड़ों की यह भयावहता हमारे भविष्य का कलंक बन सकती है।

भारत में बाल मजदूरों की इतनी अधिक संख्या होने का मुख्य कारण सिर्फ और सिर्फ गरीबी है। यहां एक तरफ तो ऐसे बच्चों का समूह है बड़े-बड़े मंहगे होटलों में 56 भोग का आनंद उठाता है और दूसरी तरफ ऐसे बच्चों का समूह है जो गरीब हैं, अनाथ हैं, जिन्हें पेटभर खाना भी नसीब नहीं होता। दूसरों की जूठनों के सहारे वे अपना जीवनयापन करते हैं।

जब यही बच्चे दो वक्त की रोटी कमाना चाहते हैं तब इन्हें बाल मजदूर का हवाला देकर कई जगह काम ही नहीं दिया जाता। आखिर ये बच्चे क्या करें, कहां जाएं ताकि इनकी समस्या का समाधान हो सके। सरकार ने बाल मजदूरी के खिलाफ कानून तो बना दिए। इसे एक अपराध भी घोषि‍त कर दिया लेकिन क्या इन बच्चों की कभी गंभीरता से सुध ली?

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बाल मजदूरी को जड़ से खत्म करने के लिए जरूरी है गरीबी को खत्म करना। इन बच्चों के लिए दो वक्त का खाना मुहैया कराना। इसके लिए सरकार को कुछ ठोस कदम उठाने होंगे। सिर्फ सरकार ही नहीं आम जनता की भी इसमें सहभागिता जरूरी है।

 

जब तक गरीबी दूर नहीं होती,

जब तक सबको 2 वक्त की रोटी आराम से प्राप्त नहीं होगी

तब तक ऐसे उलटे सीधे कानून देश के लिए नयी समस्या ही पैदा करेंगे.

इन सब समस्याओं का 1 हल है

ARTHKRANTI टैक्स व्यवस्था..

हमारी सरकार कितने ही प्रकार के टैक्स लेती ही रहती है लेकिन फिर भी उसका पेट नहीं भरता, न ही कभी उनकी कोई योजना पूरी हो पाती है, गरीबी हटाओ अभियान दशकों से हर चुनाव का मुद्दा होता है.. लेकिन गरीबी नहीं खत्म होती, गरीब खत्म हो जाते हैं.. और नए नए गरीब बनते जाते हैं..

 

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