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जब भारतवासी गाँव में थे तब उनके घर आने वाले हर व्यक्ति को दूध, लस्सी, छाछ, गन्ने का रस, शिकंजी, निम्बू पानी यह सब दिया जाता था ।

लेकिन जब से लोग समझदार हुए (विकसित हुए, पढ़ लिख गए) तब उन्होंने मेहमानो को चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक, शराब इत्यादि पिलाना शुरू कर दिया

कभी सोचा क्यों ??

क्या इनमे क्वालिटी है ? बिलकुल नही उल्टा नुकसान देह हैं ।

आप ही बताओ कौनसा विटामिन iron कैल्शियम प्रोटीन या और भी कोई शरीर के काम की चीज है चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक या शराब में ?

उल्टा जो गाँव में लोग देते थे उस सबमे गुणवत्ता ही गुणवत्ता थी ।

 

क्या ये महंगे हैं ? नही उल्टा ये तो सस्ते पड़ते हैं । दूध आज भी 50 रूपये लीटर है जबकि चाय तो ज्यादा से ज्यादा 10 रूपये की मिल जाती है।

कॉफी महंगी पड़ती होगी ? अजी 3 रूपये में नेसकैफे का पैकेट आ जाता है जिससे 10 रूपये में कॉफी भी बन जाती है ।

कोल्ड ड्रिंक तो पूछो ही मत । सबसे सस्ती

 

चलो अब खाने की बात कर लेते हैं ।

अब जब कोई मेहमान आता है तो क्या खिलाते हो आप उसे ?? रोटी ?? नही न ।

आप खिलते हो उसे बाहर से लाकर सड़े हुए मैदा के समोसे, जले हुए तेल और नकली घी की बनी मिठाई और तलि भुनी चीज । जिसे खाते ही सामने वाला पड़ता है बीमार।

पहले क्या होता था, पहले उसे घर की बनी रोटी सब्जी खिलाते थे। घर में बनी मिठाई गुड़ इत्यादि खिलाते थे। फल खिलाते थे ।

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गलत तो नही बोल रहा न मैं ?

तो अब समझे की पढ़ लिख गए तो हिसाब समझ आया की भाई मेहमान पर पैसे न खर्चो । और गिरी हुई क्वालिटी का समान खिलाओ ताकि वो बीमार पड़े और दुबारा न आये न खाये और हमारा खर्च बच जाए । यह है पश्चिम की संस्कृति और सोच । वहां पर जो लोग साथ में खाना खाने भी जातें है न तो अपना बिल स्वयं ही देते हैं क्योंकि बहुत गरीब हैं बेचारे ।

इसको बिना सोचे समझे अपना लिया पढ़े लिखे समझदारों ने ।

नतीजा आपके सामने है ।

हर घर में 3 में से 1 आदमी तो बीमार है ही  जिसकी permanent दवाई चल रही ।

शुगर

Bp

थाइरोइड

कैंसर

एड्स

हार्ट blockage

अस्थमा

मोटापा

यह सब तो अब लगभग हर घर में आम बीमारी हो गयी हैं ।

क्या आप भी पढ़े लिखे समझदार हो ?? जो ज्यादा पढ़ लिख गए हो और ब्रेड मैदा चाय काफी इत्यादि को अपनाकर विकसित हुए जा रहे हो ??

कृपया जमाने की भेड़चाल वाली मूर्खता से बचें और सोच समझ कर चलें । बीमार न ही पड़े ऐसे प्रयास करें न की बीमार पड़ने के बाद जिंदगी भर दवाई पर जीने का ।

 

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