प्राकृतिक चिकित्सा

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रोग क्या है ?
बीमारी कैसे होती है ?
कौन बीमारी देता है  ?
क्या बीमारी हमें किसी और की वजह से होती है या उसके कारण हम स्वयं हैं ?

जरा सोच कर देखिए कोई भी बीमारी कोई भी रोग का मूल कारण क्या है ?

एक हमारा भोजन
हम भोजन तीन रूप में करते हैं
हवा पानी और भोजन यह तीनों ही आज दूषित हो चली है
नतीजा हमारा भोजन दूषित है और वह हमें रोगी बनाता है
किसी भी तरह का पॉल्यूशन हो वह हमारे को स्वस्थ तो नहीं बनाता है

दूसरा स्ट्रेस चिंता
भाग दौड़, पैसे के पीछे पागल दुनिया
लोग अपने शरीर से जरूरत से ज्यादा काम लेते हैं (शारीरिक रूप या मानसिक रूप से)
नतीजा चिंता, जो जिता समान बताई गई है
जो लोग अपनी बीमारी का कारण ईश्वर को या किसी अन्य व्यक्ति को देते हैं वह स्वयं से एक बार सवाल करके देखें की

क्या सच में वह स्वयं निर्दोष है ??
क्या उन्होंने अपने शरीर की कभी चिंता भी की ?
क्या उन्होंने खाने से पहले यह देखा कि वह इस शरीर के लिए सही है या गलत है  ?
क्या उन्होंने जो पानी पिया वह यह देख कर पिया कि वह शुद्ध है या यह विषयुक्त  ?
जिस जगह आप रहते हैं उस जगह की प्राणवायु यानी ऑक्सीजन और हवा में पाए जाने वाले सारे कण जांच कर देखेंगे तो पाएंगे किस जहर भरी हवा को आप प्रतिदिन ग्रहण करते हैं

अब आप ही बताइए जिस व्यक्ति का हवा भोजन पानी जो तीन मूल भोजन है यह तीनों ही अगर बिगड़ गए तो रोग तो आएगा ही

अब आप कहेंगे कि इसके लिए मैं कैसे जिम्मेदार हूं हवा तो मैंने दूषित नहीं करी पानी तो मैंने दूषित नहीं करा भोजन को मैंने दूषित नहीं करा ?

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सच बोलिए क्या आपने कुछ भी ऐसा नहीं किया ? हम सब ने अपने-अपने हिस्से में अपने अपने तरीके से प्रकृति के इन 3 अनमोल चीजों का नुकसान ही किया है

तो आपके रोग के कारण है
एनवायरमेंट और उसमे मिलने वाली सारी चीजें

परन्तु सभी लोग तो बीमार नही हैं जबकि वो भी इसी environment में रहते हैं ?
उसका भी कारण है । आपका खानपान । हर व्यक्ति सिगरेट नही पीता, शराब नही पीता, हर व्यक्ति चाय नही पीता, चीनी, ज्यादा नमक, रिफाइंड तेल, मैदा, नमकीन, बाजार का फ़ास्ट फ़ूड, जंक फूड ।

सब अपनी मर्जी से खाते हैं । कोई फल भी खाता है, कोई जूस भी पीता है, कोई योग भी करता है, कोई दौड़ भी लगाता है । तो सभी एक ही जैसे एनवायरनमेंट में रहकर भी अलग अलग दिनचर्या का पालन करते हैं । रोगी वो बनता है जो सही काम कम और गलत काम ज्यादा करता है ।

इससे भी एक कदम बढ़कर वह लोग जो जानते हैं समझते हैं कि ज्यादा चीनी खाएंगे तो क्या होगा ज्यादा नमक खाएंगे तो क्या होगा ज्यादा मिर्च मसाले करेंगे तो क्या होगा और ज्यादा तला भुना खाएंगे तो कौन सी बीमारी शरीर में लगेगी सब कुछ जानते हुए भी यह लोग मैदा नमक तेल चीनी ऐसी उत्पाद खाते हैं और सोचते हैं कि वह स्वयं निर्दोष हैं
अब आप ही बताएं कि क्या आप निर्दोष हैं ?

अब हमने अपने आप को रोगी तो बना लिया अब अगर निरोगी बनाना हो तो क्या करें

सबसे पहले जिसकी वजह से हम रोगी बने उस चीज को तुरंत रोकना हैं यानी अपने हवा पानी भोजन को शुद्ध कर लें

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उसके बाद जो गंदगी हम खा रहे हैं उसे बंद कर दें मैदा तेल नमक चीनी यह सब

नतीजा क्या होगा आपके शरीर में नई गंदगी नहीं जाएगी और रही बात शरीर में जो गंदगी पुरानी जमी हुई है उसे कैसे बाहर निकाले

उसके लिए उपवास
शरीर में जो भी रोग आया है और पैदाइश से नहीं है वह रोग जड़ से समाप्त किया जा सकता है

संकल्प शक्ति
हमें ऐसा माहौल बनाना होगा की जो भी व्यक्ति रोगी मिले उसे हम एक बार समझाये कि भाई तुम्हारे रोग का कारण यह है और अगर आपको स्वस्थ होना है तो यह यह यह उपाय करें

एक बार समझाओ.

अगर उसकी समझ में फिर भी ना आए तो फिर आपको उसे मुर्ख घोषित करना है उसका मजाक बनाना है कि भाई इसको इतनी सरल सी बात समझ नहीं आ रही कि इसके रोग का कारण इसकी की हुई यह सारी गलतियां है पर यह अपनी गलतियों का गुलाम है और इसलिए यह रोगी है और इतने मूर्ख व्यक्ति के हम मित्र नहीं हो सकते ना ही हमारा ऐसे मुर्ख से कोई रिश्ता हो सकता है

जब समाज में एक धारणा फैलेगी कि रोगी होना मतलब मूर्ख होना तो लोग अपनी सेहत का ख्याल रखना शुरू करेंगे क्योंकि लोगों को अपनी इज्जत बहुत प्यारी है यानी रोगियों की इज्जत अगर हम उतारने लगे तो लोग समाज में अपनी इज्जत के लिए अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना शुरू करेंगे और ना गंदगी खाएंगे ना किसी को खाने देंगे

*मेहमान को भी आज की डेट में हम चाय मैदा नमकीन पता नहीं क्या क्या खाने पीने को देते हैं और तो और उसे खुश करने के लिए घर से बाहर बने बाजार के सामान को लाकर, पता नहीं कौन से सड़े हुए तेल में वह बनाया, कितना सड़ा हुआ समान था, वह सब लाकर उसके सामने परोसते है और उसे कहते हैं खाओ जी ।

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तो अब रोगी नही बनना
अब निरोगी बनना है
रोग मुक्त रहना है
प्रकृति में प्राणवायु बढ़ानी है
जल को जमीन में संचित करना है
सौर ऊर्जा, बारिश का पानी संचित, पेड़ लगाने, पैदल चलना, योग करना, खाने पीने की आदत में सुधार करना यह सब करना है

यह सब कीजिये और निरोगी बनिये
सेहत ही असली धन है
कम कमाओ कम खाओ
जो भी खाओ वो अच्छा ही खाओ ।

शरीर को कूड़ाघर मत बनाओ । उस कूड़े से रोग ही मिलेगा।

जय श्री राम ।

नवनीत सिंघल
प्राकृतिक चिकित्सा  whatsapp समूह
सेवा शुल्क 100₹ प्रति मास
कोई भी रोग हो, उसे ठीक किया जा सकता है ।

आजीवन दवा खाने की कोई आवश्यकता नहीं है.. बाकी आपकी सोच और समझ.

प्राकृतिक चिकित्सा फॉर्म https://t.co/QkjIy3CHFD

किसी को भी कोई प्राकृतिक चिकित्सा चाहिए तो इस फॉर्म को भरें ।

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