प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा न्‍यूयॉर्क में ‘विदेशी मामलों की परिषद’ में...

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा न्‍यूयॉर्क में ‘विदेशी मामलों की परिषद’ में दिए गए सम्‍बोधन का मूल पाठ

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प्रधानमंत्री कार्यालय29-सितम्बर, 2014 15:06 IST

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा न्‍यूयॉर्क में ‘विदेशी मामलों की परिषद’ में दिए गए सम्‍बोधन का मूल पाठ
सभी गणमान्य अतिथियों

भारत के पांच प्रधानमंत्री इसके पू्र्व इस सभाग्रह में आपसे बात कर चुके हैं। मेरा छठा नंबर हैं, मैं तीन दिन से आपके ही शहर में हूं और मुझे जो उत्साह, उमंग और जो प्यार मिला है इसके लिए मैं इस शहर का और US का हृदय का आभार व्यक्त करता हूं। मैं विशेष रूप से CFR की इस परंपरा को बधाई देता हूं कि उसने अपनी Credibility बनाई है। वे स्वंय अपने विचारों को थोपते नहीं है, वे विचारों को सुनते हैं, सब पक्षों के विचारों को सुनते हैं और उसी को जगत के सामने रखते हैं और लोगों पर छोड़ देते हैं कि ये भिन्न-भिन्न पहलू हैं, आप judge कीजिए कि सही क्या है, गलत क्या है?

मैं समझता हूं कि ये अपने आप में छोटा काम नहीं है, वरना संस्थागत प्रेम इतना होता है, संस्था की अपनी छवि की चिंता इतनी होती है, वो अपने विचारों को कहीं न कहीं तो रंग देने की कोशिश करता है, लेकिन CFR ने अपने आप को लगातार बचाए रखा है और जैसे का तैसा और सब पहलुओं को समेट कर के सभी के सामने रखने की एक परंपरा खड़ी की है। इसके लिए मैं CFR को हृदय से अभिनंदन करता हूं।

डॉ. हास्स का संबंध हिंदुस्तान से अच्छा रहा। भारत और अमेरिका के संबंधों को पिछले दशक में गति देने में, संबंधों को और ताकत देने में डॉ. हास्स ने और अच्छी भूमिका निभाई। जब वाजपेयी जी की सरकर थी भारत में, तब उनकी बड़ी सक्रिय भूमिका रही थी और हम, पूरा भारत उनके इस योगदान को सकारात्मक रूप से हमेशा याद करता है और मैं डॉ. हास्स का उसके लिए हृदय से, आज भी अभिनंदन करना चाहता हूं।

जैसा अभी डॉ. हास्स ने अभी बताया कि 30 साल के बाद भारत में पहली बार एक पूर्ण बहुमत वाली सरकार चुनकर आई है और वो भी, जो हमेशा विपक्ष में रहती थी, वैसी पार्टी जीतकर आई है और पहली बार भारत में एक ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनने का अवसर मिला है, जो आजाद हिंदुस्तान में पैदा हुआ है। हमारे यहां अब तक जितने प्रधानमंत्री हुए वो जब ब्रिटिश शासन था, तब उसी काल में उनका जन्म हुआ इसलिए मैं वो इंसान हूं जिसे गुलामी के वो दिन देखने का अवसर नहीं आया था। मैं जन्मा ही ऐसे समय में, इसलिये मैने लोकतंत्र को Breathing के साथ लिया है। मेरे सांसों-सांस में लोकतंत्र है और वही लोकतंत्र की ताकत के भरोसे आज समाज में एक सबसे छोटा व्यक्ति हिंदुस्तान के इस पद पर पहुंच पाया है, ये लोकतंत्र की ताकत है।

पहली बार बहुमत मिला है और उसके कारण, करीब-करीब दो Generation अपनी आशाओं, आकांक्षाओं को समेटकर के बैठे थे, एकदम से उफान आया है। भारत का हर नौजवान जिसकी आयु आज 40-45 साल हुई होगी,10 साल की उम्र से लेकर वह अपनी 40 साल की यात्रा तक उसने अस्थिरता, निराशा और यही माहौल देखा है और जब ये स्थिति आई है तो ये स्वाभाविक है कि उसकी अपेक्षाएं बहुत बढ़ जाती है और उन अपेक्षाओं को पूर्ण करना हमारा दायित्व भी है। भारत एक विशाल देश है और उसके चुनावों को समझना, ये भी एक बहुत कठिन काम है और जैसे पश्चिम के देशों में चुनावों पर किताबें लिखी जाती हैं, भारत में उस प्रकार की परंपरा तो अभी नहीं बनी है और उसके कारण चुनाव का रूप-रंग और इसका दायरा और इसका पूरा अंदाज, जब तक कोई व्यक्ति चुनाव को निकट से न देखे उसको अंदाज नहीं आ सकता और शायद विश्व में इतनी बड़ी संख्या में मतदान, इतने मतदाताओं के मत प्राप्त करके विजय होना, ये अपने आप में एक बहुत बड़ी कठिन तपस्या रहती है, कठोर परिश्रम रहता है लेकिन भारत की जनता ने बहुत आशीर्वाद दिए हैं।

इस चुनाव में हम दो विषय को लेकर के मैदान में उतरे थे। एक हमारा आग्रह था Good Governance दूसरा हमारा आग्रह था Development हम मानते हैं कि भारत की सभी समस्याओं का समाधान, जब तक हम इन बातों पर focus नहीं कर सकते, तब तक हम नहीं कर पाते। पहले हमारे यहां कुल मिलाकर आदत यह रही थी कि छोटे-छोटे वर्गों को खुश करो, टुकड़े फेंको, अपनी वोट बैंक को सलामत रखो और राजनीति करते रहो। वो एक सरल उपाय, बहुत ही सरल रास्ता है और राजनीति में टिकने के लिए, हिंदुस्तान के लोगों को वो जम गया था लेकिन, Good Governance की बात करना,Development की बात करना छोटे-छोटे-छोटे विषयों से ऊपर उठकर के काम करना बहुत कठिन काम है लेकिन, इस बात को लोगों ने इसलिए स्वीकारा क्योंकि भारत की जो युवा पीढ़ी है, उसकी सोच बदली है, भारत की जो young generation है, वो अब टुकड़ों में जीना नहीं चाहती। अब तक उनको जिस प्रकार से Treatment मिली है, उस Treatment से वो खुश नहीं है। वो कुछ नया चाहती है और भारत वो भाग्यवान देश है, वो दुनिया का सबसे पुराना Civilization है, साथ-साथ दुनिया का सबसे युवा देश है। ये एक बड़ा Unique Combination हमारे पास है कि महान विरासत भी है और हम Youngest Country of the World भी है। हमारी 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 साल से कम उम्र की है। इस Youth का जो aspirations है, ये Youth के मन में जो पड़े हुए विचार हैं, उसी का परिणाम है कि इतना बड़ा राजनीतिक परिवर्तन आया है। ये बात निश्चित है कि राजनीति में Stability वो अपने आप में बहुत बड़ा message होता है। हम जानते हैं कि जब Stability होती है तो सामान्य मानवों को भी विश्वास होता है कि हां भाई चलिए कि अब कुछ नीतियों के आधार पर भी हम साथ चल सकते हैं तो भारत की जनता ने Stability देने का निर्णय कर-करके विकास की यात्रा की नींव डालने का काम स्वंय जनता-जनार्दन ने किया है।

मैं इस बात पर विश्वास करता रहा हूं, जो मैं Good Governance कहता हूं तब, Minimum Government-Maximum Governance । क्योंकि इतना बड़ा देश चलाने के लिए इतनी बड़ी परंपराएं, इतने बड़े नियम, इतने बड़े hierarchies यही चीजें हैं, जो रुकावट का कारण बन जाती हैं। वो सरकारी व्यवस्था ही एक प्रकार से बोझ बन जाती है। मेरी कोशिश है सारी Processes सरल कैसे हो? Speedy कैसे हो? उस दिशा में हमारी कोशिश है। Transparency कैसे आए? ये हमारी कोशिश है। हम E-Governance की ओर बल दे रहे हैं, Electronic Governance और इसके कारण Effective Governance की पूरी संभावनाएं हैं, Easy Governance की पूरी संभावनाएं हैं, उस पर हमारा बल है।

दूसरी बात है Development। Development में भी हमारे दो फलक है- एक हम विश्व स्तर पर Developed Countries के बराबर में हमारे देश को कैसे लाकर खड़ा करें? At the same time मेरे देश में गरीब से गरीब जो इंसान है और आखिरी इंसान है, उसके जीवन में बदलाव कैसे लाएं? भारत की जब चर्चा होती है तो एक पहलू छूट जाता है और समय की मांग है कि उस पहलू पर भी चर्चा की जाए और वो है Neo Middle Class, जो लोग गरीबी से बाहर आए हैं लेकिन अभी मध्यम वर्ग की अवस्था तक पहुंचे नहीं है और अब गरीबी में वापस जाना नहीं चाहते हैं। यह एक ऐसा बहुत बड़ा bulk है। हम इस Neo Middle Class को address करना चाहते हैं, अगर हम Neo Middle Class को address करते हैं, उसके आर्थिक जीवन में बदलाव लाते हैं तो गरीबी से बाहर निकलने का हौंसला बुलंद हो जाएगा। अगर हमने Neo Middle Class के प्रति उदासी बरती और वो दुर्भाग्य से फिर गरीबी की ओर चला गया, तो कभी भी गरीब को बाहर आने की इच्छा नहीं होगी। वो यही मानेगा कि परमात्मा ने तय किया है कि ऐसे ही गुजारा कर लो, जो होगा-सो देखा जाएगा। मैं ये मनोवैज्ञानिक स्थिति को बदलना चाहता हूं और उसके लिए इस तबके के विकास के लिए क्या योजनाएं हो सकती हैं, उस पर हम बल दे रहे हैं।

जब मैं कहता हूं हम Global Level पर जाना चाहते हैं, जिसमें हमारा Growth Rate बढ़ाना चाहते हैं, हमारी Economy को हम और तेज बनाना चाहते हैं, अच्छा है, पहले तीन महीने में ही हम 4.5 से लेकर 5.7 तक, हमारे Growth को एक प्रतिशत पहले ही तीन महीने में बढ़ाने में सफल हुए हैं और उसका एक मूल कारण है सरकार चुनने के बाद एक विश्वास का माहौल बना है और उस विश्वास का माहौल है वो सबसे ज्यादा गति देता है।

कभी-कभी कोई Patient बीमार हो और किसी दूसरे शहर में बीमार हो जाता है और उसे जब तक अपना डॉक्टर नहीं मिलता है तो वो ठीक नहीं हो पाता है तब तक उसको चिंता रहती है, उसको खुद का डॉक्टर चाहिए, तब उसको उसका अपना विश्वास बीमारी से बाहर लाता है और लोगों ने जिस विश्वास के साथ अपनी सरकार बनाई है, वो सरकार उसने खुद बनाई है, अपनी आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए बनाई है। उसके कारण जनता के अंदर अपने-आप में एक विश्वास पैदा हुआ है और विश्वास इन दिनों एक बहुत बड़ा Psychological काम कर रहा है। जिसके कारण एक Magnetic Effect आज मैं देख रहा हूं कि चारों तरफ से विकास की दौड़ का एक माहौल बना है और जो हमें विश्व के समृद्ध देशों के बराबर ले जाने के लिए संभावनाओं को जन्म देता है।

हम हमारी Economy को तीन पिलर पर आगे बढ़ाना चाहते हैं Agriculture, Manufacturing और Service sector और तीनों को हम Balance करना चाहते हैं। हमारी पूरी Economy में 30% contribution, Agriculture का है। 30%, Manufacturing हो, 30% ,Service Sector का हो। कभी-कभार एकाध नीचे चला गया हो तो भी देश की Economy को कोई प्रभाव न पड़े और उस दिशा में हम काम कर रहे हैं। जब हम Manufacturing sector की बात करते हैं तब हम “Make in India” का एक बुलंद विश्वास जगाने का प्रयास कर रहे हैं। हम दुनिया को कहते हैं कि आइए “Make in India” और मैं India के लोगों को कहता हूं कि आप भी ऐसा manufacturing करिए की आपके भी product दुनिया के बाजार में चलें और उसके लिए मैं कहता हूं Zero Defect-Zero Effect। हमारा product ऐसा हो जिसमें Zero Defect हो, हमारे product की process ऐसी हो जो Environment पर Zero Effect करती हो इसलिए Zero Defect-Zero Effect के साथ हम manufacturing process और products, उन पर हम अपना बल दें, तो हम दुनिया में अपनी जगह बनाने में सफल हो जाएंगे।

जब मैं “Make in India” की बात करता हूं, फिर कि दुनिया के लोग आएं। आज दुनिया के हर उद्योगकार को उत्पादन तो करना है, market available है उसकी चिंता यही है कि Low Cost Production कैसे हो? Effective Governance की सुविधा कैसे मिले? अपने Investment की Security कैसे हो? उसको proper Human Resource कैसे मिले? अपने मुलाजिमों के लिए, अपने अफसरों के लिए Quality of Life कैसे उपलब्ध हो? अगर इन बातों पर ध्यान दिया गया तो, विदेश के लोगों के आने की संभावना बढ़ जायेगी ।

भारत जहां युवा देश है, तो हम Skill Development पर बल दे रहे हैं। Skill Development में भी मेरे दो पहलू हैं। एक, 2020 तक दुनिया को एक बहुत बड़े work force की आवश्यकता होने वाली है। विश्व को इतने बड़े work force की आवश्यकता लगने वाली है कि work force कहां से मिलेगा, उनके लिए चिंता का विषय है। भारत एक युवा देश है, दुनिया के work force की requirement को पूरा करने का सामर्थ्य भारत में है। दुनिया को कितने ही प्रकार के लोगों की जरुरत पड़ेगी, उस काम को हम करना चाहते हैं। उसी प्रकार से हम वो भी Skill Development करना चाहते हैं, जिसमें हमारे Entrepreneurs तैयार हों और वो लोग हों जो Job creators हो। छोटे-छोटे लोग छोटे-छोटे व्यवसायों द्वारा Job creators कैसे बनें और उसके कारण छोटे-छोटे उद्योगों का एक जाल बिछे और हमारी Economy और आगे बढ़े, उस दिशा में हम काम करना चाहते हैं। मुझे विश्वास है कि जिन कदमों को हमने उठाया है, उसका सीधा-सीधा परिणाम मिलने वाला है।

पिछले तीन महीने के अल्पकाल में ही….अभी-अभी डॉ. हास्स बता रहे थे Mars में हमने बहुत बड़ा Achievement किया है। आपको जानकर के आनंद होगा कि हिंदुस्तान के अलग-अलग राज्यों में छोटे-छोटे पुर्जे बने और छोटे-छोटे कारखानों ने छोटे-छोटे पुर्जे बनाए और हमारे Space Scientists ने उन्हें इकट्ठा किया और बहुत ही कम खर्चे में, हमने Mars तक पहुंचने में सफलता पाई है और बहुत ही कम खर्चे में। खर्चे में मैं कहूं तो Hollywood की फिल्म इससे महंगी होती है। Hollywood की फिल्म से भी कम खर्चे में Mars Orbiter ने 65 करोड़ किमी यानि 650 Million kilometers की यात्रा पूरी की है और वहां तक पहुंचे हैं और दुनिया में भारत पहला देश है कि जो पहले ही प्रयत्न में सफल हुआ है। अब तक किसी ने छह प्रयास के बाद, किसी ने आठ प्रयास के बाद सफलता मिली। भारत एक ऐसा देश है जिसको पहले ही प्रयास में सफलता मिली है तो talent और locus, चीजों को बनाने का समार्थ्य, ये दुनिया को हमने परिचय दिया है।जो Manufacturing Sector के लोग हैं, उनको कुछ और देखने की जरुरत नहीं है, वो सिर्फ हमारे Mars Orbiter की Case Study करें। Case Study करके वो तय कर सकते हैं कि हां, हम हिंदुस्तान जा सकते हैं, कि इतना बड़ा Achievement इतने कम पैसों में इतने Skilled Manpower के द्वारा हो सकता है तो जो product लेकर के आया है, वो भी कर सकता है, इसलिए “Make in India” के विषय के लेकर के हम आगे बढ़ रहे हैं, Skill Development पर हम बल दे रहे हैं।

हम कानून काफी बदलाव ला रहे हैं, हमने Labour Reforms किए हैं। मैं जानता हूं कि भारत जैसे देश में Labour Reforms के initiatives राजनीतिक दृष्टि से अनुकूल नहीं होते हैं लेकिन जनता ने जो हमें जनादेश दिया है और उसको देखते हुए जो मुझे लगता है कि मुझे देश को विकास की दिशा में ले जाना मेरा दायित्व है और राजनीतिक विषयों पर अनुकूल न हो ऐसे विषयों पर भी हम जिम्मेवारी के साथ कदम उठा रहे हैं। ultimately यह सबके फायदे में जाने वाले हैं, किसी का नुकसान हो, यह हम नहीं चाहते, हम राज्यों को भी authorize कर रहे हैं कि आपको अपने राज्य के अनुसार labour reform करना है तो कीजिए तो! Central Government के पास आएगा तो हम आपका पूरा सहयोग देंगे। केंद्र और राज्य के बीच में भारत एक federal structure है। हमने Team India की एक कल्पना कर-करके Governance को आगे बढ़ाया है। केंद्र और राज्य साथ मिलकर के काम क्यों न करें? अगर कोई company invest करने आती है, वो आकर के दिल्ली में बात करती है, अब दिल्ली के पास खुद तो कुछ करना होता नहीं, उसने किसी न किसी राज्य को ही भेजना होता है लेकिन, राज्य के लोगों को पता नहीं होता तो proper respond नहीं करते लेकिन, केंद्र और राज्य एक टीम के रूप में कार्य करते हैं तो किसी भी व्यक्ति को रहता है कि भई मैं दिल्ली जाऊं या किसी राज्य के headquarter पर जाऊं, मेरे काम को कभी रुकावट आने वाली नहीं है, एक विश्वास का माहौल पैदा होगा और इसलिए Team India के इस mood को लेकर के हमने अपनी पूरी कार्यशैली में बदलाव लाया है और उस बदलाव को लेकर के हम आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे है।

उसी प्रकार से “Ease of Business”, मैं जनता हूँ, मैं कभी-कभी कहता हूं कि हमारी हिंदू mythology में कहते हैं कि चार धाम की यात्रा करो तो मोक्ष मिल जाता है लेकिन, हमारे यहां फाइल 32 जगह भी यात्रा करे तो उसे मोक्ष नहीं मिलता है । तो मैंने उनको कहा कि फाइल को मोक्ष जल्दी कैसे हो? और इसके लिए हमने process को बदला है। हमारे यहां कोई form भरना है तो पराने जमाने के 10-10 पेज के form भरने पड़ते थे और हर काम के लिए अलग-अलग form भरने पड़ते थे। मैंने कहा यह अब नहीं होगा। सब मैंने मेरे अफसरों को कहा कि एक पेज का form बना दीजिए और दोबारा किसी से कुछ मांगईए मत। यानी लोगों को लगता है बहुत छोटी-छोटी चीजें हैं लेकिन हम सबको मालूम है। ताला कितना ही बड़ा क्यों न हो लेकिन छोटी चाबी से ही खुल जाता है और इसलिए छोटी-छोटी चीजें बहुत बड़े रास्ते खोल देती है और उसी को बल देकर के हम आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं।

हमने Foreign Direct Investment के लिए बड़े महत्वपूर्ण initiatives पहली ही बजट में ले लिए हैं। भारत का रेलवे तंत्र लोगों का ध्यान नहीं गया है लेकिन, आर्थिक प्रवृत्ति का इससे बड़ा कोई क्षेत्र नहीं हो सकता है। ये दुनिया की second largest line है, इतना बड़ा रेलवे का काम है, हम उसमें private investment चाहते हैं। कई सालों से यह बात होती थी, मुझे यहां पर कई बड़े industrial houses ने बताया कि साहब हम सुनते तो आए हैं लेकिन हुआ कुछ नहीं। मैंने कहा साहब आप सुनते आए लेकिन अब हो चुका है। हमने बजट में, कानून में, officially रेलवे में 100% allow कर दिया है। 100% FDI को allow करके हम रेलवे को upgrade करना चाहते हैं, हम रेलवे की speed बढ़ाना चाहते हैं , हम रेलवे को expand करना चाहते हैं, हम हिंदुस्तान के अंदर transportation के लिए main, main जो उसकी आत्मा है, उसको रेलवे द्वारा करना चाहते हैं, हम पूरा convert करना चाहते हैं। मैं मानता हूं कि trillions and trillions का business अकेले भारत की रेलवे से जुड़ा हुआ है और दुनिया में वो कोई ऐसा बड़ा काम नहीं है, जिसके लिए Rocket Science की आवश्यकता हो, एक अच्छे कारखाने के लोग आ जाएं, इस काम में जुड़ सकते हैं।

मेरे पास manpower है, आपके पास पैसे हैं, मेरे पास talent है, आपके पास business का experience है, दोनों को मिलाकर के हम इस चीज को कर सकते हैं और 125 करोड़ लोगों की जिंदगी में बदलाव इन्हीं चीजों से आ सकता है। इन चीजों को लाने का प्रयास कर रहे हैं। हम Environment के लिए भी इतने ही conscious हैं। मैं जब गुजरात में मुख्यमंत्री था तो Gujarat Government was the fourth government in the world जिसका Climate Change का अपना अलग दृष्टिकोण था और हमने Climate Change को बहुत बढ़ावा दिया था। मैं जब गुजरात में था, हमारे देश की 80 प्रतिशत कपड़ा उत्पादन जिस राज्य में होता है .. मैं जिस राज्य में मुख्यमंत्री था, में होता था। मैंने हर उस काम पर बल दिया, हर एक काम Environment को ध्यान में रखते हुए किया।

गंगा की सफाई का काम उठाया है। 2500 Kilometre लंबी गंगा भारत की 30% जनसंख्या को प्रभावित करती है। 30-40% जनसंख्या, Probably उसका जीवन उससे जुड़ा है, उनके गांवों का आर्थिक आधार उससे जुड़ा है, पूरा हमारा agriculture sector गंगा के आधार पर चला हुआ है। North belt में, उत्तराखंड हो, उत्तरप्रदेश हो, बिहार हो, पश्चिम बंगाल हो ये सारा इलाका ऐसा है, जहां गरीबी के साथ लड़ाई लड़ना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उस काम को लेकर के हम आगे बढ़े हैं और गंगा की सफाई तो होगी, environment का protection होगा लेकिन at the same time वो वहां के गरीब लोगों की economy को generate करने का एक बहुत बड़ा आधार बनने वाला है और मैं गंगा की सफाई के लिए एक बड़ा जनांदोलन खड़ा करने वाला हूं।

विश्व भर में जो Environmentalist लोग हैं, उन्हें भी मैं निमंत्रण देने वाला हूं। मैं जो गंगा के प्रति आस्था रखने वाले लोग हैं, उनको भी निमंत्रण देने वाला हूं। लेकिन जो काम, कठिन से कठिन काम है उसमें भी Environment Friendly Development कैसे हो? उस पर भी हम बल दे रहे हैं। तो एक प्रकार से आर्थिक विकास, पर्यावरण की चिंता और नौजवानों की Skill Development की बात, रोजगार की संभावनाओं को बढ़ाने का प्रयास, Governance में सुधार लाना, Effective Governance की दिशा में प्रयास करना इन सारी बातों को लेकर के हम चल रहे हैं।

लेकिन उनके साथ-साथ आज दुनिया में कोई देश अपनी मनमर्जी से नहीं चल सकता है, विश्व बदल चुका है, हमें वैश्विक प्रवाहों के बीच रहना है, वैश्विक प्रवाहों के साथ संतुलन बनाकर रहना है, वैश्विक प्रवाहों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना है। कोई देश अपनी मनमर्जी का मालिक नहीं रह सकता है और भारत को drive करने वाली जो philosophy है और आखिरकर जो देश philosophy के प्रकाश में चलते हैं वो लंबे अर्से तक sustain करते हैं, जो ideology के प्रवाह में चलते हैं, वे कभी न कभी लुढ़क जाते हैं। Ideology की सीमा होती है जबकि philosophy असीम होती है और इसलिए भारत की जो philosophy है, “वसुधैव कुटुंबकम” की जो Philosophy है, उसी philosophy को लेकर के हम चलने वाले लोग हैं और इसके आधार पर जब आगे बढ़ना चाहते हैं तब हमारे पड़ोसी देशों के साथ हम मैत्री चाहते हैं।

भारत में कई प्रधानमंत्री के शपथ समारोह हुए लेकिन, मैं ऐसा पहला प्रधानमंत्री था जिसके शपथ ग्रहण समारोह में जिसमें SAARC देशों के सभी प्रमुख मौजूद थे। SAARC देशों को हमने निमंत्रित किया था, मेरे इतने कम समय में आते ही हमारे पड़ोसी देशों की मुलाकात थी। नेपाल हमारे देश से 17 साल से कोई गया ही नहीं था। मैं नेपाल गया, भूटान गया, मैं अपने पड़ोसी देशों से दोस्ती बनाने में लगा हुआ हूं और मैं मानता हूं, हम सब मिलकर के एक-दूसरे के दुख बांटे।

अभी हमारे यहां जम्मू-कश्मीर में बाढ़ आई, काफी लोगों का नुकसान हो गया लेकिन उस बाढ़ का प्रकोप POK में भी था तो मैंने पाकिस्तान को publicly कहा था कि हम कश्मीर में मदद कर रहे हैं उधर की तरफ भी, सीमा पार लोग परेशान हैं, हम मानवता के आधार पर उनकी मदद करना चाहते हैं। इस भूमिका से ही दुनिया में जिया जा सकता है। दोस्ती जितनी सघन होगी उतनी ही सुविधा बढ़ेगी, यह हमारा मत रहा है। मैंने announce किया है कि हम एक SAARC Satellite उपग्रह तैयार करेंगे, मैंने हमारे scientists को already यह काम दे दिया है। उन SAARC Satellite के माध्यम से, हमारे जो SAARC देश हैं उनके education में, health में, weather prediction में मुफ्त में ये गरीब देशों को, हमारे साथी देशों को मदद करेगा। तो एक SAARC Satellite की कल्पना भी हमने की है। तो हम ऐसे initiatives ले रहे हैं ताकि हमारे साथी सभी SAARC देश मिलकर के आगे बढ़ें और दुनिया में गरीबी उन्मूलन की जो प्रथा चल रही है, उसमें भी हम कुछ योगदान दे सकें।

हमारे पास चीन भी हमारे पड़ोस में है, सारी दुनिया मानती है कि 21वीं सदी एशिया की सदी है. कुछ लोग मानते हैं हिंदुस्तान की है, कुछ लोग मानते हैं एशिया की है, कुछ लोग मानते हैं चीन की है लेकिन इसमें कोई दुविधा नहीं है कि 21वीं सदी किसकी है। सबको मालूम है कि यह या तो हिंदुस्तान की है या चीन की है।

लेकिन, इस विषय में मैं पूरे विश्व को हिंदुस्तान से एक benefit है। तीन चीजें हमारे पास हैं, जो दुनिया के पास नहीं है। दुनिया के किसी देश के पास ये तीन चीजें एक साथ नहीं हैं। किसी के पास एक होगी, किसी के पास दो होगी लेकिन किसी के पास एक साथ तीन चीजें नहीं होगी। ये हैं, Democracy, Demographic Dividend, Demand, ये तीनों चीजें हमारे पास हैं, लोकतंत्र के विषय में, सबसे पुराना लोकतंत्र अमेरिका गर्व कर सकता है, विशाल लोकतंत्र के नाते भारत इसका गर्व कर सकता है। Demographic Dividend 65% population 35 के नीचे है और Demand 125 करोड़ लोगों का देश कितनी बड़ी Demand है। ऐसी संभावनाओं वाला कोई एक देश नहीं है और इसलिए संभावनाएं सबसे ज्यादा है कि भारत बड़े सामर्थ्य के साथ खड़ा होगा और विश्व के कल्याण के काम, भारत आएगा, इसमें कोई शक की बात नहीं है।

मैंने पिछले दिनों में, आने के बाद, इसी एक महीने में, सितंबर में ही मैं, जापान हो आया, मैं ऑस्ट्रलिया से मिल लिया, चीन से मिल लिया और आज अमेरिका से मिल लूंगा और UN में भी, सभी बड़े-बड़े महापुरुषों से मिलना हो गया, इतनी तेजी से वैश्विक फलक पर काम करने का काम भारत ने आरंभ किया है और हम पूर्ण विश्वास के साथ कह सकते हैं कि हमें मिल-जुलकर रहना होगा, कंधे से कंधा मिलाकर रहना होगा, कठिनाइयों के बीच भी संवाद और सहअस्तित्व को स्वीकार करके चलना होगा। हम कठिनाइयों का रोना-रोने बैठते हैं तो हम आगे नहीं बढ़ सकते। जैसे चीन है, चीन के विवाद आज भी हैं, उसके बावजूद हमने चीन के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को और बढ़ाया है, हमने राजनीतिक संबंधों को और बढ़ाया है।

हमारी कोशिश है, एक संकट जिसको लेकर के सारी दुनिया परेशान है, भारत 40 साल से परेशान है वो है Terrorism। Terrorism के संकट को बड़ी गंभीरता से लेने की आश्यकता है और मुझे दुख के साथ कहना पड़ता है कि दुनिया के बहुत देश वो Terrorism के घिनौने रूप को कभी समझ नहीं पाए। मेरा अपना अनुभव बताता है, मैं 1993के कालखंड में यहां के State Department में आया था, मैं बात करता था और भारत के Terrorism की चर्चा करता था तो State Department के लोग मुझे समझा रहे थे कि ये तो आपका Law and Order problem है। मैं उनका समझा रहा था, लेकिन वो कह रहे थे कि Law and Order problem है। वो कहते थे, आपको सरकार ठीक चलाना आता नहीं है, आपको अनुभव नहीं है। इसके बाद मैं उनको समझाता रहा हमारा 15 मिनट का समय तय हुआ था, लेकिन डेढ़ घंटे तक बात चलती रही लेकिन मैं उन्हें समझा नहीं पाया।

लेकिन जब मैं 1993 में आया, उन्होंने सामने से मुझे कहा, आईए; आपके साथ बैठेंगे, बात करेंगे तो मैं फिर से State Department में गया और इस बार वो मुझे समझा रहे थे कि Terrorism क्या होता है? वो इसलिए समझा रहे थे क्योंकि उस समय यहां Trade Centre पर बम फूट चूका था यानी जब तक हमारे ऊपर बम विस्फोट नहीं होता तब तक हमें Terrorism का पता नहीं लगता। दुनिया Terrorism से बहुत परेशान है, हमने 40 साल तक इसे भुगता है। Terrorism की कोई सीमा नहीं होती, न उसका कोई देश होता, वो कब किस देश में जाकर के आ धमकेगा, उसका अनुमान लगाना कठिन है। एक ऐसी विकृति है जिसकी हम कल्पना नहीं कर सकते हैं, आप कल्पना कर सकते हैं, टीवी पर जब हम देखें किसी Journalist का गला काटा जा रहा है, यह 21वीं शताब्दी की मानव सभ्यता के साथ कितना घिनौना काम है ये, कितनी बड़ी चुनौती है ये, किसी को भी हिला देने वाली चुनौती है ये और जब तक हमारी मानवता जगती नहीं है, राजनीतिक प्लस-माइनस के हिसाब से Terrorism का इंसाफ नहीं हो सकता।

Terrorism ये मानवता का दुश्मन है और जो भी मानवता में विश्वास करते हैं, उन सबको इकट्ठा होने की आवश्यकता है। देश की जाति, बिरादरी, धर्म, संप्रदाय सबसे ऊपर उठकर के मानवता में विश्वास करने वाले लोगों का एकत्र आना बहुत जरूरी है और तभी जाकर के हम Terrorism को चुनौती दे सकते हैं और इसलिए Terrorism को देने के लिए साधन कुछ भी हो, रास्ता यही एकमात्र है, इसी रास्ते पर चलना पड़ेगा। दुनिया को यही आहवान होना चाहिए, आइए; मानवतावाद में विश्वास रखने वाले हम साथ चलेंगे। Terrorism को हम अलग-अलग तराजू में नहीं तौल सकते Good Terrorism और Bad Terrorism ऐसा नहीं कर सकते। मुझे पसंद न आने वाले देश में Terrorism है तो चलता है, चलने दो, आंख बंद करने दो, मुझे पसंद न आने वाले देश में Terrorism चलता है, ऐसा है तो अच्छा है, ऐसे नहीं चल सकता। Terrorism,Terrorism होता है उसको Good Terrorism और Bad Terrorism में कैद कर दिया तो वो Terrorist उसका सबसे ज्यादा फायदा उठाएंगे।

आज जो पश्चिम एशिया का हाल देख रहे हैं। संपत्ति की कमी नहीं थी, धन की वर्षा हो रही थी, पिछले तीन दशक में आर्थिक समृद्धि पश्चिम एशिया तेज गति से आगे बढ़ा है। लेकिन क्या हालत आकर के खड़ी रह गई और इसलिए मानवता के दुश्मन की जो ये गतिविधि है, उसके खिलाफ विश्व को एक आवाज बनकर के कंधे से कंधा मिलाकर के लड़ाई लड़नी पडे़गी और तब जाकर के हम मानवता की रक्षा कर पाएंगे।

मानवता आखिरकर तत्व ज्ञान के आदर्शों पर चलती है, जिसके आधार पर हम सब के कल्याण की कल्पना कर सकते हैं, तो हम सबके कल्याण की कल्पना करते हैं, हम उस परंपरा और Philosophy की बात कर रहा था, हम वो लोग है जिन्होंने वेदकाल से मंत्र सीखा था। “सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत्।।“ हम उस परंपरा से निकले हुए लोग हैं, जिसमें हम चाहते हैं सब सुखी हों, सब शारीरिक रूप से स्वस्थ हो, सब prosperous हों, ये Philosophy लेकर के हम बड़े हुए हैं सिर्फ भारत में रहने वाले लोग सुखी हों, ऐसी कल्पना भारत की नहीं है और इसलिए विश्व कल्याण के मार्ग को प्रशस्त करने वाले लोग हैं, उस विचार को लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं।

भारत बहुत तेजी से आगे बढ़ेगा, ये मेरा विश्वास है, हम Tourism को बढ़ावा दे रहे हैं। मैं भी आप सबको निमंत्रित करता हूं, आइए; भारत देखने जैसा देश है और मेरा तो ये मंत्र रहा है “Tourism Unites and Terrorism Divides”। इसलिेए हम मिले-जुले, जाएं, दुनिया देखें, जितना ज्यादा उसको करेगें, उतना ज्यादा लाभ मिलेगा।

मुझे आप सबके बीच आने का अवसर मिला, मैं आप सबका आभारी हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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अमित कुमार/ हरीश जैन / मुस्तकीम खान

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