नमक न खाएं ।

नमक न खाएं ।

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पतंजलि योग ग्राम से डॉक्टर नागेंदर कुमार नीरज जी द्वारा बताया गया

नमक

जमीन पर डाल दो तो जमीन बंजर
घास तक मर जाती है

जख्म पर डाल दो तो भयानक पीड़ा

व्ही नमक हम अपने शरीर में डालते हैं प्रतिदिन भर भर के ।

असल में यह समझने की बात है की नमक 2 तरह के होते हैं

1 प्राकृतिक खाद्य नमक
जो प्राकृतिक फल सब्जी में होता है और शरीर को मिलता है। प्राकृतिक रूप से भोजन पकाने से और खाने से यह नमक हमें प्राकृतिक रूप से मिल जाता है। हमें मानव निर्मित नमक या बाहर से किसी भी प्रकार के नमक की आवश्यकता ही नही रहती।

2 अप्राकृतिक अखाद्य नमक (सफेद नमक) जब हम फ्लो और सब्जियों को प्राकृतिक रूप में न खाकर उन्हें ज्यादा मसालेदार या पकाकर खाते हैं तो शरीर को प्राकृतिक नमक की कमी हो जाती है। नतीजा हमें बाहर से नमक लेना पड़ता है। जो नुक्सान ज्यादा और फायदा कम करता है ।

पहले जमाने में विष कन्या जो होती थी वह नमक के माध्यम से ही तैयार की जाती थी। वह इतनी अधिक नमक खाती थी की उनके सम्पर्क में आने वाला व्यक्ति जीवित नही बचता था।

नमक कोई भी हो
सफ़ेद
काला या
सेंधा
यह सब बाहरी अखाद्य नमक हैं।

स्वस्थ रहना है तो प्राकृतिक रूप में फल सब्जियों का सेवन करें व् शरीर को प्राकृतिक नमक की पूर्ति करवाएं ।

चीनी
मैदा
पर अगली पोस्ट ।

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