जनता की समझ

जनता की समझ

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एक छोटी सी कहानी से उम्मीद है बात समझ आएगी ।

बचपन में माँ ने डांटा डपटा और जबरदस्ती विद्यालय भेजा । हमको तब समझ नही थी की
क्या विद्यालय में मिलेगा
किसलिए जाना जरूरी
किसलिए पढाई जरूरी
क्यों मैं खेल की तरह पढाई पर भी ध्यान दूँ

लेकिन जब आज 35 की उम्र होने पर पीछे मुड़कर देखता हूँ तो लगता है की हाँ अगर मेरे माता पिता ने वो सब न किया होता तो आज मैं यहां न होता ।

यानि हमको हर बार उसी वक्त समझ आ जाये जब वो घटित हो रही होती है , यह काफी कम लोगो में गुण होता है ।

ज्यादातर तो आप और मेरे जैसे लोग बाद में ही समझ पाते हैं की वो हमारे भले के लिए ही था ।

उसी प्रकार जो लोग अज्ञानतावश 65 साल कांग्रेस के राज में नही रोये न चिल्लाये वो कृपया अब 5 साल मोदी के पुरे होने से पहले न चिल्लाएं ।

ज्यादा से ज्यादा कांग्रेस के 70 साल मान लेना ।

लेकिन एक उम्मीद एक आखरी विश्वास मोदी से है ।

अपनी अज्ञानता या दूरदर्शिता की कमी से मूर्खता करना तुरन्त बन्द कीजिये क्योंकि आपको बात देर से ही समझ आएगी । यह प्राकृतिक है इसमें आपका दोष नही है ।

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