गेहूं के जवारे

गेहूं के जवारे

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मित्रों, आप ने नवरात्रे में अपने घर पर कलश पूजा की होगी, जिसमे पहले दिन गेहूं को रेत में बोया जाता है, और 10 वे दिन उनको काटकर कानो पर रखकर दशहरा पूजा जाता है.

क्या आप जानते हैं की आज भी भारत के दक्षिण में लोग गेहूं के जवारे (१० दिन की पौध) का रस पीते हैं, ऐसा सनातन धर्म में कई युगों से होता आ रहा है, बस बदलाव इतना हि हुआ है की दशहरा पर लोग उसका रस पीना भूल गए. 




क्या आप जानते हैं की गेहूं के जवारे में सबसे ज्यादा chlorophyl क्लोरोफिल पाया जाता है. यह हरे रंग की हर वनस्पति में होता है लेकिन गेहूं के जवारे में सबसे अधिक. 

हम हर छोटी बड़ी बीमारी होते ही डॉक्टर के पास जाते हैं लेकिन हम ये भूल जाते हैं कि नेचरोपेथी से ईलाज करना कितना लाभदायक होता है। ऎसे ही हम गेहूं के जवारे उगा कर और उसका रस पी कर कई रोगों को दूर भगा सकते हैं।

गेहूं के जवारे रक्त की कमी (Anaemia), उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure), सर्दी (Cold) , अस्थमा (Asthma), साइनस (Sinus), पाचन संबंधी रोग (Digestion problems), अल्सर (Ulcer) , कैंसर (Cancer) , आंतों की सूजन , दांत संबंधी समस्याओं (Tooth Problems) , चर्म रोग (Skin Diseases) , किडनी (Kidney)  और थायरॉइड (Thyroid) ग्रंथि की समस्या में फायदा करते हैं।

इसके जूस में मौजूद क्लोरोफिल काफी फायदेमंद होता है। यह शरीर से विषैले पदार्थो को बाहर निकालकर शरीर की सफाई करता है। इससे पाचन प्रक्रिया में सुधार होता है। ये आवश्यक नहीं कि आप बीमार हों तो ही इसका रस पीएं। अब हर दिन इसका सेवन कर सकते हैं, ये गुण ही करेगा।

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उगाने की विधि – 

100 ग्राम गेहूं लें (प्रति व्यक्ति)
उनको 24 घंटे के लिए पानी में भिगो दें.
उसके बाद उन्हें एक मोटे सूती कपडे में बांधकर अँधेरे वाली जगह में 12 घंटे के लिए रख दें, उनमे अंकुरण हो जायेगा.
अब कोई भी साधन जिसमे ३ इंच मिटटी आ सके उसको आप गमले के रूप में प्रयोग कर सकते हैं.
रेतीली मिटटी ज्यादा उपयोगी रहेगी, मिटटी पर गेहूं बिछा दें व् उसके ऊपर हलकी सी मिटटी डालकर धक् दें, हल्का सा पानी का छिडकाव कर दें. ज्यादा पानी मत डालियेगा. इसे छाया में रखें। सूर्य की धूप कुंडे पर ज्यादा और सीधी ना लगे, इसका ध्यान रखें। इसमें रोजाना पानी दें। आठ से नौ दिनों में इन जवारों को काटकर प्रयोग कर सकते हैं। ध्यान रहे कि बर्तन मिट्टी का ही हो। 

ऎसे करें प्रयोग – जवारे काटने के तुरन्त बाद इन्हें धो डालें। फिर इन्हें पानी मिलाकर मिक्सी (बेहतर होगा मिक्सी के स्थान पर सिल बट्टे पर चटनी बना ले और उसमे थोडा सा पानी मिलकर पि जायें) में ब्लैंड कर लें। इसमें शहद या अदरक भी डाल सकते हैं, छानकर इस जूस को पीएं। इसे हमेशा ताजा (निकलने के २० मिनट के अन्दर) ही पीएं क्योंकि इसके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।

वैसे दिन में किसी भी समय जवारों का रस पीया जा सकता है, लेकिन खाली पेट यह रस पीने से ज्यादा फायदा होता है। रस लेने के आधा घंटा पहले और लेने के आधे घंटे बाद तक कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए। जवारों के रस में नमक या नींबू ना डालें।


व्यसक लोग 50 से 100 ml जूस प्रतिदिन पियें.

छोटे बच्चों को २ बूँद उनकी जीभ पर डालकर दे सकते हैं. 

इसको सिर्फ 21 दिन करने से हि आपको स्वयं अनुभव होगा की आप की बीमारी में अद्भुत लाभ हो रहा है, और अब आप जल्दी बीमार नहीं होंगे. (21 दिन करने के लिए पहले 10 दिन प्रतिदिन 100 ग्राम गेहूं एक गमले में बोयें, 11 वे दिन से गमले रोटेशन में आ जायेंगे) सिर्फ 21 दिन नही करना है, आजीवन इसको करने से लम्बी आयु व् निरोगी शरीर का लाभ प्राप्त करें. 

अपने शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए इससे आसान व् सस्ता विकल्प कोई नहीं हो सकता. 
तो हो जाइये शुरू और रहिये स्वस्थ..

आपका स्वास्थ्य, भारत का पैसा विदेश में जाने से रोकेगा, भारत का रुपया भी मजबूत होगा और हम सब मिलकर भारत के लिए लम्बे समय तक काम कर सकेंगे..

जय भारत
नवनीत सिंघल
राजीव दीक्षित भारत निर्माण अभियान
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