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Gandhi-Killed-by-Nehru
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गांधी की हत्या नेहरु ने करवाई थी… आइये समझते हैं…

 

आपके गाँव में लुटेरों (गोरी चमड़ी) ने कब्जा कर लिया

आपकी बहु  बहन बेटियों की इज्जत लुटी

आपके धन दौलत सारे सामान को लूट लिया

जब तक आप सम्भाल पाए और इक्कठे हुए और उन चंद लुटेरों से लड़ने को तब लुटेरों को लगा की अब यहाँ ज्यादा दिन नहीं रह पायेंगे, तो ऐसा क्या किया जाए की हमारी लूट भी जारी रहे और लोगों को इसकी भनक भी न लगे…

तब उन लुटेरों ने बड़ी कूटनीति से दुसरे गाँव में कुछ चमचे चुने जो की काले रंग (गोरी चमड़ी नही) के थे, उनको तैयार किया, उनका अपने अखबार द्वारा बहकान किया, उन्हें ऐसा प्रायोजित किया की जैसे वो लुटेरों के विरुद्ध खड़ी हुई गाँव की जनता का प्रतिनिधि बन जाये..

उस व्यक्ति के साथ साथ कुछ और व्यक्ति तैयार किये जिनका काम दूसरा था..

एक व्यक्ति जो गाँव वालों से ऐसे ऐसे वादे और बातें करेगा जो की गाँव वाले सुनना चाहते हैं

एक व्यक्ति जो गाँव के जात धर्म आधार पर नेत्रित्व करके गाँव के टुकड़े करवाएगा

एक व्यक्ति जो वादे कोई नही करेगा बल्कि वादे करने वाले व्यक्ति के साथ घूमकर अपनी छवि बनाएगा जनता में.

 

अब उन सभी को जनता के बिच छोड़कर एक आखरी दिखावा किया

की आपके इन नेताओं को हम यह गाँव देकर जा रहे हैं..

 

जनता को लगा आज़ादी आ गयी

और अब जो वादे किये गए थे वो सब पुरे होंगे लेकिन यह क्या जिसने वादे किये उसने तो कोई पद ही नहीं लिया बल्कि उसने अपने साथ के नेहरु को जिसने ऐसे कोई वादे नही किये थे उसको नेता बना दिया देश का … और जब उस गाँधी का उपयोग पूर्ण हुआ तब उसको मरवा दिया नेहरु ने या अंग्रेजो ने …

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जिन्ना ने पाकिस्तान बनवा कर देश के टुकड़े कर ही दिए थे…

अब अंग्रेज तो चले गये लेकिन उनकी लूट जारी रही

क्रांती खत्म हो गयी क्यूंकि लोग इस भ्रम में रहे की आज़ादी आ गयी … और अंग्रेज चले गये ..

अपना राज है लेकिन उस लूट का रूप बदल चूका था ..

 

अब लूट होती थी दुसरे तरीके से..

भारत का 1 रुपया जो आज़ादी के समय 1 $ या 1 पौंड के बराबर था उसको 65 वर्षो में इतना गिराया की आज 65 रूपये सिर्फ 1 $ और 100 रुपया सिर्फ 1 पौंड है

इसका अर्थ है भारत से जो भी चीज बहार जाएगी वो 65 गुना निचे के दाम में जाएगी… और जो विदेश से भारत आएगी वो 65 गुना महंगी होकर आएगी…

पढ़े लिखे लोग इसको सही मानते हैं क्यूंकि उन्होंने यही पढ़ा है और जो पढ़ा है कभी उस पर सवाल नही उठाया …

सवाल यह की किसने बनाई ये एक्सचेंज रेट की सिस्टम और क्यूँ .. किसको इससे फायदा हुआ और किसको इससे नुक्सान ??

क्या ये लूट का पढ़ा लिखा सिस्टम नहीं है ???

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