कालाधन अर्थव्यवस्था पर मोदी की चोट

कालाधन अर्थव्यवस्था पर मोदी की चोट

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दोस्तों पिछले दिनों आपने समाचारों में देखा होगा की jeweller लोग स्ट्राइक कर रहे थे, आइये जानते हैं क्या है असली कारण

2012 में यूपीए सरकार ने काले धन पर एक श्वेत पत्र जारी किया था जिसमें देश के अंदर मौजूद काले धन को ज़्यादातर ज़मीन-जायदाद औऱ सोने में निवेश किया हुआ पाया गया था.

तो हुआ यूँ की मोदी सरकार ने इन दोनों कालेधन के अड्डो को ध्वस्त कर दिया कुछ इस तरह से :-

  1. real एस्टेट में circle रेट बढ़ा दिए जिससे की प्रॉपर्टी का लेन देन अब बढे हुए मूल्य पर हो और टैक्स पुरे पैसे पर पड़ेगा. साथ ही लेने और बेचने वाले को 1 नंबर की कमाई से यह सब खरीदना होगा तो 2 नम्बर की रकम का इस्तेमाल कम कर पायेगा. (असल में आप जानते ही हैं की बाज़ार भाव और circle रेट में जमीन आसमान का अंतर था जो अब काफी कम हुआ है और अभी बिलकुल समाप्त किया जायेगा)
  2. प्रॉपर्टी का लेन देन cash में नहीं होगा
  3. TCS कटेगा प्रॉपर्टी के बेचने पर
  4. JEWELLERY में बिना बिल के समान अगर पकड़ा गया तो 45 % टैक्स देना पड़ेगा (SMUGGLING का खरीदा हुआ सोना पकड़ा गया तो नुक्सान ज्यादा)
  5. नये खरीद को बिल के बिना नहीं खरीद सकते ( SMUGLLING का खरीदा सोना बिना बिल के बेच नहीं सकते )
  6. नतीजा सोने की मांग में कमी आएगी, जिससे भारत को सोने पर कम खर्च करना पड़ेगा
  7. सोने के दाम में गिरावट आएगी
  8. लोग सोना खरीदेंगे नहीं तो 2 नंबर का पैसा सोने में लगेगा नहीं .

यानी अब real एस्टेट और ज्वेलरी दोनों में काला धन निवेश करने में बहुत ज्यादा परेशानी होगी.

सोना काला धन रखने के लिए है भी तो बहुत सहूलियत की चीज़. 30 लाख का कैश सिर्फ़ एक किलो सोने में तब्दील हो जाता है. कहीं भी रखा जा सकता है और काले धन के लेन-देन में भी काम आ सकता है. 30 लाख कैश अगर हज़ार-हज़ार के नोट में भी रखेंगे तो 30 गड्डियों की जगह घेरेगा. यानी पूरा लॉकर भर जाएगा.

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यानी ख़रीदने वाले भी कोई टैक्स न दे और सोने के व्यापारी भी टैक्स न दें. सबकुछ कैश में चलता रहे. एक्साइज़ ड्यूटी से ये वाला काला कारोबार तो चौपट हो सकता है. ये ज़रूरी नहीं कि सारे गहना व्यापारी इसीलिए हड़ताल पर गए हों और ये भी बिलकुल नहीं कहा जा सकता है कि सभी ज़्यादातर कैश का ही काला धंधा करते हैं. लेकिन ये भी तो हक़ीकत है कि जो करते हैं वो ये कहेंगे तो नहीं कि एक्साइज़ ड्यूटी के खिलाफ़ इस वजह से हैं.

अगर पूरा हिसाब-किताब देना पड़ गया, तो जो व्यापारी अब तक ईमानदारी से बिल नहीं बनाते उनको न सिर्फ एक्साइज़ ड्यूटी देनी पड़ेगी बल्कि उनका मुनाफ़ा भी फिर उस हिसाब से ज़्यादा निकलेगा औऱ उनको उस पर इनकम टैक्स भी देना पड़ेगा. और बिल बनेंगे तो राज्य सरकार को उनपर वैट भी देना पड़ेगा.

यही चीज़ ख़रीददार पर लागू होगी. बिल बनेगा तो दो लाख से ज़्यादा के बिल पर पैन नंबर देना होगा. यानी वो भी काली कमाई से नहीं ख़रीद पाएगा.काले धन से सोना लोग नहीं ख़रीद सकेंगे तो सोने की बिक्री में ही कमी आ सकती है. बिक्री में कमी आई तो हर साल देश में हज़ार-हज़ार टन सोना इंपोर्ट नहीं करना पड़ेगा.

यानी देश के बहुत सारे डॉलर बच सकते हैं. डॉलर ख़र्च नहीं होंगे तो रुपया मज़बूत हो सकता है. रुपया मज़बूत होगा तो सिर्फ महंगाई ही क़ाबू में नहीं आएगी देश की अर्थव्यवस्था ही मज़बूत हो सकती है.ये सब कयास ही हैं, लेकिन कुल मिलाकर लगता नहीं कि ये संग्राम सिर्फ़ 1% एक्साइज़ ड्यूटी को लेकर है.

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4 COMMENTS

  1. काला धन रोकने के लिए अगर सरकार कृतसंकल्प है तो सबसे पहले बड़े नोट बंद करें। ५० /- के ऊपर के सारे नोट बंद।

  2. सोने के व्यवसाय पर पहले से ही बिक्री कर/वैट लगा हुआ है। अगर उत्पाद शुल्क अलग से लगायेंगे तो क्या अन्तर आयेगा ? अगर रसीद पहले नहीं कट रहा था तो उत्पाद शुल्क या और किसी नये कर के लगने से क्या रसीद कटने लगेगा ?

    • आपने ध्यान से नहीं पढ़ा..
      हम तो यह कह ही नहीं रहे की यह 1% टैक्स की वजह से दिक्कत है किसी को ..

      असल मुद्दा कुछ और है जिसको लिखा है..

      ध्यान से पढ़ें व् फिर कमेंट करें..

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