शेयर करें

कुछ सवाल आज पूरी दुनिया के लिए
1 पहला सवाल उस पूंजीवादी व्यवस्था पर है जिसके दिए हथियारों के बल पर विश्व में इस्लामी आतंकवाद का विस्तार हुआ। जो दुनिया भर में युद्ध करवाकर खून खराबे के खेल से ही फलती फूलती है।

2 दूसरा सवाल उस खटिया सोच का है जो मनुष्य को जानवर बना देती है। अपने ही मजहब के शिया मुसलमानों को कसाई की तरह निर्दयता से काटते सुन्नी कौनसी दुनिया या धर्म बनाना चाहते हैं। अमन का मजहब कहकर प्रचारित किया जाने वाला इस्लाम सिर्फ एक नाम बनकर रह गया है। असलियत कुछ और ही है। क्या हिन्दू सिख जैन या बुद्ध जो की 4 समुदाय एक ही धर्म सनातन के टुकड़े है वो ऐसा करते हैं ? वो धर्म के ठेकेदार नही बनते कभी न इतिहास में न वर्तमान में। लेकिन इस्लाम में शिया और सुन्नी एक दुसरे के खून के प्यासे हैं। इसाई भी यहूदियों के खून के प्यासे हैं इसका इतिहास साक्षी है। आखिर क्या ये इस्लाम और इसाई यहूदी ये सब मानवता के खून के प्यासे धर्म कहलाने योग्य हैं। कहीं ये वही अधर्म तो नही जिसका खात्मा करने के सनातन धर्म के देवी देवताओ के हाथ में हथ्यार हैं। धर्म और मानवता की रक्षा के लिए।

3 तीसरा सवाल अकल की फ्रेंचाइजी लेकर बैठे मानवता के ठेकेदारों का है। मोसुल से लेकर बगदाद तक पसरे मातम से मुंह फेरकर सिर्फ गाजा की ढपली बजाने की जिद उन बुद्धि जीवियों की निष्पक्षता बताती है जो मानवता के मुद्दों का वजन सदा मुस्लिम बनाम अन्य के तराजू में तोलते हैं। बिकी हुई मीडिया जिसको यूरोप और अरब के लोगों से पालन पोषण सरंक्षण मिलता है वो निष्पक्ष कैसे समाचार देगी। और वो समाज जो हथियार बेचता है वो कैसे इसके खिलाफ आवाज उठाएगा। वो कट्टर और गन्दी सोच जो विश्व पर अपने धर्म का जबरदस्ती प्रचार करना चाहती है वो तेल के कुंए पर राज करती है।

Also Read:  Subhash Palekar Ji (Ek aur Rajiv Dixit) Krishi ke krantikari...

अगर इन सबकी आर्थिक स्थति पर चोट की जाये तो न ये हथ्यार खरीद सकेंगे न ही कोई हथ्यार बना सकेगा।

विश्व के बाज़ार भारत को स्वावलंबी बनना होगा। तेल गैस खरीदने के बजाय, अपने देश में बनाना होगा। हर गाँव में बिजली नही गैस नही लेकिन गोबर बहुत है। उस गोबर से बिजली भी बन सकती है, गैस भी । उस गैस से रसोई गैस भी बन सकती है, पेट्रोल डीजल का विकल्प भी। उस गैस रहित गोबर से जैविक खाद और कीटनाशक भी बन सकते हैं।

ये सब अगर भारत करेगा जो की विश्व का बाज़ार है तो विश्व के अन्य देशों को भी रास्ता मिलेगा और राक्षस सोच का अंत होगा। पूंजीवाद खत्म होगा। समाज में competition नही cooperation होगा क्यूंकि decentralisation होगा। सब स्वावलंबी तभी मानवता का विकास।

जय हिन्द।

कोई टिप्पणी नहीं है

कोई जवाब दें