अफगानिस्तान कभी भारत का ही अंग था।

अफगानिस्तान कभी भारत का ही अंग था।

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अफगानिस्तान कभी भारत का ही अंग था।

कुछ तथ्य ताकि आप आगे बढ़ सकें ।

1 अफगान + स्थान
स्थान शब्द अरबी या अन्य भाषा में नही है ।

यह संस्कृत शब्द है। कोई भी देश का नाम उसकी भाषा में ही होता है । स्थान शब्द से यह तथ्य स्पष्ट होता है की वहां संस्कृत भाषा के बहुसंख्यक लोग थे जिन्होंने अपने देश का नाम ऐसा रखा।

2 महाभारत का युद्ध
उसमे दुर्योधन की माँ थी गंधारी
जो गांधार के राजा की बेटी थी।
गांधार आज के अफगानिस्तान में है ।
गांधार भारत का ही अंग था महाभारत के समय में  ।

3 पिछले दिनों आपने देखा होगा समाचारो में क8 बुद्ध की विशाल प्रतिमाये तालिबान ने तोड़ दी। याद आया ? यानि वहां पर बौद्ध धर्म के बहुसंख्यक रहे होंगे जिन्होंने कई वर्षो की मेहनत के बाद ऐसी विशाल पहाड़ को तोड़कर प्रतिमाये बनाई होंगी। इस्लाम के क्रूर राक्षस तो ये काम कदापि नही कर सकते।

4 हिन्दुकुश (कुश माने slaughter) पर्वत (800 किलोमीटर की पर्वत श्रृंखला) जहाँ हिन्दुओ की इतनी गिनती में हत्या की गयी की उस पर्वत का नाम हिन्दू कुश पड़ गया। हिन्दुओ को कहीं और से पकड़कर वहां लेजाकर नही मारा गया (क्या ये सम्भव है ?)
यानि वहीँ के हिन्दू निवासियों को बाबर और मुहम्मद के राक्षसों ने मारा था।

हिन्दुओ के नाम पर 800 किलोमीटर लम्बी पर्वत श्रृंखला किसी विदेश में मिलेगी क्या ?
नही न तो अर्थात वह क्षेत्र हिन्दुओ का ही था और भारत का अंग था।

अब आगे

26 मई 1739 को अकबर जो दिल्ली की गद्दी पर शासन करता था उसने ईरान के नादिर शाह से संधि की और उपगण स्थान (आज का अफगान स्थान) उसे सौंप दिया था।
17रवी शताब्दी तक विश्व में अफगानिस्थान नाम का कोई देश नही था।

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महान संस्कृत व्याकरण आचार्य पाणिनि जी
और
गुरु गोरखनाथ जी अफगानिस्तान क्षेत्र से ही थे।

हिन्दू से बौद्ध
बौद्ध से इस्लाम
बना उपगण स्थान
यानि अफगान स्थान ।

ऐसे ही अन्य देश जो कभी भारत का अंग थे उन पर हमारी अगली पोस्ट जल्दी की जाएँगी।

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